Pre-existing Disease: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों के क्लेम को ‘पुरानी बीमारी’ (Pre-existing Disease) का बहाना बनाकर खारिज करने वाली बीमा कंपनियों की मनमानी पर एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है।
खोपड़ी में हुआ फ्रैक्चर
NCDRC के पीठासीन सदस्य एवीएम जे. राजेंद्र (सेवानिवृत्त) और सदस्य जस्टिस अनूप कुमार मेंदिरत्ता की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि खोपड़ी में हुआ फ्रैक्चर (Frontal Bone Fracture) किसी भी इंसान की मौत के लिए सामान्य तौर पर पर्याप्त है। इसे किसी बीमारी से हुई प्राकृतिक मौत नहीं कहा जा सकता। आयोग ने पंजाब के एक किसान की मौत के मामले में चार दिग्गज निजी बीमा कंपनियों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए मृतक के बेटों को ₹1.75 करोड़ के कुल बीमा क्लेम का भुगतान करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है।
यह रही आयोग की टिप्पणी
आयोग ने बीमा कंपनियों के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा, “दुर्घटना में लगी चोटों के कारण पॉलिसीधारक की मृत्यु पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। जब तक बीमा कंपनियां यह साबित नहीं कर देतीं कि मृतक ने पॉलिसी लेते समय जानबूझकर गलत जानकारी दी थी या गंभीर बीमारी को छुपाया था, तब तक केवल संदेह के आधार पर क्लेम को खारिज करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अनुचित है।”
मामला क्या था? (2017 में कुत्ते को बचाते समय हुआ था हादसा)
यह लंबी कानूनी लड़ाई पंजाब के लुधियाना जिले के साहिबाना गांव के रहने वाले एक किसान निर्मल सिंह के बेटों हरजिंदर सिंह और हरदीप सिंह ने लड़ी है।
सड़क दुर्घटना (9 अगस्त 2017): निर्मल सिंह अपने बेटे हरजिंदर के साथ स्कूटर पर जा रहे थे। अचानक सड़क पर एक कुत्ता आ गया, जिसे बचाने के चक्कर में स्कूटर का संतुलन बिगड़ गया और वे सड़क पर गिर गए। निर्मल सिंह के सिर में गंभीर चोटें आईं और लुधियाना के फोर्टिस अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
पुलिस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 (अप्राकृतिक मृत्यु) के तहत मामला दर्ज किया और लुधियाना के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया।
कुल ₹1.75 करोड़ का बीमा कवर: निर्मल सिंह ने अलग-अलग कंपनियों से कुल 4 पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसियां ली थीं, जिसमें स्टार हेल्थ (₹1 करोड़), भारती एक्सा (₹30 लाख), आईसीआईसीआई लोम्बार्ड (₹25 लाख) और रिलायंस जनरल (₹20 लाख) शामिल थीं।
4 बीमा कंपनियों के कुतर्क: ‘हादसा फर्जी है, मौत बीमारी से हुई’
निर्मल सिंह की मौत के बाद जब बेटों ने क्लेम मांगा, तो चारों कंपनियों ने मिलकर क्लेम खारिज (Repudiate) कर दिए और अजीबोगरीब दलीलें दीं।
रिलायंस और स्टार हेल्थ का दावा: कंपनियों ने कहा कि परिवार की कहानी ‘मनगढ़ंत’ है। उनके इनवेस्टिगेटर के मुताबिक निर्मल सिंह पहले से ही बीमार थे और उनकी मौत प्राकृतिक कारणों (Natural Causes) से हुई थी।
भारती एक्सा और ICICI लोम्बार्ड का तर्क: उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखे शब्दों ‘सेप्टीसीमिया, हृदय और फेफड़ों की बीमारी’ का हवाला देते हुए कहा कि मौत एक्सीडेंट से नहीं, बल्कि पुरानी मेडिकल कंडीशन की वजह से हुई।
कम समय में कई पॉलिसियां: कंपनियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक साधारण किसान होने के बावजूद उन्होंने मौत से कुछ समय पहले ही कम अंतराल में ₹1.75 करोड़ का भारी-भरकम एक्सीडेंटल कवर क्यों खरीदा?
