Wednesday, September 9, 2026
HomeDelhi High CourtGaurav Bhatia Case: भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने CJP...

Gaurav Bhatia Case: भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने CJP के नेताओं के खिलाफ हाईकोर्ट में ₹2 करोड़ का मानहानि केस दर्ज कराया

याचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी बिंदु

  • प्रतिष्ठा और साख को नुकसान: मुकदमे में कहा गया है कि प्रतिवादियों ने केवल टिप्पणी या असहमति व्यक्त नहीं की, बल्कि वादी (गौरव भाटिया) के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर ऐसे शब्द और बयान उनके नाम से फैलाए जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं थे।
  • न्यायपालिका की गरिमा घटाने का आरोप: याचिका में आरोप लगाया गया है कि CJP और उसके नेता लगातार सोशल मीडिया के जरिए न्यायपालिका और न्यायिक प्रक्रियाओं की संस्थागत निष्ठा पर प्रहार करते रहे हैं।
  • न्यायिक आदेशों पर भ्रामक टिप्पणियां: सौरव दास द्वारा दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की डिस्चार्ज याचिका और उमर खालिद की हिरासत को लेकर सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि ये गतिविधियां निष्पक्ष टिप्पणी के दायरे से बाहर जाकर संस्थागत अवमानना के दायरे में आती हैं।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और उसके पदाधिकारियों—सौरव दास, अभिजीत दीपके तथा आशुतोष रांका—के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में ₹2 करोड़ का दीवानी मानहानि का मुकदमा (Defamation Suit) दायर किया है। भाटिया ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर उनके नाम और तस्वीर के साथ एक फर्जी और एआई-जेनरेटेड (AI-generated) ट्वीट प्रसारित कर उनके हवाले से ऐसे झूठे बयान गढ़े गए, जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं थे।

मानहानि वाद (Suit) में उठाए गए मुख्य विधिक व तथ्यात्मक बिंदु

1. AI-जेनरेटेड फर्जी ट्वीट और मनगढ़ंत बयान का आरोप मुकदमे के अनुसार, 5 सितंबर को स्वतंत्र भारद्वाज (जिस पर सीजेपी के एक नाबालिग प्रदर्शनकारी से मारपीट का आरोप है) की गिरफ्तारी के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की:

  • पोस्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की तस्वीर लगाकर झूठा दावा किया गया कि उन्होंने भारद्वाज को “दिमागी नक्सली” और “जातिवादी” कहा है।
  • वाद में कहा गया कि प्रतिवादियों ने केवल किसी वास्तविक बयान पर आलोचना या असहमति नहीं जताई, बल्कि जानबूझकर जनता के बीच यह झूठा भ्रम फैलाया कि वादी ने ऐसा बयान दिया है, जबकि वास्तव में ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया था।

2. वादी की तस्वीर और फर्जी सामग्री का अवैध गठजोड़ मुकदमे में तर्क दिया गया: “आक्षेपित सामग्री वादी की तस्वीर के साथ संलग्न और प्रसारित की गई थी, जिसके नीचे एक फर्जी/झूठा बयान दर्ज किया गया था। इसका उद्देश्य वादी और प्रतिवादियों द्वारा प्रसारित झूठे शब्दों/सामग्री के बीच एक स्पष्ट और भ्रामक संबंध स्थापित करना था, जिससे वादी की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है।”

Also Read; New Rules For Law Interns: दिल्ली हाईकोर्ट में लॉ इंटर्न के प्रवेश पर नई पाबंदियां; अब केवल अंतिम वर्षों के छात्रों को ही मिलेगा एंट्री पास

न्यायपालिका की गरिमा पर हमले और अन्य गंभीर आरोप

गौरव भाटिया ने मुकदमे में आरोप लगाया है कि सीजेपी और उसके नेता लगातार ऐसे सार्वजनिक बयानों में लिप्त रहे हैं जो न्यायपालिका की गरिमा, अधिकार और संस्थागत स्थिति को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से दिए जाते हैं:

  • न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा पर टिप्पणी का हवाला: भाटिया ने विशेष रूप से सौरव दास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को डिस्चार्ज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई याचिका की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) न करने पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर हमला बोलकर लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास किया था।
  • उमर खालिद और न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी: मुकदमे में 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले के आरोपी उमर खालिद की जेल में निरंतरता को लेकर दास के ट्वीट्स का हवाला दिया गया। भाटिया के अनुसार, इन पोस्ट्स में न्यायिक प्रक्रिया को “स्थायी रूप से कलंकित” बताकर संस्थागत अपमान (Institutional Denigration) किया गया, जो निष्पक्ष टिप्पणी (Fair Comment) के कानूनी दायरे से काफी बाहर है।
  • गैर-पंजीकृत संगठन का आचरण: वाद में कहा गया कि प्रतिवादी एक गैर-पंजीकृत संगठन के बैनर तले काम करते हैं, जो खुद को किसी भी राजनीतिक दल से असंबद्ध और “बड़ी लड़ाई” लड़ने का दावा करता है, लेकिन योजनाबद्ध तरीके से न्यायपालिका पर अपमानजनक आक्षेप लगाने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग करता है।

मांगी गई राहत

वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने उच्च न्यायालय से निम्नलिखित अनुतोष मांगे हैं:

  1. प्रतिवादियों को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की मानहानिकारक, झूठी और फर्जी सामग्री प्रसारित या प्रकाशित करने से रोकने हेतु स्थायी और अंतरिम व्यादेश (Injunction)।
  2. प्रतिवादियों द्वारा सोशल मीडिया से संबंधित फर्जी एआई-जेनरेटेड पोस्ट और मानहानिकारक सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश।
  3. वादी की प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के एवज में ₹2,00,00,000 (₹2 करोड़) का हर्जाना/मुआवजा।

Gaurav Bhatia Case: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
वादी (Plaintiff)गौरव भाटिया (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता)
प्रतिवादी (Defendants)कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके
हर्जाना (Damages Sought)₹2 करोड़
मुख्य विवादएआई-जनरेटेड फेक पोस्ट के जरिए भ्रामक बयान देने का आरोप
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
30 ° C
30 °
30 °
84 %
2.1kmh
100 %
Tue
30 °
Wed
34 °
Thu
34 °
Fri
34 °
Sat
34 °

Recent Comments