Saturday, October 31, 2026
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Hindu Religion: हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और पूज्य संतों के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक सामग्री की पुस्तकें बेंचीं…जानिए मामले में क्या हुआ

केस मैट्रिक्स: Himachal Pradesh High Court Ruling on Section 295A & Prosecution Sanction

पहलूविवरण
संबंधित अदालतहिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Shimla Bench)
माननीय पीठजस्टिस राकेश कैंथला (Single Bench)
संबंधित धाराएंतत्कालीन IPC धारा 295A (धार्मिक भावनाएं भड़काना)
याचिकाकर्ता के वकीलअधिवक्ता अर्जुन शेवरान एवं हीना चौहान
राज्य के वकीलअपर महाधिवक्ता लोकेंद्र कुटलेहरिया
मुख्य कानूनी बिंदुधारा 295A में बिना सक्षम अधिकारी की मंजूरी (Sanction) के ट्रायल कोर्ट संज्ञान नहीं ले सकता; हालांकि FIR बनी रहेगी।

Hindu Religion: धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले साहित्य और पुस्तकों की बिक्री से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कैंथला की एकल पीठ ने सोलन जिले के नालागढ़ में पुस्तकें बेचने वाले आरोपियों की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने हिंदू देवी-देवताओं और संतों के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक सामग्री वाली पुस्तकों की बिक्री से संबंधित FIR को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है।

हालांकि, अदालत ने अभियोजन स्वीकृति (Legal Sanction) के अभाव में निचली अदालत (Trial Court) में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को वैध स्वीकृति प्राप्त करने के बाद नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की छूट दी है।

मामला क्या था?: पुस्तकों में कथित अपमानजनक सामग्री और एफआईआर

  • घटना और शिकायत: नालागढ़ पुलिस स्टेशन में एक स्थानीय नागरिक ने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ लोग ऐसी पुस्तकें बेच रहे हैं जिनमें हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और पूज्य संतों के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक सामग्री है।
  • विवादित पुस्तकें: जब्ती सूची में ‘हिंदू धर्म महान’, ‘गीता तेरा ज्ञान अमृत’, ‘कबीर परमेश्वर’, ‘जीने की राह’ और ‘ज्ञान गंगा’ जैसी पुस्तकें शामिल थीं। इनमें से कुछ पुस्तकें संत रामपाल द्वारा लिखित बताई गईं।
  • कानूनी धाराएं: पुलिस ने मामले में धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की, जांच पूरी की और चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद आरोपियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं

अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं

स्वतंत्रता के अधिकार पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: हिंदू देवी-देवताओं और संतों पर अपमानजनक टिप्पणियां करना, जिन्हें भारत के नागरिक श्रद्धा से पूजते हैं, प्रथम दृष्टया (Prima Facie) इस इरादे को दर्शाता है कि यह किसी वर्ग के धार्मिक विश्वासों का अपमान करने के लिए किया गया है। वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) असीमित नहीं है और यह सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) के अधीन है। इसलिए इस चरण में FIR रद्द नहीं की जा सकती।

अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) का मुद्दा

आरोपियों के वकीलों (अधिवक्ता अर्जुन शेवरान और हीना चौहान) ने दलील दी कि IPC की धारा 295A के तहत मुकदमा चलाने के लिए केंद्र या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट से औपचारिक स्वीकृति (Sanction) अनिवार्य होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई थी।

  • अदालत का निष्कर्ष: हाई कोर्ट ने माना कि बिना कानूनी स्वीकृति के निचली अदालत को संज्ञान लेने (Cognizance) का अधिकार नहीं था।
  • निचली अदालत की कार्यवाही रद्द: कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में लंबित कार्यवाही को तो रद्द कर दिया, लेकिन FIR को बरकरार रखा।

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

  1. FIR कायम रहेगी: हाई कोर्ट ने मुख्य प्राथमिकी (FIR) को रद्द करने से इनकार कर दिया और कहा कि पुस्तकों की सामग्री का अंतिम परीक्षण ट्रायल कोर्ट द्वारा किया जाएगा।
  2. स्वीकृति के बाद नई कार्यवाही की छूट: अपर महाधिवक्ता लोकेंद्र कुटलेहरिया के माध्यम से राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वे जिला मजिस्ट्रेट/सक्षम प्राधिकारी से कानूनी स्वीकृति मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ नए सिरे से ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।

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