Tuesday, November 3, 2026
HomeBREAKING INDIAAllahabad Court: उत्तर प्रदेश में सरकारी डाॅक्टर की निजी प्रैक्टिस पर रोक…इलाहाबाद...

Allahabad Court: उत्तर प्रदेश में सरकारी डाॅक्टर की निजी प्रैक्टिस पर रोक…इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहा

Allahabad Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निजी प्रैक्टिस में लिप्त सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सरकार से कार्रवाई की स्थिति का हलफनामा देने के लिए कहा गया

अदालत ने प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा), यूपी को सरकारी कार्रवाई की स्थिति का खुलासा करते हुए एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया और मामले में आगे की सुनवाई के लिए 26 मार्च की तारीख तय की। यह आदेश हाल ही में न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने डॉ. अरविंद गुप्ता, जो यहां सरकारी मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एचओडी और प्रोफेसर हैं, द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था।

याचिकाकर्ता डॉ. गुप्ता ने नर्सिंग होम के गलत इलाज को लेकर दायर की याचिका

वर्तमान मामला रूपेश चंद्र श्रीवास्तव नाम के एक व्यक्ति द्वारा राज्य उपभोक्ता मंच के समक्ष दायर की गई एक शिकायत के बाद सामने आया है, जिसमें याचिकाकर्ता डॉ. गुप्ता द्वारा उन्हें प्रयागराज जिले के एक निजी नर्सिंग होम में गलत इलाज दिया गया था। 8 जनवरी को, उच्च न्यायालय ने सरकारी डॉक्टरों द्वारा मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नहीं देखने पर चिंता व्यक्त की थी और राज्य सरकार को डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को रोकने के लिए एक नीति बनाने का निर्देश दिया था।

37 जिला मजिस्ट्रेट ने राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट

अदालत के पहले के निर्देश के क्रम में, प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) का एक व्यक्तिगत हलफनामा अदालत के समक्ष दायर किया गया था जिसमें कहा गया था कि 37 जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जो परीक्षण के चरण में हैं। अदालत ने कहा कि प्रमुख सचिव द्वारा दायर पिछले हलफनामे में उल्लेख किया गया था कि निजी प्रैक्टिस में लिप्त पाए गए डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी। अदालत ने कहा, मौजूदा हलफनामे में अनुशासनात्मक कार्यवाही के चरण और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोई उल्लेख नहीं है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई करे राज्य सरकार, डॉक्टरों में जाए संदेश

अदालत ने राज्य सरकार से अपेक्षा की कि वह जल्द से जल्द अनुशासनात्मक कार्यवाही समाप्त करे ताकि उन सभी डॉक्टरों को संदेश भेजा जा सके जो सरकारी अस्पतालों, विशेष रूप से मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में कार्यरत हैं ताकि वे निजी प्रैक्टिस से दूर रहें।8 जनवरी के अपने पहले आदेश में, अदालत ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह राज्य भर में जिला मुख्यालयों में स्थित प्रांतीय चिकित्सा सेवाओं और जिला अस्पतालों में नियुक्त डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को रोकने के लिए एक नीति लाए।

मरीजों को नर्सिंग होम में रेफर करना गंभीर: अदालत

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था, “यह एक खतरा बन गया है कि मरीजों को इलाज के लिए निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है और घसीटा जा रहा है। जो डॉक्टर राज्य सरकार द्वारा या तो प्रांतीय चिकित्सा सेवाओं के तहत या राज्य मेडिकल कॉलेजों में नियुक्त किए जाते हैं, वे मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज या देखभाल नहीं कर रहे हैं, और सिर्फ पैसे के लिए उन्हें निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों में भेजा जा रहा है।

30 अगस्त 1983 को आदेश का दिया था हवाला…

30 अगस्त, 1983 के एक सरकारी आदेश के अनुसार, सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस के हकदार नहीं होंगे। निजी प्रैक्टिस के बदले में, एक सरकारी डॉक्टर को गैर-प्रैक्टिस वेतन या भत्ता या दोनों का भुगतान किया जाएगा, जैसा कि सरकार समय-समय पर निर्दिष्ट कर सकती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
29.7 ° C
29.7 °
29.7 °
54 %
3.5kmh
4 %
Tue
30 °
Wed
31 °
Thu
30 °
Fri
30 °
Sat
30 °

Recent Comments