Friday, July 3, 2026
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Intimate Material: वैवाहिक विवाद आपसी अपमान की जंग न बनें…जीवनसाथी के निजी तस्वीरों को हथियार न बनाएं, वकीलों से यह कहा, पढ़ें

Intimate Material: दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में बढ़ती कड़वाहट और अदालतों में निजता के हनन को लेकर एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

वकीलों को विपक्षी पक्ष की गरिमा व सम्मान का ध्यान रखना होगा

हाईकोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए वकीलों (Lawyers) को भी गंभीर चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि केस जीतने के अपने अति-उत्साह (Zeal to win) में वकीलों को ऐसी रणनीति या हथकंडे नहीं अपनाने चाहिए जिससे उनके मुवक्किल के कानूनी विरोधी (विपक्षी पक्ष) की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचे। कहा, “वैवाहिक मुकदमों (Matrimonial Litigations) को निजी तस्वीरों और अतरंग सामग्रियों (Intimate Material) को हथियार बनाकर अलग हुए जीवनसाथियों के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने या आपसी अपमान की प्रतियोगिता (Mutual Humiliation Contests) में तब्दील होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

मामला क्या है?: वॉट्सऐप चैट की निजी तस्वीरें बनीं कानूनी हथियार

यह संवेदनशील मामला साल 2022 में शादी के बंधन में बंधे एक जोड़े के बीच उपजे गंभीर विवाद से जुड़ा है।

तस्वीरें सार्वजनिक करने का आरोप: साल 2023 में पत्नी ने पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा (Domestic Violence) और प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पति ने तलाक की याचिका दायर कर दी। पत्नी ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया कि पति ने उसकी निजता के अधिकार (Right to Privacy) का घोर उल्लंघन किया है। पति ने तलाक याचिका के साथ पत्नी की वे बेहद निजी और अतरंग तस्वीरें कोर्ट रिकॉर्ड में लगा दीं, जो उसने अपने डॉक्टर के साथ एक गोपनीय वॉट्सऐप चैट (WhatsApp Chat) पर साझा की थीं।

2015 के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन: पत्नी के वकीलों ने दलील दी कि पति और उसकी कानूनी टीम ने दिल्ली हाई कोर्ट के साल 2015 के उस अनिवार्य फैसले का सीधा उल्लंघन किया है, जिसके तहत वैवाहिक विवादों में किसी भी प्रकार की संवेदनशील या अतरंग तस्वीरों को कोर्ट में पेश करने से पहले फैमिली कोर्ट की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है। साथ ही, ऐसी सामग्री को धुंधला (Redacted Form) करके या ‘सीलबंद लिफाफे’ (Sealed Cover) में ही जमा करना होता है।

वकीलों की माफी: पत्नी ने इस कृत्य के लिए पति और उसके वकीलों के खिलाफ अवमानना (Contempt) की कार्यवाही शुरू करने की मांग की। हालांकि, पति और उसके वकीलों ने हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि वे 2015 के इन सामान्य निर्देशों से अनभिज्ञ थे।

Intimate Material पेश करने के मामले में हाई कोर्ट का रुख: बदले की कार्रवाई भी न्यायसंगत नहीं

अदालत ने मामले की जांच के दौरान पाया कि पति द्वारा तस्वीरें लगाने के बाद, जवाबी कार्रवाई (Retaliation) के रूप में पत्नी ने भी पति की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो अदालती रिकॉर्ड पर रख दिए थे। इस पर जस्टिस सचिन दत्ता ने स्पष्ट कानूनी सिद्धांत तय किए।

अपमान का मुकाबला अपमान से नहीं: कोर्ट ने माना कि भले ही दोनों पक्षों द्वारा पेश की गई सामग्रियों की गंभीरता की तुलना नहीं की जा सकती, लेकिन व्यापक सिद्धांत यही लागू होता है कि अदालतों को आपसी कीचड़ उछालने का अखाड़ा नहीं बनाया जा सकता।

वकीलों को सख्त हिदायत: कोर्ट ने वकीलों की बिना शर्त माफी को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही तो शुरू नहीं की, लेकिन उन्हें भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी दी, मुवक्किल के मामले को आगे बढ़ाने का उत्साह कभी भी सामने वाले पक्ष की गरिमा की बलि देने को न्यायसंगत नहीं ठहरा सकता—विशेषकर तब जब विरोधी पक्ष एक महिला हो और विचाराधीन सामग्री अत्यंत अतरंग प्रकृति की हो।

Intimate Material पेश करने काे लेकर अदालत का अंतिम निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला की गरिमा और निजता की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश जारी किए हैं।

तस्वीरें प्रसारित करने पर रोक: अदालत ने पति और उसके वकीलों को याचिकाकर्ता (पत्नी) की किसी भी निजी या अतरंग तस्वीर को किसी भी अन्य प्लेटफॉर्म या व्यक्तियों के बीच प्रसारित (Circulate) करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

पहचान छिपाने (Masking Identity) की छूट: कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि वह संबंधित फैमिली कोर्ट में जाकर केस की फाइलों से अपनी पहचान छिपाने (मास्किंग) के लिए आवेदन कर सकती है।

फैमिली कोर्ट को निर्देश: हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट से अनुरोध किया है कि वे पहले से जमा की गई इन निजी तस्वीरों को मुख्य रिकॉर्ड से हटाकर तुरंत ‘सीलबंद लिफाफे’ (Sealed Cover) में रखें और केस की फाइलों तक आम जनता या बाहरी लोगों की पहुंच को पूरी तरह सीमित करें।

केस मैट्रिक्स: दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांदिल्ली उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति (2026)
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली
माननीय न्यायाधीशजस्टिस सचिन दत्ता (एकल पीठ)
प्रासंगिक कानूनी मुद्दावैवाहिक विवादों में अतरंग तस्वीरों (Intimate Material) का दुरुपयोग और निजता का हनन।
वकीलों के लिए विधिक आचार संहिताविरोधी पक्ष (विशेषकर महिला) की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले हथकंडों से बचना अनिवार्य।
अदालत का अंतिम निर्णयवकीलों की माफी स्वीकार; तस्वीरों के प्रसार पर रोक। फैमिली कोर्ट को सभी संवेदनशील दस्तावेजों को सीलबंद कवर में रखने का निर्देश।
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