Sunday, July 19, 2026
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Marriage Inside Jail: सलाखों के पीछे शहनाई…मर्डर के आरोपी से शादी फाइनल, अदालत की पहल पर दो कैदियों को शादी करने की इजाजत

Marriage Inside Jail: जोधपुर की मंडोर ओपन जेल (Open Air Camp) जल्द ही एक अनोखी शादी की गवाह बनने जा रही है।

किसी भी नागरिक के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकार खत्म नहीं हो जाते

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और प्रगतिशील फैसला सुनाते हुए मर्डर केस (Murder Convict) के एक 33 वर्षीय कैदी को उसकी मंगेतर (जो खुद एक कैदी है और फिलहाल जमानत पर बाहर है) से खुली जेल परिसर में शादी करने की कानूनी अनुमति दे दी है। जेल में बंद होने से किसी भी नागरिक के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकार खत्म नहीं हो जाते। दो बालिगों द्वारा आपसी सहमति से विवाह करना उनके ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार’ का एक अभिन्न हिस्सा है। विवाह की संस्था हमारे समाज की एक बुनियादी इकाई है, और कैदियों के सुधार व पुनर्वास के लिए उन्हें अपना भविष्य संवारने का मौका मिलना ही चाहिए।

मामला क्या है?: नागौर का दोषी और ‘ओपन जेल’ में विवाह की अर्जी

यह अनोखा कानूनी मामला जोधपुर के मंडोर ओपन एयर कैंप से सामने आया है।

कैदी की पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता को नागौर की एक निचली अदालत ने 19 अगस्त 2023 को हत्या (Murder), सबूत मिटाने और संपत्ति की हेराफेरी के मामले में दोषी ठहराया था। वह 16 फरवरी 2017 से हिरासत में है। अच्छे आचरण और पात्रता मानदंडों को पूरा करने के बाद जेल प्रशासन की सिफारिश पर उसे मंडोर के ‘ओपन एयर कैंप’ (खुली जेल) में शिफ्ट किया गया था।

शादी की मांग: कैदी के वकीलों (कालू राम भाटी और श्रवण सिंह राठौड़) ने अदालत में ‘सजा के अस्थायी निलंबन’ (Temporary Suspension of Sentence) की अर्जी लगाई। उन्होंने दलील दी कि कैदी एक अन्य महिला कैदी से शादी करना चाहता है जो जमानत पर बाहर है। शादी से कैदी के सुधार (Reformation) और समाज की मुख्यधारा में लौटने में मदद मिलेगी।

सरकार का रुख: लोक अभियोजक सी.एस. ओझा ने कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें बताया गया कि दोनों पहले से ही लिव-इन रिलेशनशिप में थे और शादी करना चाहते थे। सरकार ने इस शादी का कोई विरोध नहीं किया और कहा कि खुली जेल के नियमों के तहत जेल की मर्यादा बनाए रखते हुए इस विवाह को कराने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है।

हाई कोर्ट का विधिक दृष्टिकोण: अनुच्छेद 21 और वंश वृद्धि का अधिकार

जस्तित पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भट्टाचार्य की खंडपीठ ने इस मामले को केवल एक विवाह की अनुमति के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के विस्तार के रूप में देखा।

ऐतिहासिक नजीरों (Precedents) का सहारा: कोर्ट ने अपने फैसले को पुख्ता करने के लिए दो बड़े फैसलों का हवाला दिया।

नंद लाल बनाम राज्य (2022 – राजस्थान HC): इस फैसले में कोर्ट ने माना था कि कैदी की सजा के कारण उसकी बेगुनाह पत्नी को संतान प्राप्ति या वंश वृद्धि के अधिकार (Right to Progeny) से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसने कोई अपराध नहीं किया है। पैरोल का उद्देश्य कैदी को शांतिपूर्वक समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।

जसवीर सिंह वाद (पंजाब एवं हरियाणा HC): इस ऐतिहासिक फैसले में तय हुआ था कि जेल में बंद रहने के दौरान भी संतानोत्पत्ति (Procreation) का अधिकार जीवित रहता है और यह सीधे तौर पर अनुच्छेद 21 के तहत आता है।

संवैधानिक पीठ की टिप्पणी: कोर्ट ने साफ कहा कि विवाह करने की इच्छा और सहमति दो वयस्कों का आंतरिक अधिकार है, जिसे केवल जेल की सजा होने के कारण पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता।

खुली जेल (Open Jail) क्या होती है?

