Monday, August 17, 2026
HomeLatest NewsMussoorie Alert: जोशीमठ जैसी त्रासदी का खतरा, फिर भी लापरवाही क्यों? NGT...

Mussoorie Alert: जोशीमठ जैसी त्रासदी का खतरा, फिर भी लापरवाही क्यों? NGT का ताजा निर्देश यहां घूमने से जाने से पहले जरूर पढ़ें

Mussoorie Alert: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मसूरी के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील” (Ecologically Sensitive) क्षेत्र को बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है।

ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को नोटिस जारी कर पूछा है कि पिछले साल दिए गए निर्देशों पर अब तक कोई “ठोस कार्रवाई” (Substantial Action) क्यों नहीं की गई। NGT अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच ने मसूरी में अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरण के गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने पाया कि राज्य सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट केवल कागजी है और जमीन पर कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है।

मामला क्या था? (The Joshimath Warning)

  • स्वत: संज्ञान (Suo Motu): NGT ने 2023 में एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की सुनवाई शुरू की थी, जिसमें कहा गया था कि जोशीमठ की आपदा मसूरी के लिए एक चेतावनी है, जहाँ बिना योजना के निर्माण कार्य जारी हैं।
  • पिछला आदेश: मई 2023 में, NGT ने उत्तराखंड सरकार को 19 सूत्रीय कार्ययोजना (19-point Action Plan) लागू करने का निर्देश दिया था ताकि हिमालयी क्षेत्र की वहनीय क्षमता (Carrying Capacity) से बाहर पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

NGT की मुख्य आपत्तियां (Key Observations)

  • अधूरी रिपोर्ट: मार्च 2024 की सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि अतिरिक्त सचिव द्वारा दाखिल रिपोर्ट में किसी भी गंभीर मुद्दे पर ठोस प्रगति नहीं दिखाई गई है।
  • अधिकारियों की अनुपस्थिति: हैरानी की बात यह रही कि सुनवाई के दौरान उत्तराखंड सरकार का कोई भी प्रतिनिधि कोर्ट में मौजूद नहीं था।
  • डेडलाइन: ट्रिब्यूनल ने 6 महीने के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ मांगी थी, लेकिन सरकार वैज्ञानिक सिद्धांतों को लागू करने में विफल रही।

वो 19 उपाय, जिन पर काम होना बाकी है (The 19 Preventive Measures)

  • निर्माण पर रोक: नए भवनों के निर्माण को नियंत्रित करना और मौजूदा इमारतों की मजबूती की जांच करना।
  • वेस्ट मैनेजमेंट: कचरा प्रबंधन और बायो-डिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देना।
  • ड्रेनेज और सॉइल: प्रभावी जल निकासी (Drainage) और ढलानों पर मिट्टी के कटाव को रोकने के उपाय।
  • टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन: मसूरी की क्षमता (Carrying Capacity) के अनुसार ही पर्यटकों का पंजीकरण करना।
  • मास्टर प्लान: मसूरी के नए मास्टर प्लान में इन सभी वैज्ञानिक और उपचारात्मक उपायों को शामिल करना।

अगली सुनवाई और कार्रवाई

NGT ने अब राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई, 2026 को होगी। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो मसूरी को जोशीमठ जैसी स्थिति से बचाना मुश्किल होगा।

निष्कर्ष: विकास बनाम विनाश

यह मामला याद दिलाता है कि पहाड़ों में पर्यटन और विकास की दौड़ में पर्यावरण की अनदेखी करना आत्मघाती हो सकता है। NGT का हस्तक्षेप मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
heavy intensity rain
29 ° C
29 °
29 °
89 %
3.6kmh
100 %
Mon
29 °
Tue
32 °
Wed
34 °
Thu
35 °
Fri
35 °