Wednesday, September 30, 2026
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Death Claim: तेलंगाना राज्य उपभोक्ता आयोग…टाटा एआईए की ₹1 करोड़ की डेथ क्लेम खारिज करने की अपील रद्द, नॉमिनी के पक्ष में फैसला, जानें केस

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
फोरम/कोर्टतेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (TSCDRC)
बीमा कंपनीटाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस (Tata AIA Life Insurance)
दावा राशि₹1 करोड़ + 9% वार्षिक ब्याज + ₹50,000 मुआवजा + ₹10,000 अदालती खर्च
मुख्य कानूनी सबकपूर्व प्रस्ताव न बताने पर क्लेम खारिज करने के लिए बीमाकर्ता को यह साबित करना होगा कि बीमित व्यक्ति को स्थगन की स्पष्ट जानकारी थी।

Death Claim: तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (TSCDRC) ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस (Tata AIA Life Insurance) की याचिका खारिज करते हुए ₹1 करोड़ के जीवन बीमा दावे (Death Claim) को 9% ब्याज, ₹50,000 मुआवजे और ₹10,000 मुकदमों के खर्च के साथ भुगतान करने का आदेश बरकरार रखा है।

आयोग ने महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत स्थापित करते हुए कहा कि केवल पूर्व प्रस्ताव के स्थगित होने या संदेह के आधार पर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता; बीमा कंपनी को यह साबित करना होगा कि नीतिधारक ने जानबूझकर (Conscious Concealment) जानकारी छिपाई थी।

आयोग के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी सिद्धांत

  1. जानबूझकर जानकारी छिपाने का प्रमाण अनिवार्य:“तथ्य को छिपाने के आधार पर दावा खारिज करने के लिए बीमा कंपनी को साबित करना होगा कि नीतिधारक को पूर्व प्रस्ताव के स्थगित (Postponed) होने की स्पष्ट जानकारी थी। केवल संदेह (Suspicion) सबूत का स्थान नहीं ले सकता।”
  2. सुप्रीम कोर्ट के ‘रेखाबेन राठौड़’ फैसले में अंतर
    • बीमा कंपनी ने Reliance Life Insurance v. Rekhaben Nareshbhai Rathod केस का हवाला दिया था।
    • आयोग ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पूर्व प्रस्ताव की जानकारी महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इस मामले में टाटा एआईए यह साबित करने में विफल रही कि मृतक को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल द्वारा उसके प्रस्ताव को स्थगित किए जाने की सूचना मिली थी।
  3. कंपनी की अपनी मेडिकल जांच
    • टाटा एआईए ने पॉलिसी जारी करने से पहले मृतक की अपनी स्वतंत्र मेडिकल जांच कराई थी जिसमें वह स्वस्थ पाया गया था। इसलिए कंपनी बाद में किसी अन्य कंपनी के मेडिकल निष्कर्षों का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती।

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • पॉलिसी विवरण: केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने अक्टूबर 2019 में टाटा एआईए की ‘संपूर्ण रक्षा पॉलिसी’ (सम एश्योर्ड ₹1 करोड़) ली थी।
  • मृत्यु का कारण: मई 2021 में (पॉलिसी लेने के 2 साल के भीतर) कोविड-19 संक्रमण के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
  • दावा खारिज करने का आधार: टाटा एआईए ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मृतक ने ICICI प्रूडेंशियल के एक पूर्व ₹1 करोड़ के प्रस्ताव को छिपाया था, जिसे दिल से जुड़ी समस्या (LVH) के कारण स्थगित कर दिया गया था।
  • परिवार का पक्ष: पत्नी और बेटे ने जिला आयोग का रुख किया। जिला आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे टाटा एआईए ने राज्य आयोग में चुनौती दी थी। 12 जून 2026 को राज्य आयोग ने टाटा एआईए की अपील खारिज कर दी।

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