Tuesday, August 4, 2026
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Court News: दिसंबर 2019 में सीएए-एनआरसी के खिलाफ हिंसा मामले में बड़ा अपडेट, साकेत कोर्ट ने कहा…भाषण में चालाकी बरती गई, ताकि बच सकें

Court News: साकेत कोर्ट ने दिसंबर 2019 में सीएए एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन मामले में शरजील इमाम, आसिफ इकबाल तन्हा और नौ अन्य के खिलाफ आरोप तय किए हैं।

अपराध शाखा में मामले की जांच की थी…

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) विशाल सिंह ने कहा, आरोपी शरजील इमाम न केवल भड़काने वाला था, बल्कि वह हिंसा भड़काने की एक बड़ी साजिश का सरगना भी था। इसको लेकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसकी जांच बाद में अपराध शाखा को सौंप दी थी। अदालत ने शरजील इमाम, आशु खान, चंदन कुमार और आसिफ इकबाल तन्हा के खिलाफ उकसाने, आपराधिक साजिश, समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि के आरोप तय किए। अदालत ने शरजील इमाम के खिलाफ आरोपों को गंभीरता से लिया।

आरोपी ने भाषण को चालाकी से पेश किया: कोर्ट

एएसजे विशाल सिंह ने 7 मार्च को पारित आदेश में कहा, एक वरिष्ठ पीएचडी छात्र होने के नाते, आरोपी शरजील इमाम ने वास्तव में अपने भाषण को चालाकी से पेश किया। जिसमें उसने मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य समुदायों का उल्लेख करने से परहेज किया, जबकि चक्का जाम के इच्छित पीड़ित मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य समुदायों के सदस्य थे। अन्यथा, आरोपी शरजील इमाम ने समाज के सामान्य कामकाज को बाधित करने के लिए केवल मुस्लिम धर्म के सदस्यों को क्यों उकसाया?

इन आरोपियों पर हिंसा मामले में आरोप तय…

अदालत ने कहा कि शरजील इमाम पर धारा 109 आईपीसी के साथ धारा 120 बी आईपीसी के साथ धारा 153 ए के तहत आरोप लगाया जा सकता है। इसके अलावा आरोपी पर अन्य धाराओं में भी आरोप तय किए। वहीं, आरोपी आशु खान, चंदन कुमार और आसिफ इकबाल तन्हा पर भी आरोप तय हुए।

ये तीनों आरोपी हिंसा के स्थान पर मौजूद थे और एफआईआर में नामित थे

अदालत ने नौ अन्य आरोपियों अनल हुसैन, अनवर काला, यूनुस और जुम्मन के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं। वहीं, राणा, मोहम्मद हारुन और मोहम्मद फुरकान पर भी आरोप तय किए जा सकते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी असद अंसारी और मोहम्मद हनीफ उर्फ ​​अली हनीफ, जिन्हें अदालत में पेश होने पर घोषित व्यक्ति घोषित किया गया है, के खिलाफ आरोप अलग से तय किए जाएंगे। साथ ही, अदालत ने कहा कि धारा 124ए (देशद्रोह) आईपीसी के तहत अपराध के लिए आरोप 2021 की रिट याचिका में सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेशों के अधीन होंगे। 11 मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर उक्त प्रावधान का संचालन स्थगित रहता है।

इन आरोपियों को अदालत ने किया बरी

अदालत ने आरोपियों मोहम्मद आदिल, रूहुल अमीन, मोहम्मद जमाल, मोहम्मद उमर, मोहम्मद शाहिल, मुदस्सिर फहीम हासमी, मोहम्मद इमरान अहमद, साकिब खान, तंजील अहमद चौधरी, मोहम्मद इमरान मुनीब मियां, सैफ सिद्दीकी, शाहनवाज और मोहम्मद यूसुफ को उनके खिलाफ लगे सभी आरोपों से बरी कर दिया है।

