Sunday, September 20, 2026
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Judge Case: उपेक्षित समुदाय के व्यक्ति का लड़का (मोची) कम उम्र में जज बना…किस केस में सुप्रीम टिप्पणी की गई

Judge Case: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने पंजाब के एडिशनल सेशन जज (प्रेम कुमार) की बर्खास्तगी के मामले में कहा, ‘यह जज परिस्थितियों और जातिगत पक्षपात का शिकार हुआ। सब पहले से फिक्स था।

जजों से जातीय पक्षपात के मामले में टिप्पणी

न्यायपालिका में जजों से जातीय पक्षपात के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ऊंचे समुदाय के लोग बर्दाश्त ही नहीं कर पा रहे थे कि उपेक्षित समुदाय के व्यक्ति का लड़का (मोची) कम उम्र में जज बन गया और उनके बीच आ गया।’ प्रेम कुमार को दुष्कर्म के मामले में आरोपी की शिकायत पर ‘संदिग्ध निष्ठा’ का दोषी मानते हुए बर्खास्त कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जज की बर्खास्तगी गलत थी उनको बहाल किया जाए। साथ ही उनकी सेवा के पदोन्नति व अन्य सभी लाभ दिए जाएं।

हाईकोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती

बरनाला के प्रेम कुमार 26 अप्रैल 2014 को एडिशनल जिला एवं सत्र जज बने और अमृतसर जिला कोर्ट में नियुक्त हुए। इस दौरान दुष्कर्म के आरोपी ने हाई कोर्ट में शिकायत दी कि प्रेम कुमार ने वकालत करते वक्त दुष्कर्म पीड़िता की ओर से समझौते के लिए संपर्क किया और पीड़िता को 1.50 लाख रुपए दिलवाए। हाई कोर्ट ने विजिलेंस जांच शुरू की। इसके आधार पर जज की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में ‘ईमानदारी संदिग्ध’ दर्ज कर दी गई। फिर 2022 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की फुल बेंच ने 2015 की इस रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर प्रेम कुमार को बर्खास्त कर दिया। उन्होंने इसे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी तो जनवरी 2025 में सुबूतों की कमी का हवाला देते हुए उनकी बर्खास्तगी रद्द कर दी गई। हाई कोर्ट इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया।

एक अपराधी की शिकायत पर जज को संदिग्ध बता दिया…

इससे पहले, सुनवाई शुरू होने पर हाई कोर्ट की ओर से पेश वकील पटवालिया ने जैसे ही दलील देनी शुरू की, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा– अगर आप चाहते हैं कि मैं यह बात ओपन कोर्ट में बोलूं तो मुझे यह कहने में गुरेज नहीं है कि प्रेम कुमार परिस्थितियों और जातिगत पक्षपात का शिकार हुए हैं। सब फिक्स था। एक जज जिसका आचरण लगातार अच्छा रहा हो, उसे एक अपराधी की शिकायत पर संदिग्ध निष्ठा वाला करार दे दिया गया। हाई कोर्ट के वकील ने कुछ बोलना चाहा तो जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, आप वहां पर नहीं थे, मगर मैं था। मैंने मामला देखा है। अगर आप यह सोचते हैं कि मैं कुछ नहीं जानता तो बता दूं कि मैं बहुत कुछ जानता हूं। हाई कोर्ट में किस तरह की बातें हुई थीं, मैं जानता हूं।

प्रेम कुमार के पिता मोची, मां मजदूरी करती थी

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, प्रेम कुमार के पिता मोची थे और माता जी मजदूरी करती थी। बहुत उपेक्षित समुदाय से होने के बावजूद वे मेहनत करके जज बने। इस मामले में और भी बहुत सी बातें हैं, बेहतर यही होगा कि हमें उनका उल्लेख यहां न करना पड़े। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, एक जज जिसका आचरण अच्छा रहा हो, जिसके फैसले अच्छे रहे हों और व्यवहार अच्छा रहा हो, उसे कैसे संदिग्ध निष्ठा का मान सकते हैं? उसकी एसीआर रिपोर्ट बताती है कि मामलों को सुनने, फैसला देने और मामलों का निपटारा करने में वे बेहतर थे। मगर अचानक शिकायत आने के बाद सबकुछ खराब हो गया।

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