Thursday, October 29, 2026
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Sexual Intention: शादी का प्रस्ताव देते हुए नाबालिग का हाथ पकड़ना धारा 354 IPC के तहत ‘शील भंग’ नहीं…झारखंड हाई कोर्ट का फैसला पढ़िए

Sexual Intention: झारखंड हाईकोर्ट ने सरायकेला-खरसावां की विशेष POCSO अदालत द्वारा एक व्यक्ति को दी गई सजा के आदेश को रद्द करते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया।

हाईकोर्ट जस्टिस राजेश कुमार ने कहा, यदि किसी नाबालिग लड़की का हाथ केवल शादी का प्रस्ताव देते समय पकड़ा गया हो और इसके पीछे कोई गलत या यौन इरादा (Bad/Sexual Intention) न हो, तो यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।

मामला क्या था?: 2017 का चाकुलिया-चांडिल मामला

घटना: 21 जून 2017 को एक 10 वर्षीय नाबालिग लड़की स्कूल से घर लौट रही थी। आरोप था कि अपीलकर्ता (आरोपी) ने उसका हाथ पकड़ा और शादी की बात कहते हुए उसे ले जाने की कोशिश की।

FIR और मुकदमा: पीड़िता के पिता की शिकायत पर चांडिल थाने में IPC की धारा 354 और POCSO Act की धारा 8 के तहत मामला दर्ज किया गया।

स्पेशल कोर्ट का फैसला (2023): ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO के आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन IPC की धारा 354 के तहत दोषी ठहराते हुए 1 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील की।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण और फैसला

आपराधिक इरादा (Mens Rea) अनिवार्य

हाई कोर्ट ने पीड़िता (P.W.5) के बयानों का गहराई से अवलोकन किया। पीड़िता के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने केवल शादी का प्रस्ताव रखा था और उसका कोई बदनियत या गलत इरादा नहीं था।

अदालत का मुख्य अवलोकन: “पीड़िता के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि लड़के ने केवल उसे शादी का प्रस्ताव दिया था और उसकी कोई बदनियति नहीं थी। ऐसे में IPC की धारा 354 के आवश्यक तत्व आकर्षित नहीं होते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट के नज़ीर (Precedent) का हवाला

अदालत ने ‘नरेश अनेजा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा जताया, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि धारा 354 IPC का अपराध लागू करने के लिए आपराधिक बल (Criminal Force) का प्रयोग महिला की लज्जा भंग करने के विशिष्ट इरादे से किया जाना अनिवार्य है। साक्ष्यों के बिना केवल अस्पष्ट या सामान्य बयानों के आधार पर आपराधिक इरादे (Mens Rea) का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

अंतिम आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 22 अगस्त 2023 को दिए गए दोषसिद्धि के आदेश और 28 अगस्त 2023 को दी गई सजा को रद्द कर दिया और आपराधिक अपील को स्वीकार कर लिया। कोर्ट को सूचित किया गया कि अपीलकर्ता पहले ही अपनी सजा पूरी करके जेल से रिहा हो चुका है।

केस मैट्रिक्स: Jharkhand High Court Judgment

प्रक्रियात्मक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतझारखंड उच्च न्यायालय (Ranchi Bench)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस राजेश कुमार
अपीलकर्ता के वकीलएडवोकेट ओमिया अनुशा (JHCLSC)
राज्य के वकीलबिश्वाम्भर शास्त्री (A.P.P.)
मुख्य विधिक सिद्धांतबिना किसी गलत इरादे के केवल शादी के प्रस्ताव के लिए हाथ पकड़ना IPC 354 (शील भंग) के दायरे में नहीं आता।
अदालत का अंतिम आदेशनिचली अदालत की दोषसिद्धि रद्द (Conviction Set Aside)।
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