मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन एवं न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल (मदुरै पीठ) |
| याचिकाकर्ता | बी. जयादुर्गावेणी (शहीद SI वी. बालू की बेटी) |
| संबंधित नियम | तमिलनाडु सिविल सर्विसेज (अनुग्रह के आधार पर नियुक्ति) नियम, 2023 |
| मुख्य सिद्धांत | अनुकंपा नियुक्ति वित्तीय बदहाली को दूर करने के लिए है; यदि परिवार में अन्य सदस्य कमाऊ है या स्थिति ठीक है, तो यह अधिकार नहीं बनता। |
| अदालत का निर्णय | अपील खारिज; राज्य सरकार का नौकरी न देने का फैसला बरकरार। |
Compassionate Grounds: मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) की मदुरै पीठ ने ड्यूटी के दौरान शहीद हुए पुलिस सब-इंस्पेक्टर वी. बालू की बेटी को अनुकंपा (Compassionate Grounds) के आधार पर सरकारी नौकरी देने से इनकार करने के तमिलनाडु सरकार और सिंगल जज के फैसले को सही ठहराया है।
न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन (Justice CV Karthikeyan) और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल (Justice R Sakthivel) की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य अचानक किसी सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद परिवार को आर्थिक तंगी और कंगाली (Penury) से बचाना है, न कि यह एक सामान्य अधिकार या दावा है।
हाई कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
- अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य:“अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का एकमात्र उद्देश्य लोक सेवक की अचानक मृत्यु के कारण परिवार को चरम आर्थिक तंगी (Penury) और क्षति के बीच सहारा देना है। यदि परिवार स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम है, तो ऐसी नौकरी किसी अन्य जरूरतमंद परिवार को दी जा सकती है जो वास्तव में बदहाली से गुजर रहा हो।”
- शर्तों को पूरा न करना:
- अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा हो।
- तमिलनाडु सिविल सर्विसेज (अनुग्रह के आधार पर नियुक्ति) नियम, 2023 के मानदंडों के अनुसार, यदि परिवार वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर है, तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- घटना: सब-इंस्पेक्टर वी. बालू की वर्ष 2021 में तूथुकुडी (Thoothukudi) में ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई थी।
- याचिकाकर्ता की मांग: उनकी बेटी बी. जयादुर्गावेणी ने तमिलनाडु सिविल सर्विसेज रूल्स, 2023 के तहत अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग की थी।
- पारिवारिक स्थिति: सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि याचिकाकर्ता का भाई एक राष्ट्रीयकृत बैंक (Nationalised Bank) में कार्यरत है और परिवार के पास लगभग ₹5 लाख का अपना घर है।
- अदालत का फैसला: 11 सितंबर 2025 के सिंगल जज के आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए डिविजन बेंच ने माना कि परिवार आत्मनिर्भर है और नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता को पूरा नहीं करता।

