Mislead The Court: तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट को सूचित किया है कि वह 2017 के एक बहुचर्चित बच्ची के दुष्कर्म और हत्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय में क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Petition – उपचारात्मक याचिका) दायर करेगी।
पीआईएल के माध्यम से याचिका पर सुनवाई
मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के इस आधिकारिक बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका (PIL) का निपटारा कर दिया। दरअसल, एक वकील ने पीआईएल के माध्यम से मामले के मुख्य आरोपी एस दसवंत (S Dashwanth) को बरी किए जाने के खिलाफ चुनौती दी थी। इस मामले में अदालत ने सुनवाई की।
विवाद का कारण: क्या सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया गया?
जनहित याचिका: यह पूरा मामला अधिवक्ता वेंकटेश एस. द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आरोपी दसवंत ने अपनी दोषसिद्धि और मौत की सजा को चुनौती देते समय सुप्रीम कोर्ट को प्रक्रियात्मक रूप से गुमराह करके बरी होने का आदेश हासिल किया।
याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क और विधिक पहलू: अनुच्छेद 134(1)(c) का गलत इस्तेमाल: याचिका के अनुसार, दसवंत ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी नियमित आपराधिक अपील को इस आधार पर स्वीकार करवाया कि मद्रास हाई कोर्ट ने उसे संविधान के अनुच्छेद 134(1)(c) के तहत अपील करने का प्रमाणपत्र (Leave to Appeal) दिया था।
RTI से हुआ भंडाफोड़: याचिकाकर्ता वकील ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मद्रास हाई कोर्ट की रजिस्ट्री से जानकारी मांगी। आरटीआई के जवाब में सामने आया कि हाई कोर्ट ने दसवंत को ऐसा कोई फिटनेस सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया था।
सीमित नोटिस को नियमित अपील में बदला: इस गलत जानकारी के आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया (जिसमें केवल सजा कम करने पर विचार करने के लिए सीमित नोटिस जारी हुआ था) और फरवरी 2025 में इसे एक पूर्ण नियमित आपराधिक अपील में बदल दिया था। इसके बाद 8 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की कमियों का हवाला देते हुए आरोपी को पूरी तरह बरी कर दिया। चूंकि राज्य सरकार द्वारा दायर की गई ‘पुनर्विचार याचिका’ (Review Petition) को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है, इसलिए इस प्रक्रियात्मक धोखाधड़ी को देखते हुए अब केवल क्यूरेटिव पिटीशन (उपचारात्मक याचिका) का रास्ता ही शेष बचा था।
मामले की पृष्ठभूमि (2017 का जघन्य अपराध)
- घटना: 5 फरवरी 2017 को चेन्नई के मंगादु थाना क्षेत्र के एक अपार्टमेंट परिसर से एक मासूम बच्ची लापता हो गई थी।
- गिरफ्तारी व बरामदगी: सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने 8 फरवरी 2017 को दसवंत को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के इकबालिया बयान के आधार पर बच्ची का जला हुआ शव बरामद किया गया था।
- निचली अदालत और हाई कोर्ट का रुख: फरवरी 2018 में निचली अदालत ने दसवंत को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। जुलाई 2018 में मद्रास हाई कोर्ट ने भी इस दोषसिद्धि और मृत्युदंड की पुष्टि (Confirm) कर दी थी।
केस मैट्रिक्स (Case Summary at a Glance)
| कानूनी पैरामीटर | विवरण |
| मद्रास हाई कोर्ट बेंच | जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन |
| मामला | वेंकटेश बनाम भारत संघ (Venkatesh v. Union of India) |
| मुख्य आरोपी | एस दसवंत (2017 बच्ची बलात्कार-हत्याकांड) |
| विधिक त्रुटि | बिना हाई कोर्ट सर्टिफिकेट के अनुच्छेद 134(1)(c) के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का आरोप। |
| आगामी कदम | तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करेगी। |
निष्कर्ष (Takeaway)
न्यायिक प्रक्रिया में क्यूरेटिव पिटीशन (उपचारात्मक याचिका) किसी भी मामले में इंसाफ की आखिरी उम्मीद होती है, जिसका इस्तेमाल केवल ‘अदालत की प्रक्रिया के घोर दुरुपयोग’ या ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन’ के असाधारण मामलों में ही किया जाता है। यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने वास्तव में जाली या गलत तकनीकी आधार पर सुप्रीम कोर्ट को प्रभावित कर बरी होने का आदेश प्राप्त किया था, तो शीर्ष अदालत अपने इस फैसले को वापस ले सकती है। तमिलनाडु सरकार का यह कदम इस जघन्य मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की आखिरी कानूनी लड़ाई है।

