केस मैट्रिक्स: P&H High Court Ruling on Frivolous Complaint Against Gram Panchayat
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Chandigarh) |
| माननीय पीठ | जस्टिस संजय वशिष्ठ (Single Bench) |
| केस साइटेशन | 2026 LL (PH) 242 |
| मुख्य मुद्दा | पावर सब-स्टेशन के लिए पंचायत जमीन हस्तांतरण पर पूर्व सरपंच व पंचों के खिलाफ आपराधिक केस |
| हाई कोर्ट का निष्कर्ष | कोई आपराधिक मामला (No Criminality) नहीं बनता; कार्य पूर्णतः जनहित में किया गया। |
| अंतिम आदेश | केस रद्द; शिकायतकर्ता पर ₹1,00,000 का जुर्माना; आदेश को पंजाब-हरियाणा की सभी पंचायतों में सर्कुलेट करने के निर्देश। |
Gram Panchayat: गांवों में विकास कार्यों और ग्राम पंचायतों के अधिकारों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक नजीर कायम करने वाला फैसला सुनाया है।
शिकायतकर्ता ग्रामीण पर 1,00,000 रुपये का भारी जुर्माना
हाईकोर्ट के जस्टिस संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों द्वारा अपनी पहल पर ऐसे जनहितकारी और विकासपरक प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की सराहना की जानी चाहिए, न कि झूठे आपराधिक मामलों के जरिए उन्हें हतोत्साहित किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने अंबाला जिले की पिलखनी ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच और पंचों (कुल 9 प्रतिनिधियों) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को निरस्त (Quash) कर दिया है। अदालत ने इसे पंचायत प्रतिनिधियों को परेशान करने और विकास कार्य में बाधा डालने का प्रयास” मानते हुए शिकायतकर्ता ग्रामीण पर 1,00,000 रुपये का भारी जुर्माना (Cost) ठोका है।
मामला क्या था?: 66 KV पावर सब-स्टेशन के लिए जमीन का हस्तांतरण
पृष्ठभूमि: वर्ष 2010-2015 के कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायत पिलखनी (अंबाला) ने गांव में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड’ (HVPNL) को 66 KV सब-स्टेशन बनाने के लिए शामलात भूमि (लगभग 4 एकड़) देने का प्रस्ताव (Resolution) पारित किया था।
बाजार मूल्य और उद्घाटन: तहसीलदार अंबाला द्वारा जमीन का बाजार मूल्य 25 लाख रुपये प्रति एकड़ आंका गया। सब-स्टेशन का निर्माण पूरा हुआ और जनवरी 2017 में इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
रकम पंचायत खाते में जमा: जमीन के बदले ₹1,01,72,500 की राशि 25 मई 2018 को सीधे ग्राम पंचायत के बैंक खाते में जमा की गई, जिसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) के रूप में रखा गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप
गांव के एक निवासी (शिकायतकर्ता) ने खुद को साझा जमीन (Mushtarka Malkan) का सह-मालिक बताते हुए आरोप लगाया कि सरपंच और पंचों ने HVPNL अधिकारियों के साथ मिलकर बिना उसकी सहमति के और बिना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाए धोखाधड़ी से जमीन ट्रांसफर कर दी। उसने मजिस्ट्रेट अदालत में धारा 419, 420 और 120-B IPC के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पंचायत सदस्यों को समन जारी कर दिया था।
हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं
“कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं, न ही कोई जालसाजी”
हाई कोर्ट ने पाया कि मामले में किसी भी पंचायत प्रतिनिधि ने व्यक्तिगत रूप से एक भी रुपये का लाभ नहीं कमाया। पूरा पैसा सीधे पंचायत के खाते में गया। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी, यह बेहद अजीब है कि पूरी चुनी हुई ग्राम पंचायत को एक अकेले ग्रामीण की शिकायत पर आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए समन भेज दिया गया, जबकि पंचायत सदस्यों को कोई व्यक्तिगत मौद्रिक लाभ मिलने का कोई आरोप तक नहीं था। शिकायतकर्ता यह भी नहीं बता सका कि उसे इस शिकायत के लिए किसने उकसाया या वह व्यक्तिगत रूप से कैसे पीड़ित था।
‘मुश्तरका मालकान’ और सिविल उपचार
शिकायतकर्ता द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले (Jai Singh case) का हवाला दिए जाने पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सह-मालिक को लगता है कि उसकी साझा जमीन का उपयोग बिना मुआवजे के हुआ है, तो उसका सही कानूनी तरीका सिविल कोर्ट जाकर अपना हिस्सा तय कराना और मुआवजा मांगना है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों पर आपराधिक मामला (Criminal Complaint) दर्ज नहीं कराया जा सकता।
आपराधिक कानून का दुरुपयोग रोकने की जरूरत
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर (Bhajan Lal Case & Inder Mohan Goswami Case) का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल किसी को परेशान करने, निजी दुश्मनी निकालने या गलत इरादों के लिए औजार की तरह नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट का अंतिम आदेश और कड़े निर्देश
समन व शिकायत निरस्त: हाई कोर्ट ने अंबाला की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन आदेश (28.03.2019) और आपराधिक शिकायत (No. 270/2018) को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया।
लाख रुपये का जुर्माना: शिकायतकर्ता को 17 अक्टूबर 2026 तक ग्राम पंचायत पिलखनी के खाते में 1,00,000 रुपये का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया। देरी होने पर प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त हर्जाना लगेगा।
दोनों राज्यों की पंचायतों में सर्कुलेट करने का आदेश: हाई कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि वे इस आदेश की प्रति दोनों राज्यों की सभी ग्राम पंचायतों में प्रसारित (Circulate) करें, ताकि पंचायतों द्वारा किए जाने वाले ऐसे विकास कार्यों को प्रोत्साहन मिले।

