Monday, October 19, 2026
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Sole Guardian: पिता के मिलने के अधिकार से ऊपर बच्चे का भविष्य…मां को क्यों बनाया एकमात्र कानूनी अभिभावक, पढ़िए पूरा मामला

Sole Guardian: वैवाहिक विवादों के बीच बच्चों के भविष्य को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत को रेखांकित किया है।

बच्चे को शिक्षा के लिए कनाडा ले जाने की पूर्ण अनुमति दी

हाईकोर्ट के जस्टिस ए.डी. मारिया क्लीट की एकल पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें उन्होंने एक मां को उसके नाबालिग बेटे का ‘एकमात्र कानूनी अभिभावक’ (Sole Guardian) घोषित करते हुए उसे बच्चे को शिक्षा के लिए कनाडा (Canada) ले जाने की पूर्ण अनुमति दे दी है। कहा, बच्चों की कस्टडी और गार्जियनशिप (Guardianship) से जुड़े कानूनी मामलों में, किसी भी माता-पिता के व्यक्तिगत अधिकार गौण (Subordinate) हैं। अदालत के लिए सबसे बड़ा और सर्वोपरि विचार (Paramount Consideration) केवल और केवल बच्चे का कल्याण, उसकी सुरक्षा, स्थिरता और उसके बेहतर शैक्षणिक अवसर हैं। पिता के मिलने के अधिकार (Visitation Rights) के विवाद के कारण किसी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य और विदेश में पढ़ाई के सुनहरे अवसर को अधर में नहीं लटकाया जा सकता।

मामला क्या है?: वैवाहिक विवाद, पिता का असहयोग और कनाडा का वीज़ा

यह कानूनी लड़ाई एक अलग हो चुके दंपति और उनके 7 वर्षीय बेटे के भविष्य से जुड़ी है।

पृष्ठभूमि: दंपति का विवाह सितंबर 2016 में हुआ था और जनवरी 2019 में उनके बेटे का जन्म हुआ। वैवाहिक विवादों के बाद दोनों अलग रहने लगे। महिला अपने बेटे के साथ अपने माता-पिता के घर रह रही थी। मां ने कोर्ट को बताया कि पिता ने बच्चे की परवरिश, खर्चों या शिक्षा में कभी निरंतर योगदान नहीं दिया।

कनाडा जाने में रुकावट: मां अपने बेटे को बेहतर भविष्य और उच्च शिक्षा के अवसर देने के लिए कनाडा ले जाना चाहती थी। लेकिन बच्चे के वीज़ा, स्कूल एडमिशन और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं के लिए पिता के हस्ताक्षर और सहमति दस्तावेजों की आवश्यकता थी, जिसे देने में पिता असहयोग कर रहा था।

अदालती रुख: अंततः मां ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कानूनी नोटिस मिलने पर पिता अदालत में पेश हुआ और उसने मां को एकमात्र अभिभावक बनाने और कस्टडी देने पर तो सहमति (Consent Affidavit) दे दी, लेकिन बच्चे से मिलने के अधिकार (Visitation Rights) की मांग पर अड़ गया, जिससे मामला खिंच रहा था।

हाई कोर्ट का विधिक दृष्टिकोण: बच्चे का कल्याण ही सर्वोच्च कानून

जस्टिस ए.डी. मारिया क्लीट ने मामले के विधिक और मानवीय पहलुओं को तौलते हुए स्पष्ट किया कि अदालत बच्चे के भविष्य से समझौता नहीं कर सकती।

मां की योग्यता अचूक: अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत या सामग्री नहीं है जो यह साबित करे कि मां अयोग्य (Unfit), अक्षम या बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ है। वह पिछले कई सालों से अकेले ही बच्चे को संभाल रही है।

विजिटेशन राइट्स बनाम उज्ज्वल भविष्य: कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा, गार्जियनशिप और कस्टडी की कार्यवाहियों में नाबालिग का कल्याण ही सर्वोपरि विचार है। माता-पिता के अधिकार, हालांकि प्रासंगिक हैं, लेकिन बच्चे के कल्याण, स्थिरता, सुरक्षा और शैक्षणिक संभावनाओं के सामने गौण हैं। औपचारिक रूप से पिता को मिलने का अधिकार तय न होना, बच्चे के कल्याण और शिक्षा के लिए आवश्यक आदेशों के आड़े नहीं आ सकता।

कोर्ट का अंतिम आदेश: दो टूक विधिक फैसला

मद्रास हाई कोर्ट ने बच्चे के हित में प्रक्रियात्मक देरी को खत्म करते हुए निम्नलिखित आदेश जारी किए।

एकमात्र अभिभावक घोषित: कोर्ट ने मां को बच्चे का एकमात्र कानूनी अभिभावक (Sole Guardian) घोषित किया और उसे स्थायी कस्टडी (Permanent Custody) सौंप दी।

विदेश जाने की अनुमति: कोर्ट ने मां को बच्चे के शैक्षणिक और निवास संबंधी उद्देश्यों के लिए उसे भारत के अधिकार क्षेत्र से बाहर (कनाडा) ले जाने की बिना शर्त अनुमति दे दी।

विजिटेशन पर अलग से सुनवाई: अदालत ने साफ किया कि पिता की ‘मिलने के अधिकार’ की मांग पर अलग से विचार किया जाएगा। इस मुद्दे के कारण वीज़ा और स्कूल एडमिशन की प्रक्रिया को और नहीं रोका जा सकता। पिता चाहे तो आपसी सहमति से या सक्षम अदालत में अलग से आवेदन देकर अपने विजिटेशन राइट्स के लिए कानूनी गुहार लगा सकता है।

विधिक केस शीट: मद्रास हाई कोर्ट बनाम बाल अभिरक्षा एवं अभिभावकत्व वाद (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय
संबंधित अदालतमद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई
माननीय न्यायाधीशजस्टिस ए.डी. मारिया क्लीट
मुख्य कानूनी सिद्धांतबच्चे का कल्याण (Welfare of Minor) माता-पिता के अधिकारों से ऊपर है
न्यायालय का निर्णयमां को ‘एकमात्र अभिभावक’ का दर्जा और स्थायी कस्टडी मंजूर
अंतरराष्ट्रीय यात्राबच्चे को पढ़ाई और रहने के लिए कनाडा ले जाने की विधिक अनुमति
पिता के अधिकारविजिटेशन राइट्स (मिलने के अधिकार) के लिए अलग से आवेदन करने की छूट

जस्टिस ए.डी. मारिया क्लीट ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका किसी भी स्थिति में बच्चे के करियर और उसकी भलाई को बंधक नहीं बनने देगी। पिता को मिलने का अधिकार (Visitation Right) जरूर मिलना चाहिए, लेकिन उसकी कीमत बच्चे का करियर या उसकी अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का नुकसान नहीं हो सकती। यह आदेश बच्चों के सर्वोत्तम हितों (Best Interests of the Child) को कानूनी रूप से सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है।

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