पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 3: कोर्ट ने कहा कि धारा 3 के अनुसार भारत में सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने के लिए किसी भारतीय प्राधिकरण द्वारा अधिकृत वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है।“कोई विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस केवल इसलिए कि वह जारी करने वाले देश में वैध है, स्वचालित रूप से उसके धारक को भारत में वाहन चलाने का अधिकार नहीं देता।”
- इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (IDP) की अनिवार्यता: अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता भारत में उपयोग के लिए वैध अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट (IDP) या किसी सक्षम भारतीय प्राधिकरण द्वारा समर्थित (Endorsed) दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा।
- आपराधिक बनाम ट्रिब्यूनल मामला (Preponderance of Probabilities): हाईकोर्ट ने माना कि आपराधिक अदालत में गवाह का पहचान न करना संदेह का लाभ दे सकता है, लेकिन MACT ट्रिब्यूनल में मामलों का फैसला ‘संभावनाओं की प्रबलता’ (Preponderance of Probabilities) के आधार पर होता है। इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा चालक को जिम्मेदार ठहराना सही था।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना दावों और ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता को लेकर एक महत्वपूर्ण विधिक स्थिति स्पष्ट की है।
न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की एकल पीठ ने कुरुक्षेत्र के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को पीड़ित परिवार को चुकाई गई ₹2.49 लाख की मुआवजा राशि को बिना वैध भारतीय लाइसेंस वाले चालक और वाहन मालिक से वसूलने (Pay and Recover) का अधिकार दिया गया था। अदालत ने फैसला सुनाया है कि किसी विदेशी प्राधिकारी द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस केवल इसलिए भारत में वाहन चलाने का अधिकार नहीं देता क्योंकि वह जारीकर्ता देश में वैध है—जब तक कि उस पर किसी सक्षम भारतीय प्राधिकारी का अनुमोदन/पृष्ठांकन (Endorsement) या वैध इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (IDP) न हो [समीर गाबा बनाम प्रियंका एवं अन्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक व्याख्या
1. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 3 और विदेशी लाइसेंस की सीमाएं कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा: “एक विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस केवल इसलिए कि वह अपने जारीकर्ता देश में वैध है, स्वतः अपने धारक को भारत में मोटर वाहन चलाने का अधिकार प्रदान नहीं करता। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 3 किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने से तब तक रोकती है जब तक कि उसके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस न हो। विदेशी प्राधिकरण द्वारा जारी लाइसेंस को मोटर वाहन अधिनियम के अध्याय II के तहत वैध लाइसेंस के समकक्ष केवल इस आधार पर नहीं माना जा सकता कि वह धारक को विदेश में उसी श्रेणी का वाहन चलाने के लिए अधिकृत करता था।”
2. MACT बनाम आपराधिक ट्रायल (सबूत के कानूनी मानक) अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक अदालत में बरी होना MACT की देनदारी से बचने का आधार नहीं बन सकता:
- Preponderance of Probabilities: MACT कार्यवाहियों में निर्णय ‘संभावनाओं की प्रबलता’ (Preponderance of Probabilities) के आधार पर होता है, जबकि आपराधिक मुकदमों में ‘संदेह से परे’ (Beyond Reasonable Doubt) का मानक लागू होता है।
- यदि किसी गवाह ने आपराधिक ट्रायल में आरोपी की पहचान को लेकर संदेह पैदा कर दिया, तो केवल इससे ट्रिब्यूनल के समक्ष दर्ज प्रत्यक्षदर्शी गवाही और निष्कर्ष अमान्य नहीं हो जाते।
3. मालिक और चालक के बीच औपचारिक अनुबंध की आवश्यकता नहीं पीठ ने वाहन मालिक के परीक्षण न होने के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि दुर्घटना कारित करने वाले चालक का दायित्व साबित करने के लिए मालिक के साथ किसी औपचारिक रोजगार अनुबंध (Contract of Employment) का प्रमाण आवश्यक नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि (2015 कुरुक्षेत्र सड़क दुर्घटना विवाद)
- दुर्घटना और दावा: वर्ष 2015 में हुए एक सड़क हादसे में 9 महीने की एक मासूम बच्ची की जान चली गई थी। बच्ची के परिजनों ने कुरुक्षेत्र MACT में दावा याचिका दायर की थी।
- ट्रिब्यूनल का फैसला: ट्रिब्यूनल ने पीड़ित परिवार को ₹2.49 लाख का मुआवजा मंजूर किया। चूंकि चालक के पास भारत में वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को पहले भुगतान करने और फिर यह राशि चालक (समीर गाबा) और वाहन मालिक से वसूलने का अधिकार (Recovery Rights) दिया।
- चालक की दलीलें:
- उसने दावा किया कि वह दुर्घटना के समय गाड़ी नहीं चला रहा था और आपराधिक मामले में उसे बरी किया जा चुका है।
- वैकल्पिक रूप से उसने दलील दी कि उसके पास विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया (Victoria, Australia) के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद था।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
- अपील खारिज: उच्च न्यायालय ने चालक की सभी दलीलों को खारिज करते हुए अपील निरस्त कर दी।
- बीमा कंपनी का वसूली अधिकार बहाल: MACT के आदेश को यथावत रखा गया, जिससे बीमा कंपनी मुआवजा राशि चालक और मालिक से वसूलने के लिए अधिकृत रहेगी।
विधिक प्रतिनिधित्व
- अपीलकर्ता (चालक समीर गाबा) की ओर से: अधिवक्ता प्रतीक महाजन और अधिवक्ता आर्ची महंत।
- प्रतिवादियों (दावेदारों) की ओर से: अधिवक्ता विनोद चौधरी।
- पीठ: न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता (फैसले की तारीख: 7 सितंबर 2026)।
Foreign Driving License Validation: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (P&H High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता (Justice Deepak Gupta) |
| याचिकाकर्ता | समीर गाबा (दुर्घटना का आरोपी चालक) |
| मूल मामला | 2015 में 9 महीने की बच्ची की मौत से जुड़ा मोटर दुर्घटना दावा |
| मुख्य कानूनी मुद्दा | क्या विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस भारत में मोटर वाहन अधिनियम के तहत मान्य है? |
| कोर्ट का फैसला | नहीं, बिना भारतीय प्राधिकरण या IDP (अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट) के यह अमान्य है। |

