Trial Court: विदेशों में नौकरी लगवाने और फर्जी वीजा/दस्तावेजों के जरिए ठगी करने के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
समाचार पत्रों में छापे पूरा आदेश
हाईकोर्ट के जस्टिस आलोक जैन ने परमजीत कौर बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य (Paramjit Kaur v State of Punjab and Others) मामले की सुनवाई करते हुए अनोखा और सख्त आदेश पारित किया। अदालत ने नौकरी के नाम पर फ्रॉड करने की आरोपी एक महिला को निर्देश दिया है कि राजीनामे (Compromise) के आधार पर उसकी FIR रद्द (Quash) करने पर विचार करने से पहले उसे पंजाब के कम से कम 5 प्रमुख समाचार पत्रों में अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों का विवरण सार्वजनिक (Public Notice) करना होगा।
मामला क्या था?: दुबई में ड्राइवर की नौकरी के नाम पर ठगी
2022 का केस: शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि परमजीत कौर ने उसे दुबई में हैवी ड्यूटी ड्राइवर की नौकरी दिलाने के लिए ₹3.5 लाख मांगे थे, जिसमें से उसने ₹1.82 लाख ले लिए।
दर्ज FIR: उसके खिलाफ धोखाधड़ी (IPC 420), अमानत में खयानत (IPC 406) और ‘पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल (रेगुलेशन) एक्ट’ की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
समझौते के आधार पर याचिका: मई में आरोपी महिला ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि विवाद पूरी तरह से पैसों का था और अब दोनों पक्षों के बीच राजीनामा (Compromise) हो चुका है, इसलिए FIR रद्द की जाए।
हाई कोर्ट की मुख्य विधिक टिप्पणियां और शर्त
“जनता को ऐसे लोगों का पुराना रिकॉर्ड पता होना जरूरी”
कोर्ट ने माना कि विदेश में बसने का सपना देखने वाले निर्दोष लोगों के साथ फर्जी वीजा और कागजातों के जरिए की जाने वाली ठगी एक गंभीर अपराध है। आरोपी महिला के खिलाफ पहले से ही कई अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं।
अदालत का मुख्य अवलोकन: विदेशों में प्लेसमेंट, फर्जी दस्तावेज और वीजा प्रक्रिया से जुड़े धोखाधड़ी के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिन्होंने कई निर्दोष जिंदगियों को प्रभावित किया है। राजीनामे के आधार पर FIR रद्द करने की प्रार्थना पर विचार करने से पहले, यह बेहद आवश्यक है कि आम जनता को उसके पुराने रिकॉर्ड (Antecedents) और आपराधिक इतिहास की जानकारी दी जाए।
पब्लिक नोटिस में क्या-क्या छापना अनिवार्य होगा?
अदालत ने आरोपी महिला को निर्देश दिया कि वह पंजाब में व्यापक रूप से प्रसारित होने वाले कम से कम 5 समाचार पत्रों (जिनमें से न्यूनतम 2 पंजाबी भाषा के अखबार हों) में सार्वजनिक सूचना जारी करे।
इस पब्लिक नोटिस में निम्नलिखित विवरण होना अनिवार्य है: आरोपी महिला का पूरा नाम, पता और संपर्क विवरण। उसके खिलाफ दर्ज सभी FIR का ब्योरा (चाहे वे मामले लंबित हों, तय हो चुके हों या रद्द किए जा चुके हों)। उन सभी मामलों की जानकारी, जहां फर्जी वीजा, भ्रामक दावों या झांसे के जरिए पैसे लिए गए थे और बाद में पीड़ितों को पैसे लौटाकर समझौते किए गए।
अदालत का अंतिम आदेश
ट्रायल कोर्ट की रिपोर्ट पर रोक: अदालत ने साफ किया कि जब तक समाचार पत्रों की प्रतियां ऑन-रिकॉर्ड जमा नहीं कर दी जातीं, तब तक समझौते पर निचली अदालत (Trial Court) की रिपोर्ट पर विचार नहीं किया जाएगा।
अगला कदम: पब्लिक नोटिस की प्रतियां पेश करने के बाद ही FIR रद्द करने वाली याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।
केस मैट्रिक्स: P&H High Court Order
| प्रक्रियात्मक और विधिक पहलू | विवरण / अदालत का फैसला |
| संबंधित अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab & Haryana High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस आलोक जैन |
| केस का नाम | परमजीत कौर बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य |
| मुख्य आरोप | फर्जी वीजा, धोखाधड़ी एवं पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल एक्ट का उल्लंघन |
| अदालत का अनूठा निर्देश | राजीनामा स्वीकार करने से पहले 5 अखबारों (2 पंजाबी) में अपने सभी आपराधिक केसों का पब्लिक नोटिस छापना अनिवार्य। |
| अदालत का उद्देश्य | ट्रैवल एजेंटों द्वारा बार-बार ठगी कर पैसे देकर समझौते कर लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और जनता को सतर्क करना। |