राजस्थान कैदी ओपन एयर कैंप रूल्स, 1972 के तहत खुली जेलों को “बिना दीवारों, सलाखों और तालों की जेल” कहा जाता है। यहाँ सुरक्षा बेहद कम होती है और यह कैदियों के स्व-अनुशासन (Self-discipline) पर काम करती है। कैदी सुबह की हाजिरी (Roll Call) के बाद बाहर जाकर काम कमा सकते हैं और शाम की हाजिरी से पहले उन्हें लौटना होता है। सबसे खास बात यह है कि इस जेल में योग्य कैदियों को अपने परिवार के साथ रहने की अनुमति होती है, ताकि वे समाज से पूरी तरह न कटें।

सलाखों के पीछे शहनाई: भारत में जेल विवाहों का इतिहास

भारत की अदालतों ने समय-समय पर यह माना है कि शादी करने का अधिकार जेल के फाटकों पर आकर खत्म नहीं होता। नीचे भारत में हुए कुछ प्रमुख जेल विवाहों का क्रमवार विवरण दिया गया है।

कोर्ट परिसर में विवाह (हरियाणा) 2013

जींद कोर्ट परिसर, हरियाणा में हत्या के एक उम्रकैद के कैदी ‘संजय’ ने पुलिस सुरक्षा के बीच अपनी प्रेमिका ‘ममता’ से शादी की। यह भारत में जेल से जुड़े शुरुआती मामलों में से एक था।

ऐतिहासिक कानूनी मिसाल (Punjab & Haryana HC) 2016

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सुमीत बाजवा मामले में कैदी के शादी करने के अधिकार को बरकरार रखा और प्रशासन को व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसी फैसले ने भविष्य की जेल शादियों के लिए विधिक आधार तैयार किया।

नाभा जेल का पहला गुरुद्वारा विवाह (पंजाब) 2019

पंजाब की सबसे सुरक्षित ‘नाभा मैक्सिमम सिक्योरिटी जेल’ के इतिहास में पहली बार परिसर के भीतर बने गुरुद्वारे में उम्रकैद के कैदी ‘मनदीप सिंह’ की शादी ‘पवनदीप कौर’ से कराई गई।

नाभा जेल के भीतर निकाह (पंजाब) 2019

उसी वर्ष, नाभा जेल प्रशासन ने कोर्ट के आदेश पर एक अन्य उम्रकैद के कैदी ‘मोहम्मद वसीम’ का निकाह उसकी मंगेतर के साथ जेल परिसर के अंदर ही मुकम्मल करवाया।

कैदी बने बाराती (बिहार) 2025

बिहार की मधुबनी जेल के भीतर विचाराधीन कैदी (Undertrial) ‘छोटू यादव’ ने अपनी विधवा भाभी से विवाह किया। इस शादी में जेल के कर्मचारी गवाह बने और जेल के साथी कैदियों ने ‘बाराती’ की भूमिका निभाई।

कोर्ट का अंतिम आदेश: जेल प्रशासन को विधिक निर्देश

हाई कोर्ट ने विवाह आवेदन को निपटाते हुए जेल अधिकारियों को पुख्ता सुरक्षा और गरिमा के साथ विवाह संपन्न कराने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मेहमानों की सीमा: शादी की रस्मों को निभाने के लिए कैदी के परिवार के अधिकतम 21 सदस्यों को ओपन एयर कैंप के भीतर जाने की अनुमति होगी। (जेल अधिकारी चाहें तो मेहमानों की संख्या बढ़ा सकते हैं)।

अनुशासन की शर्तें: कैदी को पहले से शादी की तारीख जेल प्रशासन को बतानी होगी। जेलर के पास अनुशासन और डेकोरम बनाए रखने के लिए आवश्यक शर्तें लगाने का पूरा अधिकार होगा।

खर्च का वहन: शादी और उससे जुड़ी तमाम रस्मों का पूरा खर्च खुद कैदी को ही उठाना होगा।

विधिक केस शीट: मनीराम बनाम राज्य (जोधपुर जेल विवाह वाद – 2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय
संबंधित अदालतराजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर पीठ)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भट्टाचार्य
मुख्य कानूनी सिद्धांतविवाह और संतानोत्पत्ति का अधिकार अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग है
शादी का स्थानमंडोर ओपन एयर कैंप (Open Air Camp), जोधपुर
मेहमानों की विधिक अनुमतिपरिवार के अधिकतम 21 सदस्य (अतिरिक्त सदस्य जेलर की अनुमति पर)
विधिक दृष्टिकोणसुधारात्मक न्याय प्रणाली (Reformative Criminal Justice System) का विस्तार

अदालत ने यह बेहद मानवीय और विधिक दृष्टिकोण अपनाया है कि जब खुद राज्य सरकार और जेल प्रशासन को इस शादी से कोई आपत्ति नहीं है, और आरोपी एक खुली जेल (ओपन कैंप) में अपनी सजा काट रहा है, तो उसे अपनी पत्नी के साथ एक सम्मानजनक सामाजिक भविष्य की योजना बनाने का पूरा अधिकार है। जेल की दीवारें किसी के अतीत को तो कैद कर सकती हैं, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले सुनहरे भविष्य के बुनियादी हक को नहीं छीन सकतीं।

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