Land Dispute: केरल हाईकोर्ट में एक ईसाई सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट ‘असेंबली ऑफ क्रिश्चियन ट्रस्ट सर्विसेज’ (ACTS) ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है।
यह मामला असेंबली ऑफ क्रिश्चियन ट्रस्ट सर्विसेज बनाम भारत संघ व अन्य के नाम से कोर्ट के समक्ष आया है, जिसे अधिवक्ता जोसेफ जॉय के माध्यम से दायर किया गया है। केरल में ‘मुनंबम भूमि विवाद’ (Munambam Land Dispute) और वक्फ कानून में हुए हालिया बदलावों को लेकर कानूनी जंग अब और तेज हो गई है। याचिका में केरल राज्य वक्फ बोर्ड के वर्तमान गठन को असंवैधानिक घोषित करने और विवादित मुनंबम भूमि के विवरण को केंद्र सरकार के उम्मीद (UMEED) पोर्टल पर अपलोड करने के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है।
मामला क्या है?: वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 और गैर-मुस्लिम सदस्य
याचिकाकर्ता ट्रस्ट (ACTS) ने वक्फ बोर्ड के कानूनी ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विधिक आवश्यकता का उल्लंघन: याचिका में दलील दी गई है कि वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 (जो 8 अप्रैल 2025 को लागू हुआ था) की धारा 14(1) के तहत राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संशोधन पर रोक नहीं लगाई थी, बल्कि केवल यह तय किया था कि गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या तीन से अधिक नहीं होनी चाहिए।
केरल सरकार पर आरोप: ट्रस्ट का आरोप है कि केरल सरकार ने इस वैधानिक शर्त की जानबूझकर अनदेखी की है और वर्तमान वक्फ बोर्ड में केवल मुस्लिम सदस्यों को ही नामित किया है। बोर्ड में शिया, बोहरा या आगाखानी समुदायों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है और न ही कोई प्रतिष्ठित इस्लामी धर्मशास्त्री शामिल है।
भाजपा नेता की याचिका से समानता: इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज ने भी लगभग इन्हीं आधारों पर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिससे यह मामला काफी मिलता-जुलता है।
‘उम्मीद’ (UMEED) पोर्टल और मुनंबम भूमि का विवाद
याचिका का दूसरा और सबसे संवेदनशील हिस्सा मुनंबम (Ernakulam District) की 404 एकड़ तटीय भूमि के दावों से जुड़ा है।
UMEED पोर्टल का नियम: वक्फ अधिनियम की धारा 3B के अनुसार, 2025 के संशोधन से पहले पंजीकृत सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण छह महीने के भीतर केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ (Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development) पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। कानूनन यह जिम्मेदारी केवल संबंधित वक्फ के ‘मुतवल्ली’ (प्रबंधक/Muttawali) की होती है।
बोर्ड द्वारा विवरण अपलोड करना: याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुतवल्ली के बजाय खुद वक्फ बोर्ड ने आगे बढ़कर मुनंबम गाँव की ४०४ एकड़ तटीय भूमि का विवरण पोर्टल पर अपलोड कर दिया।
600 से अधिक परिवारों पर संकट: मुनंबम एक अत्यधिक विवादित क्षेत्र है जहां मुख्य रूप से लैटिन कैथोलिक ईसाई और हिंदू समुदाय के 600 से अधिक परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। ट्रस्ट का तर्क है कि यदि इस भूमि को आधिकारिक रूप से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता है, तो ये सभी परिवार बेघर हो जाएंगे।
ट्रस्ट ने हाई कोर्ट से क्या मांगें की हैं?
याचिकाकर्ता ‘ACTS’ ने वक्फ बोर्ड की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए अदालत से निम्नलिखित विधिक राहत देने का अनुरोध किया है।
कार्यवाही पर अंतरिम रोक: जब तक धारा 14 के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति करके वक्फ बोर्ड का नए सिरे से कानूनी गठन नहीं हो जाता, तब तक राज्य वक्फ बोर्ड के कामकाज और कामकाज की शक्तियों को तत्काल निलंबित (Suspend) किया जाए।
फैसलों को शून्य घोषित करना: अपूर्ण और अवैध रूप से गठित बोर्ड द्वारा लिए गए सभी प्रशासनिक, पर्यवेक्षी और अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) निर्णयों को अमान्य (Null and Void) घोषित किया जाए।
पोर्टल प्रविष्टि को रद्द करना: वक्फ बोर्ड द्वारा मुनंबम भूमि के विवरण को उम्मीद (UMEED) पोर्टल पर अपलोड करने की कार्रवाई को कानूनी रूप से अवैध माना जाए।
नई अधिसूचना की मांग: केरल सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह अदालत द्वारा तय समय सीमा के भीतर कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप नए सदस्यों को नामित करते हुए एक नई अधिसूचना जारी करे।
केस मैट्रिक्स: केरल हाई कोर्ट में दायर याचिका (Case Summary)
| विधिक और प्रशासनिक श्रेणियां | केरल उच्च न्यायालय में लंबित याचिका के मुख्य बिंदु |
| याचिकाकर्ता | असेंबली ऑफ क्रिश्चियन ट्रस्ट सर्विसेज (ACTS) |
| याचिका का प्रकार | जनहित याचिका (PIL) |
| प्रासंगिक कानून | वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 14(1) और धारा 3B |
| मुख्य कानूनी विवाद | क्या बिना गैर-मुस्लिम सदस्यों के गठित राज्य वक्फ बोर्ड के फैसले कानूनी रूप से वैध हैं? |
| प्रभावित क्षेत्र | मुनंबम गाँव, केरल (404 एकड़ तटीय भूमि, जहां 600+ ईसाई और हिंदू परिवार निवास करते हैं) |
| याचिकाकर्ता के वकील | एडवोकेट जोसेफ जॉय |

