Tuesday, September 29, 2026
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Livestock Insurance: मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुर्गियां पशुधन की श्रेणी में; सड़क हादसे में मुर्गियों की मौत होने पर मिलेगा बीमा दावा, सभी यह पढ़ें

केस एवं विधिक सारांश (Overview Matrix)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (August 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति गीता के.बी. (कर्नाटक उच्च न्यायालय)
केस का नामके. वीरा नारायण स्वामी बनाम वाई. यंकप्पा (K Veera Narayana Swamy v. Y Yankappa)
संबंधित कानूनMotor Vehicles Act, Section 2(13) (Goods & Livestock Definition)
मुख्य विधिक सिद्धांतमुर्गियों (Hens/Poultry) का परिवहन ‘Goods/Livestock’ की श्रेणी में आता है; दुर्घटना में नुकसान होने पर थर्ड पार्टी मोटर बीमा दावा देय होगा।
अदालत का अंतिम आदेश1. MACT द्वारा दिए गए ₹4.51 लाख के मुआवजे की पुष्टि।
2. ब्याज दर 7% से घटाकर 6% प्रति वर्ष की गई।

Livestock Insurance: कर्नाटक हाईकोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू पर बड़ा फैसला सुनाया है।

न्यायमूर्ति गीता के.बी. की एकल पीठ ने ‘रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी’ (Reliance General Insurance) की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि मुर्गियों को ‘पशुधन’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुर्गियां (Hens) मोटर वाहन अधिनियम के तहत ‘पशुधन’ (Livestock) की परिभाषा में आती हैं। इसलिए, सड़क दुर्घटना में यदि मुर्गियों की मौत होती है, तो इसे माल/संपत्ति (Damage to Goods/Property) के नुकसान के रूप में माना जाएगा और पोल्ट्री फार्म मालिक बीमा कंपनी से मुआवजे का दावा कर सकता है।

न्यायमूर्ति गीता के.बी. ने फैसले में कहा: पशुधन (Livestock) का अर्थ मुर्गियां है और इसमें मुर्गियां शामिल हैं। इसलिए, मुर्गी को पशुधन माना जाता है।

मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  1. सड़क हादसा और एमएसीटी का फैसला
    • एक पोल्ट्री फार्म मालिक अपनी 2,250 ब्रायलर मुर्गियों को एक आयशर (Eicher) वैन में ले जा रहा था। रास्ते में वाहन के पलटने से लगभग 2,000 मुर्गियों की मौत हो गई, जबकि बाकी 250 मुर्गियों को स्थानीय लोग ले गए।
    • पोल्ट्री फार्म मालिक ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के समक्ष ₹5.90 लाख के मुआवजे का दावा ठोका। MACT ने दावे को स्वीकार करते हुए 7% वार्षिक ब्याज के साथ ₹4.51 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया।
  2. बीमा कंपनी की याचिका और तर्क
    • रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने MACT के इस फैसले को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि:
      • मुर्गियां ‘पशुधन’ (Livestock) के दायरे में नहीं आती हैं।
      • वाहन मालिक ने पशुओं के परिवहन से संबंधित ‘कर्नाटक मोटर वाहन नियम, 1989’ के नियम 74 (Rule 74) का पालन नहीं किया। नियम 74 में मवेशियों (Cattle) की परिभाषा में गाय, भैंस, बकरी, सूअर आदि शामिल हैं, लेकिन मुर्गियों का उल्लेख नहीं है।

🏛️ हाई कोर्ट की विधिक व्याख्या और फैसला

  1. MV Act की धारा 2(13) का सहारा
    • हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी के तर्क को खारिज करते हुए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2(13) का हवाला दिया। इस धारा में ‘सामान’ (Goods) की परिभाषा दी गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से ‘पशुधन’ (Livestock) शामिल है।
  2. नियम 74 और पॉलिसी की सीमा
    • कोर्ट ने माना कि भले ही कर्नाटक मोटर वाहन नियम के नियम 74 में मुर्गियों को ‘मवेशी’ (Cattle) के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है, लेकिन अधिनियम की धारा 2(13) के तहत उन्हें ‘पशुधन’ माना जाएगा।
    • अदालत ने बीमा पॉलिसी के ‘दायित्व की सीमा’ (Limits of Liability) क्लॉज का हवाला देते हुए नोट किया कि तीसरे पक्ष की संपत्ति/सामान के नुकसान की भरपाई ₹7.5 लाख तक की सीमा के तहत कवर होती है।
  3. अंतिम आदेश
    • हाई कोर्ट ने मुआवजा राशि (₹4.51 लाख) में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
    • हालांकि, कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ब्याज दर को 7% से घटाकर 6% प्रति वर्ष कर दिया।
    • बीमा कंपनी को 8 सप्ताह के भीतर ब्याज सहित मुआवजे की राशि MACT में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।

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