कर्नाटक हाईकोर्ट की मुख्य कानूनी टिप्पणियां
- निचली न्यायपालिका की असहाय स्थिति पर चिंता: अदालत ने जिला न्यायपालिका के जजों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बेहद संवेदनशील टिप्पणी की:“जिला न्यायपालिका के पीठासीन अधिकारी, न्यायिक शक्तियां रखते हुए भी एक असुरक्षित स्थिति (Vulnerable Position) में होते हैं। वे अदालत के बाहर अपना बचाव खुद नहीं कर सकते; इसलिए वे कोर्ट के बाहर बेजुबान (Voiceless) होते हैं।”
- वकील अदालत के अधिकारी हैं (Officers of Court): अदालत ने याद दिलाया कि वकील अपने मुवक्किल के जूतों में कदम नहीं रख सकते और न ही किसी कानूनी विवाद को अपना व्यक्तिगत मामला बना सकते हैं। जजों और वकीलों को मिलकर “न्याय के मंदिर में स्मारक” का निर्माण करना चाहिए।
- सकारात्मक सुधार और सजा: वकील द्वारा बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने के बाद कोर्ट ने नरम रुख अपनाया और आपराधिक अवमानना वापस ली। हालांकि, उन्हें बेलारी जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) में ₹1,000 जमा कराने और 1,000 फलदार पौधे लगाकर उनके लिए पानी व खाद का नियमित प्रबंध करने का कड़ा रचनात्मक आदेश दिया।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक हत्या के मुकदमे की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायाधीश (Sessions Judge) को खुले तौर पर धमकाने, अपशब्द कहने और अदालती कार्यवाही में बाधा डालने वाले वकील की बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए उसे अनोखी सजा सुनाई है।
न्यायमूर्ति हंचाते संजीवकुमार की एकल पीठ ने 1 सितंबर 2026 के आदेश में अधिवक्ता एस. रंगास्वामी के खिलाफ पूर्व में दिए गए अवमानना (Contempt of Court), आपराधिक अभियोजन और बार काउंसिल की अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देशों को वापस ले लिया (Recall)। अदालत ने वकील के आचरण में पेशेवर सुधार की उम्मीद जताते हुए उसे 1,000 फलदार पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने और ₹1,000 का प्रतीकात्मक जुर्माना भरने का निर्देश दिया है [रवि बसवराज बनाम कर्नाटक राज्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व संस्थागत टिप्पणियां
1. जिला न्यायपालिका की संवेदनशीलता और सुरक्षा निचली अदालतों के जजों के प्रति वकीलों के आचरण पर गंभीर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा: “जिला न्यायपालिका के पीठासीन अधिकारी, हालांकि न्यायिक शक्तियों से संपन्न होते हैं, फिर भी एक अत्यंत संवेदनशील और असुरक्षित स्थिति (Vulnerable Position) में होते हैं और वे स्वयं का बचाव नहीं कर सकते। इसलिए, पीठासीन अधिकारी अदालत के बाहर पूरी तरह ‘बेआवाज’ (Voiceless) होते हैं।”
2. बेंच और बार न्याय के मंदिर के सह-निर्माता अदालत ने वकीलों के पेशेवर कर्तव्यों को रेखांकित करते हुए कहा:
- न्यायाधीश और अधिवक्ता न्याय के मंदिर में एक साथ मिलकर ‘न्याय का स्मारक’ (Monument in the Temple of Justice) बना रहे हैं।
- वकील अदालत के अधिकारी (Officers of the Court) हैं; वे अपने मुवक्किल की जगह नहीं ले सकते और न ही मुकदमे को अपना व्यक्तिगत विवाद बना सकते हैं।
- वकालत का पेशा केवल मुवक्किल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अदालत और समाज के प्रति भी गंभीर दायित्व हैं।
घटना की पृष्ठभूमि (गंगावती सेशन कोर्ट विवाद)
- त्वरित ट्रायल और स्थगन की मांग: मामला प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोप्पल, बैठक स्थल गंगावती) के समक्ष लंबित एक हत्या के मुकदमे से संबंधित था। सत्र न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार रोजाना (Day-to-day) आधार पर ट्रायल चला रहे थे, जबकि आरोपी पक्ष लगातार स्थगन (Adjournment) मांग रहा था।
- अदालत में धमकाने का आचरण: सत्र न्यायाधीश के रिकॉर्ड के अनुसार, अधिवक्ता रंगास्वामी बेल्लारी से 8-10 वकीलों को साथ लेकर आए, हाथ बांधकर कई मिनट तक कोर्ट को घूरते रहे, गवाहों के साक्ष्य दर्ज करने में बाधा डाली, उंगली दिखाकर जज को धमकाया और अपशब्द कहे।
- केस ट्रांसफर की याचिका: आरोपियों ने इसके बाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर केस ट्रांसफर करने की मांग की और आरोप लगाया कि जज उनके प्रति पूर्वाग्रही हैं और वकीलों को “गुंडा” कहते हैं।
- आरोपी मुवक्किल का पश्चाताप: ट्रायल के दौरान एक महिला आरोपी ने खुद कोर्ट में उपस्थित होकर अपने पूर्व वकील के आचरण पर खेद व्यक्त किया और बताया कि उसने वकील को डांटकर अपनी फाइल और फीस वापस मांग ली थी।
- हाईकोर्ट ने ट्रांसफर याचिका और जज पर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार पाते हुए खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश: माफी और सुधारात्मक दंड
वकील द्वारा दाखिल किए गए बिना शर्त माफी के हलफनामे (Affidavit of Apology) को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने उदारवादी दृष्टिकोण अपनाया:
- कार्यवाही वापस ली गई: अधिवक्ता एस. रंगास्वामी के खिलाफ अदालत की अवमानना, आपराधिक प्राथमिकी और अनुशासनात्मक जांच के पिछले निर्देशों को रद्द/वापस ले लिया गया।
- 1,000 फलदार पौधे लगाने का आदेश: वकील को निर्देश दिया गया कि वह सरकारी भूमि, स्कूल या कॉलेज परिसरों में 1,000 फलदार पौधे (Fruit-bearing Saplings) लगाएगा।
- देखभाल की जिम्मेदारी: वकील को इन सभी पौधों में नियमित पानी और खाद देकर उनके संरक्षण व रखरखाव (Maintenance) का भी जिम्मा सौंपा गया।
- जुर्माना: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA, Ballari) में ₹1,000 का प्रतीकात्मक जुर्माना जमा कराने का निर्देश दिया गया।
विधिक प्रतिनिधित्व
- अधिवक्ता एस. रंगास्वामी की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता पी.पी. हेगड़े और अधिवक्ता वी.एम. शीलवंत।
- कर्नाटक राज्य की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) जे.एम. गंगाधर।
- पीठ: न्यायमूर्ति हंचाते संजीवकुमार।
Temple of Justice:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति हंचते संजीवकुमार (Justice Hanchate Sanjeevkumar) |
| संबंधित वकील | अधिवक्ता एस. रंगास्वामी (S. Rangaswamy) |
| मूल मामला | प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोप्पल (गंगावती) के समक्ष हत्या का मुकदमा |
| अदालत की सजा/सख्त शर्त | ₹1,000 जुर्माना + सरकारी जमीन या स्कूल/कॉलेज में 1,000 फलदार पौधे लगाना और उनका रखरखाव करना। |

