Tuesday, September 8, 2026
HomeHigh CourtClass of Women: क्या उच्च शैक्षणिक योग्यता या वैज्ञानिक पद प्रतिष्ठा महिला-विरोधी...

Class of Women: क्या उच्च शैक्षणिक योग्यता या वैज्ञानिक पद प्रतिष्ठा महिला-विरोधी बयानों में FIR रद्द कराने का आधार बन सकती है? यहां पढ़ें

Class of Women: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, किसी व्यक्ति की वैज्ञानिक प्रसिद्धि, उच्च शैक्षणिक योग्यता या सार्वजनिक उपलब्धियां महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मामलों में बचाव (Defence) का आधार नहीं बन सकतीं।

हाईकोर्ट जस्टिस जी. के. इलांथिरैयन ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक और राजनीतिक विश्लेषक डॉ. पोनराज (Dr. Ponraj) के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने से इनकार करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। यह मामला अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की महिला सदस्यों के खिलाफ की गई विवादित और अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है।

मामला क्या था?: TVK की महिला सदस्यों पर आपत्तिजनक टिप्पणी

विवादित इंटरव्यू: 18 मार्च को ‘King 360’ यूट्यूब चैनल पर प्रसारित एक साक्षात्कार में डॉ. पोनराज ने TVK पार्टी की महिला पदाधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यंत अपमानजनक भाषा (जिसमें ‘वेश्या’ और ‘अनपढ़’ जैसे शब्द शामिल थे) का प्रयोग किया था।

दर्ज धाराएं: पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 (महिला की लज्जा का अनादर), धारा 353(1)(c), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67, और तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत दो FIR दर्ज की थीं।

याचिकाकर्ता की दलील: डॉ. पोनराज ने तर्क दिया कि वे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सहयोगी और वैज्ञानिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका बयान संदर्भ से बाहर लिया गया था, शिकायतें राजनीति से प्रेरित थीं और संबंधित वीडियो को यूट्यूब से हटा भी दिया गया है।

हाई कोर्ट की मुख्य विधिक टिप्पणियां

उच्च पद पर बैठे व्यक्तियों की जिम्मेदारी अधिक

कोर्ट ने साफ किया कि समाज में उच्च दर्जा रखने वाले लोगों को अपने बयानों में ज्यादा संयम बरतना चाहिए।

अदालत का मुख्य अवलोकन: “वैज्ञानिक प्रसिद्धि, उच्च शैक्षणिक योग्यता और सार्वजनिक उपलब्धियां रखने वाले व्यक्ति पर सार्वजनिक विमर्श में अधिक जिम्मेदारी होती है। उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक या अपमानजनक टिप्पणियां न करें। जब प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध (Cognizable Offences) प्रकट होते हों, तो ऐसी उपलब्धियों को FIR रद्द कराने के बचाव के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।”

वीडियो हटाने से अपराध खत्म नहीं होता

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि वीडियो हटाने से मामला शांत हो जाता है। अदालत ने कहा कि यूट्यूब से वीडियो हटा लेने से कथित अपराध मिट या समाप्त नहीं हो जाता।

BNS की धारा 79 का दायरा: “महिलाओं का समूह भी शामिल”

अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी। इस धारा में प्रयुक्त शब्द “कोई भी महिला” (Any Woman) केवल किसी एक नामजद व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यदि अपमानजनक टिप्पणियां महिलाओं के किसी पहचान योग्य या निश्चित वर्ग (Identifiable Class of Women) के प्रति की गई हैं (जैसे कि किसी पंजीकृत राजनीतिक पार्टी की महिला कार्यकर्ता), तब भी BNS की धारा 79 लागू होगी।

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

याचिकाएं खारिज: मद्रास हाई कोर्ट ने डॉ. पोनराज की दोनों FIR रद्द करने वाली याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया।

समयबद्ध जांच का निर्देश: अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह 12 सप्ताह (3 महीने) के भीतर जांच पूरी कर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी अंतिम रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल करे।

केस मैट्रिक्स: Madras High Court Order

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस जी. के. इलांथिरैयन
केस का नामडॉ. पोनराज बनाम तमिलनाडु राज्य (Dr. Ponraj v. State)
मुख्य कानूनी मुद्दाक्या उच्च शैक्षणिक योग्यता या वैज्ञानिक पद प्रतिष्ठा महिला-विरोधी बयानों में FIR रद्द कराने का आधार बन सकती है?
लागू धाराएंBNS की धारा 79 व 353(1)(c), IT Act की धारा 67, और TN महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम
अदालत का फैसलानहीं, पद या प्रतिष्ठा अपराध से छूट नहीं देती; 12 हफ्तों में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने का आदेश।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
33 ° C
33 °
33 °
66 %
2.1kmh
96 %
Tue
33 °
Wed
35 °
Thu
32 °
Fri
34 °
Sat
33 °

Recent Comments