Tuesday, September 1, 2026
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Aravalli hills: अरावली विवाद पर सुप्रीम निर्देश…पर्यावरण मंत्रालय से विशेषज्ञों के नाम मांगे, कहा- केवल ‘वैध खनन’ की ही अनुमति होगी

Aravalli hills: अरावली पहाड़ियों के संरक्षण और उनकी सटीक परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में केवल कानूनी रूप से वैध खनन की ही अनुमति दी जाएगी। शीर्ष अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय और अन्य हितधारकों से उन डोमेन विशेषज्ञों (Domain Experts) के नाम सुझाने को कहा है, जो अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा तय करने वाली समिति का हिस्सा बनेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा पर उठ रहे पर्यावरणविदों के विरोध को देखते हुए अपने पिछले आदेशों पर रोक लगा रखी है।

विवाद की जड़

  • परिभाषा का पेच: पूर्व में एक समिति ने सुझाव दिया था कि 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भू-भाग को ‘अरावली पहाड़ी’ और 500 मीटर के भीतर ऐसी दो पहाड़ियों के समूह को ‘अरावली रेंज’ माना जाए।
  • चिंता: पर्यावरणविदों का तर्क है कि इस संकीर्ण परिभाषा से अरावली का एक बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकता है, जिससे वहां अवैध खनन और निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
  • यथास्थिति (Status Quo): कोर्ट ने फिलहाल अरावली क्षेत्र में सभी खनन गतिविधियों पर रोक बरकरार रखी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणियां

  • विशेषज्ञों की भूमिका: सीजेआई ने कहा, “हमें विशेषज्ञों को बताने दें (कि परिभाषा क्या होनी चाहिए)। हम सभी बाधाओं को पार कर सही गंतव्य तक पहुंचेंगे।”
  • वैध खनन पर रुख: जब वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि वैध लाइसेंस वाली कंपनियों का काम रुक गया है, तो कोर्ट ने कहा कि वह वैध खनन के पक्ष में है, लेकिन पहले कुछ प्रारंभिक मुद्दों और परिभाषाओं का समाधान जरूरी है।
  • लिखित नोट: कोर्ट ने सभी पक्षों को 10 मार्च तक अपने लिखित नोट जमा करने का निर्देश दिया है।

अगला कदम

सुप्रीम कोर्ट विशेषज्ञों का पैनल गठित करेगा और अगली सुनवाई में उन मुद्दों को तय करेगा जिन पर फैसला लिया जाना है। तब तक, 25 अगस्त 2010 की भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) रिपोर्ट के आधार पर अरावली क्षेत्र में बिना अनुमति के किसी भी नए खनन की अनुमति नहीं होगी।

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