केस मैट्रिक्स: Rajasthan High Court Ruling on Police Reels & Misconduct
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस अशोक कुमार जैन (Single Bench) |
| मुख्य मुद्दा | पुलिस अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया पर रील बनाना और स्टंट |
| कोर्ट की टिप्पणी | ‘फैन फॉलोइंग’ के लिए रील बनाना पुलिस सेवा नियमों के तहत गंभीर दुराचार है। |
| निर्देश | DGP राजस्थान को 2 महीने के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश। |
| मूल मामला | कार चालक की जमानत याचिका मंजूर। |
Police Reels & Misconduct: सोशल मीडिया पर ‘फैन फॉलोइंग’ और पब्लिसिटी के लिए रील बनाने वाले पुलिस अधिकारियों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस पूरे मामले की विभागीय जांच करने और 2 महीने के भीतर रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने अपने बेटे के साथ मिलकर रील बनाने और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने वाले एक पुलिस इंस्पेक्टर (C.I.) के आचरण को ‘बेहद गंभीर दुराचार’ (Very Serious Misconduct) करार दिया है।
मामला क्या था?: स्टंट रील, दुर्घटना और एफआईआर
यह मामला एक आरोपी की जमानत याचिका (Bail Application) की सुनवाई के दौरान सामने आया।
- आरोप: याचिकाकर्ता (कार चालक) के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और गैर-इरादतन हत्या के प्रयास के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि उसने सड़क पर स्टंट करते हुए ट्रैफिक इंस्पेक्टर के बेटे को कार से टक्कर मारकर घायल कर दिया।
- आरोपी की दलील: याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता (ट्रैफिक सी.आई.) अपने बेटे के साथ रील बनाने का आदी है। घटना के दिन सी.आई. ने उसकी कार को अचानक रुकवाया और ड्रामेटिक ‘स्टंट रील’ बनाने के चक्कर में इंस्पेक्टर का बेटा अचानक चलती कार के सामने कूद गया, जिससे यह हादसा हुआ।
- झूंठा फंसाने का दावा: आरोपी ने कहा कि उसने कोई जानबूझकर टक्कर नहीं मारी, बल्कि रील शूट करने के इस गैर-जिम्मेदाराना ड्रामे के कारण दुर्घटना हुई और उसे झूठे केस में फंसा दिया गया।
राजस्थान हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं
कोई आपराधिक मनःस्थिति (Mens Rea) नहीं थी
अदालत ने तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि आरोपी और घायल एक-दूसरे से अनजान थे। दुर्घटना केवल गाड़ी के अचानक संपर्क में आने से हुई थी, और आरोपी का पीड़ित को नुकसान पहुंचाने का कोई पूर्व इरादा (Mens Rea) नहीं था।
चूंकि मामले में जांच पूरी हो चुकी थी और आरोपी की अब हिरासत में आवश्यकता नहीं थी, कोर्ट ने उसे जमानत मंजूर कर दी।
वर्दी और पद का इस्तेमाल रील बनाने के लिए करना गलत
मामले का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारी के इस रवैये पर सख्त टिप्पणी की, एक पुलिस इंस्पेक्टर का अपने बेटे की मदद से इंस्टाग्राम, फेसबुक या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील बनाना और अपलोड करना ताकि फैन फॉलोइंग बनाई जा सके अपने आप में अत्यंत गंभीर दुराचार (Very Serious Misconduct) है। राजस्थान के डीजीपी को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले की जांच करें और इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर इस अदालत को रिपोर्ट भेजें।

