Court Circular: बार एसोसिएशनों के कार्यक्रमों में बढ़ती फूहड़ता और सोशल मीडिया पर वकीलों के आचरण को लेकर वायरल होते वीडियो पर बेहद कड़ा संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक व्यापक विधिक सर्कुलर जारी किया है।
वकालत का पेशा एक अत्यंत प्रतिष्ठित, नोबल और पवित्र कॉलिंग है: सर्कुलर
रजिस्ट्रार जनरल एम.के. शर्मा के कार्यालय द्वारा जारी इस आधिकारिक परिपत्र (Circular) में क्षेत्राधिकार के तहत आने वाले सभी अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशनों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। सर्कुलर के मुताबिक, वकालत का पेशा एक अत्यंत प्रतिष्ठित, नोबल और पवित्र कॉलिंग (Noble and Pious Calling) है, जिस पर कानून के शासन (Rule of Law) को बनाए रखने और न्याय प्रणाली की गरिमा की रक्षा करने की भारी जिम्मेदारी है। अधिवक्ता केवल किसी मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि अदालत के अधिकारी (Officers of the Court) होते हैं। इसलिए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अदालत परिसरों के भीतर और बाहर, दोनों ही जगह व्यावसायिक आचरण, शालीनता और नैतिकता के उच्चतम मानकों का प्रदर्शन करें।
सर्कुलर की पृष्ठभूमि: कानपुर बार एसोसिएशन का विवादित वायरल वीडियो
यह सख्त प्रशासनिक और विधिक कदम हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो के बाद उठाया गया है।
घटना: मार्च 2026 की शुरुआत में कानपुर बार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें बेहद कम कपड़ों (Revealing Attire) में डांसर्स द्वारा फूहड़ प्रदर्शन किया गया था।
वकीलों का आचरण: कार्यक्रम में मौजूद बार के कुछ सदस्य न केवल इस अश्लील प्रदर्शन को बढ़ावा दे रहे थे, बल्कि अपने मोबाइल फोन पर इसका वीडियो भी रिकॉर्ड कर रहे थे।
देशव्यापी तीखी प्रतिक्रिया: 1 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट विमेन लॉयर्स एसोसिएशन (SCWLA) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे ‘शर्मनाक, निंदनीय और पूरी तरह से अपमानजनक’ करार दिया। खबरों के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने भी इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया था। इसी पृष्ठभूमि में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने अपने क्षेत्राधिकार में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यह अग्रिम सर्कुलर जारी किया।
सर्कुलर के मुख्य विधिक निर्देश और कानूनी धाराएं
रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी बार एसोसिएशन के बैनर तले होने वाले कार्यक्रम कानूनी पेशे और संस्थान की प्रतिष्ठा के अनुकूल होने चाहिए। निर्देशों का उल्लंघन करने पर कानून के अनुसार उचित दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है:
BCI नियमों का अनिवार्य पालन: सभी अधिवक्ताओं को अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) की धारा 49(1)(c) के तहत बनाए गए बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स के भाग VI, अध्याय II (Part VI, Chapter II) में निहित ‘व्यावसायिक आचरण और शिष्टाचार के मानकों’ (Standards of Professional Conduct and Etiquette) का अक्षरशः पालन करना होगा।
गरिमा और शालीनता बनाए रखना: वकीलों को अपने सभी पेशेवर और सामाजिक कार्यक्रमों में, विशेष रूप से बार एसोसिएशनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में गरिमा, संयम (Sobriety) और औचित्य बनाए रखने की सलाह दी गई है।
फूहड़ता और अनैतिक गतिविधियों पर रोक: अधिवक्ताओं को किसी भी ऐसी गतिविधि, कार्यक्रम या मनोरंजन के रूप में भाग लेने, बढ़ावा देने या जुड़ने से स्पष्ट रूप से मना किया गया है जो अनैतिक, अश्लील या सांस्कृतिक रूप से अनुचित हो, और जो कानूनी पेशे की छवि को धूमिल करती हो।
वितरण और अनुपालन
यह सर्कुलर केवल एक चेतावनी पत्र नहीं है, बल्कि इसे आधिकारिक विधिक रिकॉर्ड पर ले लिया गया है। इसे अनुपालन और जानकारी के लिए जम्मू और श्रीनगर स्थित जेएंडके हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को सीधे संबोधित किया गया है। इसके साथ ही, इसे आम जनता और वकीलों की जानकारी के लिए उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने और कोर्ट के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करने का आदेश दिया गया है।
विधिक फैक्ट शीट: जेएंडके और लद्दाख हाई कोर्ट प्रशासनिक सर्कुलर (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय के विधिक निर्देश और विनियामक स्थिति |
| सर्कुलर जारी करने वाला प्राधिकरण | रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय |
| सर्कुलर की आधिकारिक तिथि | 27 अप्रैल 2026 |
| सक्षम प्रशासनिक अधिकारी | एम.के. शर्मा (रजिस्ट्रार जनरल) |
| मूल वैधानिक अधिनियम | धारा 49(1)(c), अधिवक्ता अधिनियम (Advocates Act), 1961 |
| संबद्ध नियम पुस्तिका | बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) रूल्स, भाग VI, अध्याय II |
| अंतिम कानूनी चेतावनी | गैर-अनुपालन या मर्यादा तोड़ने पर कानून के अनुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी |
अदालत ने बहुत सही समय पर यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘अदालत का अधिकारी’ होना 24 घंटे की जिम्मेदारी है—आप कोर्ट रूम से बाहर निकलकर किसी सार्वजनिक या बार के मंच पर ऐसी हरकतें नहीं कर सकते जो कानून के शासन की मर्यादा को ही मज़ाक बना दें। यह सर्कुलर बार और बेंच की शुचिता को बनाए रखने की दिशा में एक स्वागत योग्य और अनुकरणीय विधिक कदम है।

