Thursday, September 10, 2026
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CJI on Cyber-Crime: साइबर अपराध केवल आर्थिक अपराध नहीं, यह हमला है…जमानत नियमों और फंड ट्रांसफर पर दिया बड़ा सुझाव, पढ़िए

CJI on Cyber-Crime: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने साइबर अपराधियों से निपटने के लिए कानूनी और तकनीकी ढांचे में आमूल-चूल बदलाव का आह्वान किया।

नई दिल्ली में सीबीआई (CBI) के स्थापना निदेशक की याद में आयोजित 22वें डी.पी. कोहली मेमोरियल लेक्चर को संबोधित किया। साइबर अपराध की चुनौतियां- पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका” विषय पर बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के सदस्यों को जमानत देते समय अदालतों को केवल एक व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क के ढांचे और उसके व्यापक प्रभाव को देखना चाहिए।

जमानत न्यायशास्त्र (Bail Jurisprudence) में बदलाव

  • CJI ने कहा कि जब कोई आरोपी किसी संगठित साइबर-धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा होता है, तो अदालतों को अपना नजरिया बदलना होगा।
  • व्यापक दृष्टिकोण: जमानत अर्जी पर विचार करते समय केवल एक शिकायत के तथ्यों को न देखें।
  • नेटवर्क का ढांचा: यह देखें कि वह नेटवर्क कितना बड़ा है, कितना समन्वित (Coordinated) है और उसका समाज पर निरंतर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
  • तर्क: साइबर अपराध अक्सर कई राज्यों और देशों में फैले होते हैं, इसलिए व्यक्तिगत आधार पर जमानत देना पूरे गिरोह को फायदा पहुँचा सकता है।

विदेशी फंड ट्रांसफर पर पॉज़ (Pause) का सुझाव

  • साइबर ठगी के पैसे को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए CJI ने एक क्रांतिकारी सुझाव दिया।
  • सत्यापन के लिए रोक: विदेशी खातों में पैसे भेजने के लेन-देन को कुछ समय के लिए रोका (Pause) जाना चाहिए ताकि खाताधारक का सत्यापन किया जा सके।
  • ऑटोमेटेड फ्रीजिंग: यदि खाते पर कोई संदेह हो, तो सिस्टम को उसे अपने आप फ्रीज कर देना चाहिए।
  • छूट: उन्होंने यह भी साफ किया कि स्थापित भारतीय व्यवसायों (Legitimate Businesses) को इस प्रक्रिया से छूट दी जानी चाहिए ताकि व्यापार प्रभावित न हो।

डिजिटल अरेस्ट और ₹44,000 करोड़ की लूट

  • 2024-25 में ठगी: भारत से साइबर अपराधियों ने ₹44,000 करोड़ से अधिक की चपत लगाई है।
  • डिजिटल अरेस्ट: अकेले गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ₹30,000 करोड़ लूटे गए हैं।
  • वसूली की दर: सबसे दुखद पहलू यह है कि ठगी गई राशि का मात्र 10% ही ट्रेस या रिकवर किया जा सका है।

पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण (Victim-Centric Approach)

  • CJI ने विशेष रूप से बुजुर्गों और सेवानिवृत्त नागरिकों का जिक्र किया।
  • जीवनभर की कमाई: साइबर अपराधी अक्सर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं, जो अपनी दशकों की ईमानदारी की कमाई एक पल में खो देते हैं।
  • संवेदनशीलता: पुलिस और सिस्टम को केवल कुशल नहीं, बल्कि ‘सहानुभूतिपूर्ण’ (Empathetic) होना चाहिए। रिपोर्टिंग प्रक्रिया सरल होनी चाहिए ताकि शुरुआती कुछ घंटों (Golden Hours) में ही पैसा रिकवर किया जा सके।

पुलिस और न्यायपालिका के लिए निर्देश

  • CJI ने दोनों को “जुड़वां स्तंभ” बताते हुए टिप्पणी की।
  • तकनीकी प्रशिक्षण: जजों को केवल कानूनी ज्ञान ही नहीं, बल्कि तकनीकी समझ (Technological Understanding) से भी लैस होना चाहिए।
  • एकीकृत कमान: विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने के लिए एक ‘इंटीग्रेटेड कमांड स्ट्रक्चर’ होना चाहिए।
  • क्षेत्राधिकार से परे: साइबर अपराध अब किसी सीमा से बंधे नहीं हैं, इसलिए जांच के मॉडल भी लचीले और सहयोगात्मक होने चाहिए।

एल्गोरिदम की दुनिया में मानवीय कानून

चीफ जस्टिस ने अंत में कहा कि न्यायपालिका का काम केवल विवाद सुलझाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जिसमें डिजिटल समाज सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने जोर दिया कि “एल्गोरिदम और नेटवर्क की इस दुनिया में भी कानून का शासन मानवीय बना रहना चाहिए।

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