Tuesday, October 27, 2026
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ITS Officer: आउटस्टैंडिंग रिकॉर्ड और 2 महीने पहले बने संयुक्त सचिव को ‘डेडवुड’ बताकर रिटायर करना सत्ता का रंगीन दुरुपयोग; सम्मान संग विदाई दें

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष

  • पदोन्नति और ‘डेडवुड’ एक साथ नहीं चल सकते: न्यायमूर्ति दीपक दत्ता द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया:“जिस अधिकारी को UPSC द्वारा उपयुक्त पाकर मात्र दो महीने पहले संयुक्त सचिव के रूप में पदोन्नत किया गया हो, उसे अचानक बिना किसी प्रतिकूल सामग्री के ‘डेडवुड’ या संदिग्ध ईमानदारी वाला अधिकारी नहीं ठहराया जा सकता। पदोन्नति इस बात का प्रमाण थी कि उसकी सेवा अत्यंत मेधावी थी। पदोन्नति और फिर तुरंत बर्खास्तगी—ये दोनों कार्रवाइयां परस्पर विरोधी हैं।”
  • FR 56(j) का दुरुपयोग और मनमानापन: कोर्ट ने माना कि सरकार ने पूरे सेवा रिकॉर्ड को देखने के बजाय केवल चयनात्मक (Selective) आधार पर प्रतिकूल टिप्पणियों का सहारा लिया। FR 56(j) का उपयोग विभागीय जांच से बचने के शॉर्टकट या बदला लेने के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता।
  • सम्मान और प्रतिष्ठा की बहाली: पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को माना जाए कि वे कभी सेवानिवृत्त हुए ही नहीं थे और उन्हें उनके जूनियरों के समकक्ष काल्पनिक पदोन्नति (Notional Promotion) व सभी बकाया वित्तीय लाभ दिए जाएं। साथ ही, सार्वजनिक रूप से उनकी प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए ₹15 लाख दिए जाएं और DGFT कार्यालय में उन्हें पूर्ण सम्मान के साथ विदाई दी जाए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति के बावजूद ‘फंडामेंटल रूल 56(j)’ [FR 56(j)] का दुरुपयोग कर भारतीय व्यापार सेवा (ITS) के एक वरिष्ठ अधिकारी को अवैध रूप से समयपूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्त (Compulsory Retirement) किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) और दिल्ली उच्च न्यायालय के उन पूर्व आदेशों को खारिज कर दिया, जिन्होंने इस अनिवार्य सेवानिवृत्ति को सही ठहराया था। अदालत ने इसे दुर्भावनापूर्ण, मनमाना और सत्ता का रंगीन दुरुपयोग (Colourable Exercise of Power) करार देते हुए केंद्र सरकार को अधिकारी के मान-सम्मान की क्षति के लिए ₹9 लाख मुआवजा और ₹6 लाख मुकदमा खर्च (कुल ₹15 लाख) अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने ‘विदेश व्यापार महानिदेशालय’ (DGFT) को निर्देश दिया है कि अधिकारी को कार्यालय बुलाकर पूरे मान-सम्मान के साथ औपचारिक विदाई (Formal Farewell) दी जाए [आई.टी.एस. अधिकारी बनाम भारत संघ एवं अन्य]।

सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख विधिक व संस्थागत टिप्पणियां

1. ‘आउटस्टैंडिंग’ ग्रेडिंग और पदोन्नति के तुरंत बाद ‘डेडवुड’ करार देना विरोधाभासी न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता द्वारा लिखे गए निर्णय में पीठ ने कहा: “अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य प्रशासन को उन लोक सेवकों की सेवाओं से मुक्त करना है जो लोकहित की दृष्टि से ‘डेड वुड’ (Dead Wood / अनुपयोगी) हो चुके हैं और जिनकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। हालांकि, अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश से ठीक पहले केवल वरिष्ठता से नहीं बल्कि योग्यता (Merit) के आधार पर अर्जित पदोन्नति अपने आप में उस सेवानिवृत्ति आदेश को अमान्य बनाने के लिए पर्याप्त है। यूपीएससी द्वारा उपयुक्त पाए जाने और कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी से संयुक्त सचिव बनाए जाने के महज दो महीने बाद अधिकारी को ‘डेडवुड’ बताकर बाहर निकालना परस्पर विरोधी कदम हैं जो एक साथ अस्तित्व में नहीं रह सकते।”

