केस मैट्रिक्स: Delhi Assembly Security Breach & Mental Assessment
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | दिल्ली सत्र अदालत (Delhi Sessions Court) |
| माननीय न्यायाधीश | अंकुर जैन (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) |
| आरोपी | सरबजीत सिंह (उम्र 37 वर्ष) |
| घटना की तारीख | 6 अप्रैल 2026 |
| जांच संस्थान | मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (IHBAS) |
| कानूनी प्रावधान | मेंटल हेल्थकेयर एक्ट (Mental Healthcare Act) |
| अगली सुनवाई | 11 अगस्त 2026 |
Delhi Assembly Security Breach: दिल्ली विधानसभा परिसर में जबरन एसयूवी (SUV) घुसाने और सुरक्षा गार्ड को घायल करने के मामले के आरोपी सरबजीत सिंह (37) की मानसिक स्थिति की जांच के लिए दिल्ली की एक अदालत ने बड़ा आदेश दिया है।
दिल्ली की एक अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) अंकुर जैन ने मेंटल हेल्थकेयर एक्ट (Mental Healthcare Act) के तहत आरोपी की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (IHBAS) के निदेशक को एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या आरोपी अस्वस्थ दिमाग (Unsound Mind) का है और अपना बचाव प्रस्तुत करने में असमर्थ है।
मामला क्या था?: 6 अप्रैल 2026 की सुरक्षा चूक
- घटना का विवरण: 6 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 2:00 बजे पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) नंबर की एक महिंद्रा एसयूवी दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से आई, और उसने दिल्ली विधानसभा के गेट नंबर 2 के बूम बैरियर (Boom Barriers) को तोड़ते हुए परिसर में जबरन प्रवेश किया। इस दौरान वहां तैनात एक सुरक्षा गार्ड घायल हो गया था।
- किसान आंदोलन से जुड़ाव: जांच में सामने आया कि आरोपी सरबजीत सिंह 2020-21 के किसान आंदोलन का समर्थक/अनुयायी है और उसने सोशल मीडिया पर दिवंगत किसान नेताओं के समर्थन में कई पोस्ट साझा किए थे।
- न्यायिक हिरासत: घटना के बाद पुलिस पूछताछ के बाद उसे न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया गया था।
बचाव पक्ष की दलीलें और अदालत का फैसला
- बाईपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) का दावा: आरोपी के वकील ने कोर्ट में प्रस्तुत किया कि सरबजीत सिंह गंभीर बाईपोलर डिसऑर्डर (एक प्रकार की मानसिक बीमारी) से पीड़ित है और अपनी इस मानसिक स्थिति के कारण वह मुकदमा लड़ने या अपना बचाव करने में असमर्थ है।
- दस्तावेजों का सत्यापन: अदालत ने नोट किया कि बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए मेडिकल दस्तावेजों का जांच अधिकारी (IO) द्वारा सत्यापन कराया जा चुका है, और अभियोजन पक्ष (Prosecution) को भी मेडिकल बोर्ड के गठन पर कोई आपत्ति नहीं है।
- IHBAS को निर्देश: कोर्ट ने इहबास (IHBAS) के निदेशक को विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड बनाने और आरोपी का परीक्षण करने का निर्देश दिया है। जरूरत पड़ने पर आरोपी को अस्पताल में पेश किया जाएगा।
मामले में अगली सुनवाई
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 तय की है, जिसमें मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।

