Friday, October 2, 2026
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Contempt of Court: खुली अदालत में हंगामा और LinkedIn पर बदजुबानी…अब देखिए दिल्ली के इस वकील पर यह हुई कार्रवाई

Contempt of Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt of Court) के आरोप तय किए हैं।

मामला खुली अदालत में जज पर “मिलीभगत” के आरोप लगाने और बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर अपमानजनक पोस्ट डालने से जुड़ा है। हाईकोर्ट के
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट ने माना कि वकील का आचरण न केवल अशोभनीय था, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला भी था।

आरोप: अदालत की गरिमा को कम करना

  • कोर्ट ने वकील के खिलाफ आरोपों को पूरी तरह से स्पष्ट किया।
  • असंसदीय भाषा: सुनवाई के दौरान अपनी आवाज ऊंची करना और जज के खिलाफ “असंसदीय भाषा” का इस्तेमाल करना।
  • गंभीर आरोप: जज पर विपक्षी पार्टी के साथ “मिलीभगत” (Collusion) का आरोप लगाना।
  • LinkedIn पोस्ट: अदालती कार्यवाही और न्यायिक अधिकारी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री अपलोड करना।

डिजिटल साक्ष्य और LinkedIn का ‘संयोग’

  • अदालत ने इस मामले में साइबर सेल (Delhi Police) और LinkedIn Corporation से रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
  • IP एड्रेस का मिलान: जांच में पता चला कि जिस IP एड्रेस से पोस्ट डाली गई, वह वकील के मोबाइल सेवा प्रदाता (Mobile Service Provider) से जुड़ा है।
  • समय का खेल: “दिलचस्प” बात यह रही कि LinkedIn अकाउंट 29 जनवरी, 2026 को उसी दिन बंद (Close) कर दिया गया, जिस दिन कोर्ट ने इसकी जानकारी मांगी थी।
  • बचाव: वकील ने दावा किया कि उनके नाम से कई अकाउंट हो सकते हैं और वह पोस्ट उनकी नहीं है। इस पर जस्टिस चावला ने कहा, “यह साक्ष्य (Evidence) का विषय है कि एक ही IP एड्रेस का उपयोग कई अकाउंट कैसे कर सकते हैं।”

मामला क्या था? (The Origin)

  • रेफरेंस: यह मामला 26 मार्च, 2025 को एक ‘ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास’ द्वारा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए संदर्भ (Reference) पर आधारित है।
  • घटना: मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई के दौरान वकील ने आपा खो दिया था। वकील का तर्क है कि जज लंबी तारीखें दे रहे थे और जब उन्होंने सुनवाई की विनती की, तो जज की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस दुडेजा ने कहा कि रिकॉर्ड पर “अत्यधिक परिस्थितिजन्य साक्ष्य” (Overwhelming circumstances) मौजूद हैं। कोर्ट ने साफ किया कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मर्यादा बनाए रखने से इनकार करना न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप है।

निष्कर्ष: वकील की लक्ष्मण रेखा

यह मामला वकीलों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि अदालत के प्रति सम्मान और मर्यादा बनाए रखना केवल नैतिकता नहीं, बल्कि कानूनी अनिवार्यता है। सोशल मीडिया पर जजों के खिलाफ टिप्पणी करना अब तकनीकी रूप से ट्रैक किया जा सकता है, जिससे बचना मुश्किल है।

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