मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रचूड़ |
| अवमानना का आरोपी | यथार्थ हॉस्पिटल (चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से) |
| मूल विवाद | रियायती दरों पर सरकारी जमीन पाने वाले अस्पतालों द्वारा EWS मरीजों को मुफ्त इलाज न देना। |
| सख्त टिप्पणी | “आपका अस्पताल चल रहा है, आप पैसे छाप रहे हैं और कहते हैं कि कोर्ट का नोटिस नहीं मिला!” |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मरीजों को अनिवार्य मुफ्त इलाज मुहैया कराने से जुड़े मामले में यथार्थ हॉस्पिटल (Yatharth Hospital) द्वारा अदालत के नोटिस पर झूठा हलफनामा दाखिल करने को ‘स्पष्ट रूप से झूठा’ (Ex-facie False) करार देते हुए अस्पताल के खिलाफ औपचारिक आपराधिक अवमानना कार्यवाही (Contempt Proceedings) शुरू कर दी है [भारत संघ बनाम मूलचंद खैराती राम ट्रस्ट]।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन के आचरण और अहंकारी रवैये पर अत्यंत तीखी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (MS) को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख और सख्त टिप्पणियां
1. ‘पैसे छाप रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब नहीं देते’ अस्पताल द्वारा यह दावा किए जाने पर कि उसे सुप्रीम कोर्ट का कोई औपचारिक नोटिस नहीं मिला और उसे अनौपचारिक चर्चाओं से मामले का पता चला, खंडपीठ ने कहा: “आपका अस्पताल सुचारू रूप से चल रहा है और आप जमकर पैसे छाप रहे हैं (Minting Money), फिर भी आप कहते हैं कि आपको इस अदालत से कोई नोटिस नहीं मिला? सभी 52 अस्पतालों को विधिवत नोटिस तामील हुआ है। कोर्ट के नोटिस का जवाब देने का यह तरीका बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। क्षमा करें, लेकिन आपको (यथार्थ अस्पताल प्रबंधन) सलाखों के पीछे भेजना होगा; आपके लिए केवल जेल ही सही जगह है।”
2. ‘इस घमंड के साथ EWS मरीजों का क्या इलाज करेंगे?’ अदालत ने आगे फटकार लगाते हुए कहा: “आप भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं। इस अस्पताल का घमंड (Arrogance) देखिए! जो संस्थान कोर्ट के नोटिस की परवाह नहीं करता, वह ईडब्ल्यूएस वर्ग से आने वाले गरीब मरीजों का इलाज कैसे करेगा? हम इस तरह के बहाने स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।”
झूठे हलफनामे का पर्दाफाश (कोर्ट की रजिस्ट्री रिपोर्ट)
- अस्पताल का झूठा दावा: यथार्थ हॉस्पिटल ने हलफनामा देकर दावा किया था कि उसे कोर्ट की ओर से कोई समन/नोटिस नहीं मिला, बल्कि इंडस्ट्री के साथियों से अनौपचारिक सूचना मिली।
- रजिस्ट्री रिपोर्ट में तामील दर्ज: पीठ ने जब 22 अप्रैल की रजिस्ट्री कार्यालय रिपोर्ट (Office Report) की जांच की, तो उसमें स्पष्ट दर्ज था कि यथार्थ हॉस्पिटल को कानूनी नोटिस विधिवत और सफलतापूर्वक तामील (Served) कराया जा चुका था। अदालत ने झूठी गवाही और गुमराह करने की कोशिश पर अवमानना नोटिस जारी किया।
मामले की पृष्ठभूमि (2018 EWS मुफ्त इलाज फैसला)
- 2018 का सुप्रीम कोर्ट फैसला: शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि जिन निजी अस्पतालों को सरकार से रियायती दरों (Concessional Rates) पर जमीन आवंटित की गई है, उन्हें अपने यहां:
- 25% ओपीडी (OPD) मरीज: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए पूरी तरह मुफ्त इलाज करना होगा।
- 10% आईपीडी (IPD / भर्ती) बेड: EWS मरीजों के लिए पूर्णतः मुफ्त आरक्षित रखने होंगे।
- अस्पतालों की मनमानी और अवमानना: फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि दिल्ली सरकार, डीडीए (DDA), एलएंडडीओ और एमसीडी ने नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने यथार्थ हॉस्पिटल समेत 51 निजी अस्पतालों को अवमानना नोटिस जारी कर पूछा था कि रियायती जमीन की लीज क्यों न रद्द कर दी जाए।
- संशोधित SOP पेश: मई में अदालत के निर्देश के बाद एक संशोधित ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) दाखिल की गई, हालांकि परामर्श प्रक्रिया में केवल 12 अस्पतालों ने सक्रिय भाग लिया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
- मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ अवमानना: यथार्थ हॉस्पिटल (चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से) के खिलाफ औपचारिक अवमानना कार्यवाही शुरू कर एक सप्ताह में जवाब तलब किया गया।
- जवाब दाखिल करने की छूट: अन्य निजी अस्पतालों के वरिष्ठ वकीलों के अनुरोध पर उन्हें अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 30 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के नोटिस की अवमानना करने पर अस्पताल प्रबंधन की तीखी आलोचना की: “सभी 52 अस्पतालों को नोटिस मिला। कोर्ट के नोटिस का जवाब देने का यह तरीका नहीं है। माफ कीजिए, लेकिन आपको (यथार्थ अस्पताल) सलाखों के पीछे भेजना होगा; जेल ही आपके लिए एकमात्र जगह है। आप सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं। आप EWS श्रेणी के मरीजों का इलाज कैसे करेंगे? इस अस्पताल का घमंड देखिए। हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।”
विधिक विवरण
- केस शीर्षक: भारत संघ बनाम मूलचंद खैराती राम ट्रस्ट (कंटेम्प्ट पेटिशन्स एवं कनेक्टेड मैटर्स)
- पीठ: न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर
- अगली सुनवाई तिथि: 30 सितंबर 2026

