Tuesday, October 27, 2026
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Dealer Holding Public Office: एक साथ दो पदों पर नहीं रह सकते… सरपंच चुने जाने पर राशन डीलर का लाइसेंस रद्द, फैसले को सही ठहराया

केस मैट्रिक्स: AP High Court Ruling on Fair Price Shop Dealer Holding Public Office

पहलूविवरण
संबंधित अदालतआंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (Andhra Pradesh High Court)
माननीय पीठजस्टिस रवि चीमलापाटी (Single Bench)
संबंधित नियमावलीAP Targeted PDS (Control) Order 2018 & G.O.Ms.No. 32
मुख्य कानूनी प्रश्नक्या एक राशन डीलर सरपंच चुने जाने के बाद भी अपनी डीलरशिप जारी रख सकता है?
अदालत का उत्तरनहीं। उसे दोनों में से किसी एक पद से इस्तीफा देना अनिवार्य है।
अंतिम निर्णयराशन डीलरशिप रद्द करने का सरकारी आदेश सही ठहराया गया; याचिका खारिज।

Dealer Holding Public Office: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और जनप्रतिनिधित्व के नियमों पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है।

हाईकोर्ट के जस्टिस रवि चीमलापाटी की एकल पीठ ने राशन डीलर द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए लाइसेंस रद्द करने के राजस्व अधिकारियों और अपीलीय प्राधिकरण के आदेश पर अपनी मुहर लगा दी। अदालत ने माना है कि ‘आंध्र प्रदेश स्टेट टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) ऑर्डर, 2018’ के तहत कोई भी व्यक्ति एक ही समय में फेयर प्राइस शॉप (राशन दुकान) डीलर और सरपंच जैसे सार्वजनिक/राजनीतिक पद पर एक साथ नहीं रह सकता।

मामला क्या था?: स्टॉक में गड़बड़ी और सरपंच का चुनाव

घटना: याचिकाकर्ता के पास स्थायी राशन दुकान का लाइसेंस (Authorization) था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को राशन सामग्री (स्टॉक) के स्टॉक में भिन्नता और गड़बड़ी मिली।

दूसरा मुख्य आरोप: निरीक्षण दल ने पाया कि राशन डीलर ‘सरपंच’ के रूप में निर्वाचित होकर कार्य कर रहा है, जो कि G.O.Ms. No. 32 (दिनांक 03.12.2018) के क्लॉज XII और राशन लाइसेंस की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।

कार्रवाई: अधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद डीलर का लाइसेंस रद्द कर दिया। अपीलीय प्राधिकरण द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।

दोनों पक्षों की मुख्य दलीलें

याचिकाकर्ता की दलील

प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: अधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस का उसका जवाब पढ़े बिना ही एकतरफा फैसला सुनाया।

राजनीतिक द्वेष: याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई और निरीक्षण के दौरान दुकान का ताला जबरन तोड़ा गया।

अधिकारियों की सहमति: याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि चुनाव अधिकारियों को पता था कि वह राशन डीलर है, फिर भी उसका नामांकन स्वीकार किया गया। जब चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई गई, तो बाद में लाइसेंस रद्द करना गलत है।

राज्य सरकार का पक्ष

नियमावली का उल्लंघन: राज्य सरकार ने ‘कंट्रोल ऑर्डर 2018’ के फॉर्म-II के क्लॉज 17(e) और G.O.Ms.No. 32 का हवाला देते हुए कहा कि राशन डीलरों के लिए किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक पद को धारण करना स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है। इस आधार पर लाइसेंस रद्द करने का आदेश पूरी तरह वैधानिक है।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि चुनाव लड़ने की अनुमति मिलने से उसे डीलर बने रहने का अधिकार मिल जाता है।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “याचिकाकर्ता का यह तर्क कि अधिकारियों को उसके डीलर होने की जानकारी थी और उन्होंने उसे नामांकन दाखिल करने दिया, उसकी इस कार्रवाई को जायज ठहराने का आधार नहीं बन सकता। एक बार जब वह सरपंच के रूप में चुन लिया गया, तो उसे या तो डीलरशिप से इस्तीफा देना होगा या फिर सरपंच के पद से। कोई भी व्यक्ति एक साथ दोनों पदों पर नहीं रह सकता।”

दोहरे पद पर रोक: अदालत ने स्पष्ट किया कि PDS कंट्रोल ऑर्डर 2018 और सरकारी आदेश राशन डीलर को जनप्रतिनिधि या सार्वजनिक पद संभालने से रोकते हैं, ताकि जन वितरण प्रणाली के संचालन में किसी प्रकार का लाभ का पद (Office of Profit) या हितों का टकराव (Conflict of Interest) पैदा न हो।

अंतिम निर्णय

रिट याचिका खारिज: हाई कोर्ट को अपीलीय प्राधिकरण और जिला प्रशासन द्वारा डीलरशिप रद्द करने के आदेश में कोई अवैधता नहीं मिली।

स्पष्ट संदेश: यदि कोई राशन डीलर पंचायत या स्थानीय निकाय चुनाव जीतकर जन प्रतिनिधि बनता है, तो उसे तुरंत प्रभाव से राशन दुकान की डीलरशिप त्यागनी होगी।

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