2. देश सेवा में समर्पित अधिकारी को दुर्भावना से बाहर निकालना सत्ता का दुरुपयोग पीठ ने अधिकारियों की दुर्भावना पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा: “जिस अधिकारी ने अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ वर्ष राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिए, उसे लोकहित का दिखावटी बहाना बनाकर ‘डेडवुड’ कहना और सेवा से बाहर करना अत्यधिक द्वेष और शक्तियों के रंगीन दुरुपयोग को दर्शाता है। इस आदेश में ऐसा कुछ भी खोजने के लिए आंखें थक जाएंगी जो यह साबित कर सके कि यह कार्रवाई वास्तव में लोकहित में की गई थी।”

3. FR 56(j) नियमित जांच से बचने का शॉर्टकट या बदले की कार्रवाई नहीं अदालत ने स्पष्ट किया:

  • नियम 56(j) का उपयोग नियमित अनुशासनात्मक कार्यवाही से बचने के शॉर्टकट के रूप में या किसी अधिकारी से व्यक्तिगत प्रतिशोध/बदला लेने के लिए नहीं किया जा सकता।
  • रिव्यू कमेटी पूरे सेवा रिकॉर्ड और हालिया पदोन्नति को नजरअंदाज कर केवल विभाग के अनुकूल चुनिंदा पुरानी प्रतिकूल प्रविष्टियों पर निर्भर नहीं रह सकती।

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मामले की पृष्ठभूमि (1989 बैच के ITS अधिकारी का मामला)

  • सेवा इतिहास: अपीलकर्ता 1989 में भारतीय व्यापार सेवा (ITS) में नियुक्त हुए थे। 1994 में डिप्टी डीजीएफटी और 2001 में जॉइंट डीजीएफटी के पद पर पदोन्नत हुए। 2014 में उन्हें एंटी-डंपिंग महानिदेशालय (DGAD) में अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया गया।
  • संयुक्त सचिव पद पर पदोन्नति (2018): 16 नवंबर 2017 को उन्हें वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) में रखा गया और 27 फरवरी 2018 को यूपीएससी तथा एसीसी की मंजूरी से उन्हें संयुक्त सचिव पद पर नियमित पदोन्नति दी गई।
  • 2 महीने बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति (10 मई 2018): नियमित पदोन्नति के मात्र 2 महीने बाद, 10 मई 2018 को सक्षम प्राधिकारी ने उनके सामान्य सेवानिवृत्ति समय से लगभग 5 वर्ष पूर्व FR 56(j) के तहत उन्हें जबरन सेवानिवृत्त कर दिया।
  • कैट और दिल्ली हाईकोर्ट: सीएटी और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस आधार पर आदेश बरकरार रखा था कि रिव्यू कमेटी को पिछले रिकॉर्ड देखने का अधिकार था, जिसके बाद अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला और राहतें

  1. अनिवार्य सेवानिवृत्ति निरस्त: 10 मई 2018 का आदेश पूरी तरह रद्द कर दिया गया।
  2. पूर्ण सेवा लाभ और काल्पनिक पदोन्नति (Notional Promotion): अपीलकर्ता को सभी वित्तीय और सेवा लाभ इस तरह प्रदान किए जाएंगे जैसे वह कभी अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त हुए ही न हों। यदि उनके कनिष्ठ (Juniors) को इस अवधि के दौरान पदोन्नत किया गया है, तो उन्हें भी काल्पनिक पदोन्नति दी जाएगी।
  3. ₹15 लाख का हर्जाना:
    • ₹9 लाख: अधिकारी की प्रतिष्ठा व सम्मान की हानि के लिए मुआवजा (Compensation for loss of reputation)।
    • ₹6 लाख: मुकदमेबाजी का खर्च (Litigation Costs)।
  4. पूरे सम्मान के साथ फेयरवेल (Formal Farewell): अदालत ने विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT) को आदेश दिया कि वे अधिकारी को कार्यालय बुलाकर पूरे सम्मान के साथ औपचारिक विदाई समारोह आयोजित करें, जैसा कि उन्हें उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति पर मिलता।

विधिक विवरण

  • प्रासंगिक नियम: फंडामेंटल रूल्स (FR) का नियम 56(j)
  • पीठ: न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू
  • आदेश की तारीख: 9 सितंबर 2026

ITS Officer: मामले का विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतभारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठासीन पीठन्यायमूर्ति दीपक दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू
अधिकारी की सेवाभारतीय व्यापार सेवा (ITS) के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी
विवादित नियममौलिक नियम 56(j) / Fundamental Rule 56(j)
मुख्य आदेश₹15 लाख की क्षतिपूर्ति, सेवानिवृत्ति आदेश रद्द, सभी सेवा लाभ व सम्मानपूर्वक औपचारिक विदाई का निर्देश।
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