Saturday, August 15, 2026
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Transaction By Fraud: SBI ने ट्रांजैक्शन को अधिकृत होने के दावे को ATM की CCTV पर नहीं दिखा सका…ग्राहक को ₹1.4 लाख से अधिक दिए

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
अदालत/आयोगदिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
संबंधित बैंकस्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
विवादित राशि₹1.30 लाख (4 एटीएम विड्रॉल + 2 बैंक ट्रांसफर)
बैंक की मुख्य लापरवाहीCCTV फुटेज और ट्रांजैक्शन ऑथेंटिकेशन रिकॉर्ड पेश न कर पाना।
आयोग का फैसलाSBI की अपील खारिज; 6% ब्याज के साथ ₹1.30 लाख रिफंड व ₹10,000 मुआवजा देने का आदेश।

Transaction By Fraud: दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Delhi State Consumer Disputes Redressal Commission) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अपील खारिज करते हुए उसे अपने एक ग्राहक को ₹1.30 लाख मूल राशि (ब्याज सहित) और ₹10,000 मानसिक प्रताड़ना व कानूनी खर्च के रूप में लौटाने का आदेश दिया है।

आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता धींगड़ा सहगल और सदस्य विमला कुमारी की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग (पूर्व) के 21 अगस्त 2023 के आदेश को बरकरार रखते हुए 10 अगस्त 2026 को SBI की याचिका खारिज कर दी।अदालत ने यह फैसला 2018 में ग्राहक के खाते से हुए अनधिकृत (Fraudulent) एटीएम ट्रांजैक्शन और बैंक ट्रांसफर के मामले में सुनाया, जिसमें SBI न तो सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) पेश कर सका और न ही यह साबित कर पाया कि लेनदेन ग्राहक की अनुमति से हुआ था।

आयोग की प्रमुख और सख्त टिप्पणियां

  1. CCTV फुटेज और रिकॉर्ड पेश करने में बैंक की विफलता:“जिला आयोग ने SBI को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी बिल्कुल सही ठहराया है। बैंक विवादित एटीएम लेनदेन की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने में पूरी तरह विफल रहा। इसके अलावा, प्रासंगिक इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी रिकॉर्ड का एकमात्र कस्टोडियन होने के बावजूद बैंक यह नहीं समझा सका कि ये अनधिकृत लेनदेन कैसे संपन्न हुए।”
  2. सबूत का भार (Burden of Proof) बैंक पर:
    • आयोग ने स्पष्ट किया कि जब ग्राहक ने लेनदेन को चुनौती दी, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी SBI की थी कि लेनदेन ग्राहक के अधिकार और बायोमेट्रिक/पिन प्रमाणीकरण से हुए थे। बैंक ट्रांसफर वाउचर या डेबिट स्लिप पेश करने में भी नाकाम रहा।
  3. NPCI सर्कुलर का हवाला:
    • अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के 26 मार्च 2013 के सर्कुलर का संदर्भ दिया, जिसके तहत ग्राहक द्वारा विवाद उठाने पर बैंक के लिए एटीएम की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

मामले का पृष्ठभूमि विवरण (Case Background)

  • घटना (12 अक्टूबर 2018): मयूर विहार निवासी अमर सिंह के खाते से ₹20,000 के चार एटीएम विड्रॉल (कुल ₹80,000) किए गए। उसी दिन ‘सोनू’ नामक व्यक्ति के खाते में ₹40,000 और ₹10,000 के दो ऑनलाइन/शाखा ट्रांसफर भी दर्ज हुए।
  • फ्रॉड का पता चलना: 22 अक्टूबर 2018 को जब एटीएम से पैसे निकालने पर ‘पर्याप्त राशि नहीं’ का संदेश आया, तब पासबुक अपडेट कराने पर पीड़ित को इस ₹1.30 लाख के फ्रॉड की जानकारी मिली।
  • तत्काल शिकायत: पीड़ित ने उसी दिन बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराई और मयूर विहार फेज-1 पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) भी कराई।
  • बैंक का तर्क: SBI ने तर्क दिया कि ग्राहक ने 3 कार्य दिवसों के भीतर सूचित नहीं किया, इसलिए वह आरबीआई की ‘जीरो लायबिलिटी’ (Zero Liability) नीति का हकदार नहीं है। हालांकि, आयोग ने पाया कि ग्राहक ने जानकारी मिलते ही तुरंत शिकायत की थी और बैंक ने प्रक्रियागत नोटिस का भी जवाब नहीं दिया था।

मुआवजा एवं भुगतान का विवरण

जिला आयोग के जिस फैसले को राज्य आयोग ने सही ठहराया है, उसके अनुसार SBI को निम्नलिखित भुगतान करना होगा:

  1. रिफंड राशि: ₹1.30 लाख (12 अक्टूबर 2018 से 6% वार्षिक ब्याज के साथ)।
  2. मानसिक पीड़ा का मुआवजा: ₹5,000
  3. मुकदमा खर्च (Litigation Cost): ₹5,000 (यदि 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज दर 8% प्रति वर्ष लागू होगी।)

ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण सबक (Key Takeaway)

  • तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आपके खाते से कोई अनधिकृत या संदिग्ध लेनदेन होता है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और अपनी शिकायत का लिखित प्रमाण (Acknowledge Copy) संभालकर रखें।
  • सब्त संभालना बैंक का काम: सीसीटीवी फुटेज, एटीएम जर्नल और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन लॉग्स की सुरक्षा बैंक की जिम्मेदारी है। बैंक अपनी लापरवाही का ठीकरा ग्राहक पर नहीं फोड़ सकता।

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