पृष्ठभूमि और कोर्ट की टिप्पणियां
- मामला क्या था? याचिकाकर्ता राहुल ईश्वर ने आरोप लगाया कि दलित कार्यकर्ता सनी एम. कपिकड़ (Sunny M Kapikad) ने सबरीमाला मंदिर के मुख्य आराध्य भगवान अयप्पा और मणिकपुरम अम्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक भाषण में बेहद अनुचित और अपमानजनक टिप्पणियां की हैं।
- अदालत द्वारा वीडियो की समीक्षा: न्यायमूर्ति जी. गिरीश ने अदालत में संबंधित आपत्तिजनक वीडियो देखा और पाया कि याचिकाकर्ता के आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं।
- हाईकोर्ट का मुख्य निष्कर्ष:“याचिकाकर्ता का यह आरोप कि उत्तरदाता द्वारा सबरीमाला के देवी-देवताओं के बारे में दिया गया भाषण अपमानजनक और अश्लील है, सही पाया जाता है। इस वीडियो का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार बने रहना निश्चित रूप से श्रद्धालुओं की धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुँचाएगा। अतः मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया जाता है कि वह संबंधित यूआरएल पर सार्वजनिक पहुँच को तुरंत ब्लॉक करे।” — न्यायमूर्ति जी. गिरीश
- केवल विशिष्ट URL तक सीमित आदेश: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह ब्लॉक का आदेश केवल उस विशिष्ट URL तक ही सीमित है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने कहा कि वे यह भी जांच करेंगे कि क्या यह वीडियो किसी अन्य प्लेटफॉर्म या लिंक पर उपलब्ध है या नहीं।
कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के प्रमुख देवी-देवताओं—भगवान अयप्पा और मणिकंठन/मालिकाप्पुरम अम्मा—पर कथित तौर पर अपमानजनक और अशोभनीय टिप्पणियों वाले एक सोशल मीडिया वीडियो पर कड़ा संज्ञान लिया।
न्यायमूर्ति जी. गिरीश की एकल पीठ ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ता और सामाजिक टिप्पणीकार राहुल के. ईश्वर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) को उस विशिष्ट यूआरएल (URL) तक सार्वजनिक पहुंच को तत्काल अस्थायी रूप से ब्लॉक/प्रतिबंधित करने का अंतरिम आदेश दिया है [राहुल के. ईश्वर बनाम केरल राज्य एवं अन्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां और अंतरिम निर्देश
1. धार्मिक मान्यताओं को चोट पहुंचाने का आधार अदालत में विवादित वीडियो की सामग्री का अवलोकन करने के बाद पीठ ने दर्ज किया: “ऐसा प्रतीत होता है कि सबरीमाला मंदिर के देवी-देवताओं के संबंध में प्रतिवादी द्वारा दिए गए निंदनीय और अशोभनीय भाषण के बारे में याचिकाकर्ता का आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट होता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो की निरंतर उपलब्धता उक्त देवता के उपासकों की धार्मिक मान्यताओं को निश्चित रूप से ठेस पहुंचाएगी। इन परिस्थितियों में, चौथे प्रतिवादी (मेटा प्लेटफॉर्म्स) को निर्देश दिया जाता है कि वह संबंधित URL पर मौजूद उक्त वीडियो तक सार्वजनिक पहुंच को अस्थायी रूप से ब्लॉक और अक्षम (Disable) करे।”
2. निर्देश केवल विशिष्ट URL तक सीमित अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अंतरिम निर्देश केवल याचिका में उल्लिखित उस विशिष्ट यूआरएल (URL) तक सीमित है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि वे यह भी जांच करेंगे कि क्या यह वीडियो किसी अन्य लिंक/यूआरएल के माध्यम से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है या नहीं।
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मामले की पृष्ठभूमि (सनी एम. कपिकाड के कथित भाषण का विवाद)
- याचिकाकर्ता की मांग: याचिकाकर्ता राहुल के. ईश्वर ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर राज्य प्राधिकारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दलित कार्यकर्ता सनी एम. कपिकाड (Sunny M Kapikad) द्वारा सबरीमाला के आराध्य देवों पर कथित रूप से दिए गए आपत्तिजनक भाषण वाले वीडियो को हटाने और ब्लॉक करने का निर्देश देने की मांग की थी।
- कार्रवाई की मांग: याचिका में वीडियो को हटाने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी आग्रह किया गया है।
- अगली सुनवाई: अदालत ने अंतरिम रोक लगाते हुए मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है।
विधिक प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता (राहुल के. ईश्वर) की ओर से: अधिवक्ता पी.टी. शीजीश और अयोन जॉर्ज।
- प्रतिवादी: केरल राज्य सरकार, सनी एम. कपिकाड एवं मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms Inc.)।
- पीठ: न्यायमूर्ति जी. गिरीश।
Derogatory Remarks: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति जी. गिरीश |
| मुख्य याचिकाकर्ता | राहुल के. ईश्वर |
| प्रतिवादी/आरोपी | दलित कार्यकर्ता सनी एम. कपिकड़ और मेटा प्लेटफॉर्म्स |
| मुख्य आदेश | विवादित वीडियो के विशिष्ट URL को सोशल मीडिया पर तत्काल ब्लॉक करने का निर्देश। |
| अगली सुनवाई | 6 अक्टूबर 2026 |