टर्निंग पॉइंट: डॉक्टरों की गवाही और ‘एक्सपर्ट्स’ की पोल खुली
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) ने मामले के तकनीकी और विधिक पहलुओं की बारीकी से जांच की, जिसके बाद बीमा कंपनियों के सारे दावे धरे के धरे रह गए।
खोपड़ी का फ्रैक्चर अकाट्य प्रमाण: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के माथे पर सूजन और खोपड़ी की फ्रंटल बोन में फ्रैक्चर (Fracture of Left Frontal Bone) दर्ज था। डॉक्टरों ने साफ लिखा था कि मौत का मुख्य कारण ‘सिर की गंभीर चोट के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट और सेप्टीसीमिया’ था।
‘कागजी डॉक्टरों’ की राय खारिज: बीमा कंपनियों ने कुछ ऐसे डॉक्टरों (Medical Experts) की ओपिनियन रिपोर्ट पेश की थी, जिन्होंने कभी निर्मल सिंह का शव देखा तक नहीं था और सिर्फ फाइलों को देखकर कह दिया कि सिर की चोट मामूली थी। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि शव का भौतिक परीक्षण करने वाले सरकारी डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही अंतिम सत्य मानी जाएगी।
पुरानी बीमारी का कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं: कोर्ट ने कंपनियों से पूछा कि क्या उनके पास कोई ऐसा पर्चा, अस्पताल का रिकॉर्ड या दवाइयों का बिल है जिससे साबित हो कि निर्मल सिंह को पॉलिसी लेने से पहले हार्ट या लंग्स की बीमारी थी? कंपनियां ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सकीं।
विश्लेषण: 9 साल के संघर्ष का वित्तीय लेखा-जोखा
पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने पहले ही परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ कंपनियां नेशनल फोरम (NCDRC) गई थीं। NCDRC ने कंपनियों की अपीलें खारिज करते हुए निम्नलिखित अंतिम आदेश दिया।
| बीमा प्रदाता कंपनी (Insurance Companies) | अदालत द्वारा आदेशित क्लेम राशि (Payout Matrix) |
| Star Health & Allied Insurance | ₹1,00,00,00,000 (1 करोड़ रुपये) + क्लेम खारिज होने की तारीख से 7% वार्षिक ब्याज। (यदि 6 हफ्ते में भुगतान नहीं किया, तो डिफॉल्ट अवधि के लिए 8% ब्याज देना होगा)। |
| Bharti AXA General Insurance | ₹30,00,000 (30 लाख रुपये) (राज्य आयोग के आदेशानुसार पूर्ण भुगतान)। |
| ICICI Lombard General Insurance | ₹25,00,000 (25 लाख रुपये) (राज्य आयोग के आदेशानुसार पूर्ण भुगतान)। |
| Reliance General Insurance | ₹20,00,000 (20 लाख रुपये) (राज्य आयोग के आदेशानुसार पूर्ण भुगतान)। |
| कुल मूल बीमा राशि | ₹1,75,00,000 (1.75 करोड़ रुपये) + संचित ब्याज |
कई पॉलिसियां लेना अपराध नहीं
बीमा कंपनियों की इस दलील पर कि मृतक ने कम समय में कई पॉलिसियां क्यों लीं, अदालत ने ऐतिहासिक व्यवस्था देते हुए कहा कि देश का कोई भी नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए कितनी भी एक्सीडेंटल पॉलिसियां ले सकता है, इस पर कोई कानूनी रोक नहीं है। जब कंपनियों ने खुद जोखिम का आकलन (Risk Assessment) करके और प्रीमियम लेकर पॉलिसियां जारी की थीं, तो अब मौत के बाद वे इस पर सवाल नहीं उठा सकतीं।