यह रही पुलिस की चार्जशीट

चार्जशीट के अनुसार, भीड़, अवैध सभा द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए सरकारी वाहनों और निजी वाहनों सहित लगभग 41 वाहनों को पुलिस ने जांच के दौरान जब्त कर लिया। चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों ने 10 पुलिस अधिकारी को घायल किया, इनमें से इंस्पेक्टर हनुमंत सिंह, एसएचओ पीएस सनलाइट कॉलोनी को गंभीर चोटें आईं, जबकि अन्य अधिकारियों को साधारण चोटें आईं। इस दौरान गैरकानूनी सभा के सदस्यों ने पुलिस अधिकारियों पर सिर पर जानलेवा पत्थर फेंके गए।

आरोपियों ने 5 व 6 दिसंबर 2019 को बैठकें की…

आरोप है कि मुस्लिम समुदाय को भड़काने और सीएए और एनआरसी के कार्यान्वयन के खिलाफ व्यापक हिंसा भड़काने के लिए, शरजील इमाम ने 5 और 6 दिसंबर, 2019 को मुनिरका, निजामुद्दीन, शाहीन बाग और जामिया नगर के इलाकों में सार्वजनिक बैठकें कीं। इन्होंने भड़काऊ पर्चे बांटे, भड़काऊ भाषण का एक वीडियो तैयार किया और मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रभावित करने के लिए इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया। उन्होंने 11 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का दौरा किया और सीएए और एनआरसी को लागू करने के लिए सरकार के खिलाफ छात्रों को भड़काया। उन्होंने 13 दिसंबर 2019 को लगभग 02:00 बजे जामिया नगर के इलाके का दौरा किया, जहां उन्होंने जामिया के छात्रों और स्थानीय निवासियों के साथ बैठक की और उन्हें सीएए और एनआरसी के विरोध में सार्वजनिक सड़कों पर यातायात जाम करने के लिए उकसाया। बैठकों और उकसावे के चलते जामिया विश्वविद्यालय के बाहर भीड़ एकत्र हो गई, दंगा-फसाद किया और यातायात जाम कर दिया।

आरोप तय होने के दौरान सरकारी वकील का तर्क…

विशेष सरकारी वकील (एसपीपी) ने तर्क दिया कि अभियुक्त शरजील इमाम का भाषण किसी सरकारी नीति के खिलाफ शांतिपूर्ण सार्वजनिक आंदोलन की तरह लग रहा था। यह वास्तव में केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने के नाम पर मुस्लिम समुदाय की अन्य समुदायों के प्रति घृणा की भावना को भड़काने वाला था, जो मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय था। उसका भाषण क्रोध और घृणा को भड़काने के लिए था, जिसका स्वाभाविक परिणाम सार्वजनिक सड़कों पर गैरकानूनी सभा के सदस्यों द्वारा व्यापक हिंसा का आयोजन था। उसका भाषण जहरीला था और एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा करता था। सरकारी वकील के अनुसार, आरोपियों ने घृणा वाले भाषण दिए थे। इन्होंेने सांप्रदायिक भाषण के माध्यम से हिंसक भीड़ गतिविधि को भड़काकर उकसाया।

चक्का जाम होना लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन: अदालत

अदालत ने कहा, चक्का जाम होने से लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है। भले ही भीड़ चक्का जाम करते समय हिंसा और आगजनी न करे, फिर भी यह समाज के एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई होगी। चक्का जाम से कुछ भी शांतिपूर्ण नहीं हो सकता है। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में किसी भी समय, तत्काल उपचार की जरूरत वाले गंभीर रूप से बीमार मरीजों की भीड़ अस्पताल पहुंचने की होड़ में लगी रहती है। चक्का जाम के कारण ऐसे मरीजों की हालत बिगड़ सकती है या समय रहते चिकित्सा सुविधा न मिलने पर उनकी मौत भी हो सकती है, जो कि गैर इरादतन हत्या से कम नहीं है।

शरजील इमाम के वकील ने आरोपों को खारिज किया…

शरजील इमाम के वकील ने दलील दी कि वह न तो 15 दिसंबर 2019 को दंगा करने वाली गैरकानूनी सभा का हिस्सा था और न ही उसके भाषण ने लोगों को हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाया। यह भी तर्क दिया गया कि आरोपी शरजील इमाम ने अपने भाषण में धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी, घृणा, दुर्भावना या वैमनस्य को बढ़ावा नहीं दिया, जिसके कारण उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए नहीं लगाई जा सकती।

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