Sunday, June 14, 2026
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Unofficial Note: एक ही जगह पर अफसर ने काट दिए 10 साल…अब बोल रहे हैं MLA ने ट्रांसफर करवा दिया, कहानी पढ़कर जानिए

Unofficial Note: सरकारी सेवा में एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने वाले कर्मचारियों को स्थानांतरण (Transfer) के खिलाफ अदालतों से राहत नहीं मिलेगी, भले ही वे राजनीतिक दबाव का आरोप क्यों न लगाएं।

विकास अधिकारी के तबादला आदेश को बरकरार रखा

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के एक विकास अधिकारी के तबादला आदेश को बरकरार रखते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। अधिकारी ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव में प्रचार करने से इनकार करने पर एक स्थानीय विधायक (MLA) के इशारे पर उसका ट्रांसफर किया गया है। हाई कोर्ट के जस्टिस कल्याण राय सुराना की एकल पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 10 साल से अधिक समय तक एक ही स्टेशन पर रहने के बाद प्रशासनिक आधार पर किया गया ट्रांसफर केवल इसलिए अमान्य नहीं हो जाता क्योंकि उसके लिए किसी राजनीतिक जनप्रतिनिधि ने सिफारिश या नोट (U.O. Note) जारी किया था।

यह रही पीठ की टिप्पणी

पीठ ने अपने फैसले में लोक सेवकों के तबादला नियमों को रेखांकित करते हुए कहा, “यह अदालत किसी विधायक के इशारे पर किए जाने वाले तबादलों को सही नहीं ठहराती है। हालांकि, वर्तमान मामले के तथ्यों को देखते हुए, जहां याचिकाकर्ता एक ही स्थान पर 10 (दस) से अधिक वर्षों से लगातार तैनात है, वहां प्रतिवादी संख्या 4 (विधायक) द्वारा जारी अनऑफिशियल नोट (U.O. Note) को स्थानांतरण आदेश को दूषित या रद्द करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।”

मामला क्या था? (चुनाव प्रचार से इनकार बनाम 10 साल की मलाईदार पोस्टिंग)

यह मामला अरुणाचल प्रदेश के कृषि विभाग का है, जहां प्रशासनिक नियमों और राजनीतिक रंजिश के दावों के बीच कानूनी लड़ाई छिड़ी थी।

तबादला आदेश: याचिकाकर्ता अरुणाचल प्रदेश में कृषि विकास अधिकारी (Agricultural Development Officer) के पद पर कार्यरत है। उसका तबादला ऊपरी सुबनसिरी जिले के दापोरिजो (Daporijo) से अंजाव जिले के हवाई (Hawai) क्षेत्र में कर दिया गया था।

कर्मचारी का आरोप (राजनीतिक प्रतिशोध): अधिकारी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दावा किया कि यह ट्रांसफर पूरी तरह से ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ है। उसने आरोप लगाया कि 2024 के अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान एक स्थानीय विधायक ने उससे अपने पक्ष में चुनाव प्रचार करने को कहा था। जब अधिकारी ने सरकारी नियमों का हवाला देकर प्रचार करने से मना कर दिया, तो विधायक ने रंजिश के तहत विभाग पर दबाव बनाकर उसका ट्रांसफर दूरदराज के इलाके में करवा दिया।

RTI का हवाला: याचिकाकर्ता के वकील बिन्तर पिचा ने अदालत में एक आरटीआई (RTI) जवाब पेश करते हुए दलील दी कि अधिकारियों ने प्रशासनिक सूझबूझ से काम न लेकर अपनी ‘अंतरात्मा को एक राजनेता के पास गिरवी रख दिया’ है, क्योंकि इसी विधायक के कहने पर कई अन्य कर्मचारियों के भी तबादले किए गए थे। अधिकारी ने अपनी 76 वर्षीय बीमार मां और 12 वीं कक्षा में पढ़ रहे बेटे की शिक्षा का हवाला देकर मानवीय आधार पर भी राहत मांगी थी।

कोर्ट रूम एनालिसिस: ‘तबादला सेवा का हिस्सा है, कोई निहित अधिकार नहीं’

सरकार और विभाग की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने कर्मचारी का पूरा सर्विस रिकॉर्ड रखा।

नीति से पांच गुना ज्यादा समय बिताया: विभाग ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश की ट्रांसफर पॉलिसी के तहत सामान्य तौर पर किसी अधिकारी का एक स्थान पर कार्यकाल महज 2 वर्ष का होता है। इसके विपरीत, याचिकाकर्ता पिछले 10 से अधिक वर्षों से एक ही जगह (दापोरिजो) में मलाईदार पोस्टिंग पर जमा हुआ था।

विधायक का नोट केवल ट्रिगर, आधार प्रशासनिक: कोर्ट ने माना कि जब कोई कर्मचारी निर्धारित समय सीमा से पांच गुना ज्यादा वक्त एक ही जगह बिता चुका हो, तो उसका ट्रांसफर पूरी तरह न्यायसंगत है। ऐसे में विधायक का कोई अनौपचारिक नोट (U.O. Note) केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया को गति देने का जरिया हो सकता है, लेकिन वह ट्रांसफर के वैध प्रशासनिक आधार को अवैध नहीं बना सकता।

विश्लेषण: गुवाहाटी हाई कोर्ट का निर्णय मैट्रिक्स

अदालत ने साफ किया कि एक सरकारी कर्मचारी यह जिद नहीं कर सकता कि उसे उसकी पसंद की जगह पर ही तैनात रखा जाए।

मुख्य विधिक बिंदु (Key Legal Parameters)हाई कोर्ट का विधिक निष्कर्ष और निर्देश
याचिकाकर्ताकृषि विकास अधिकारी, अरुणाचल प्रदेश।
विवादित आदेशदापोरिजो से हवाई (Hawai) स्थानांतरण का प्रशासनिक आदेश।
सामान्य कार्यकाल बनाम वास्तविकनीति के तहत सामान्य कार्यकाल 2 वर्ष, जबकि याचिकाकर्ता ने बिताए 10+ वर्ष
हाई कोर्ट का अंतिम फैसलाट्रांसफर आर्डर में हस्तक्षेप करने से इनकार; याचिकाकर्ता को नई जगह ज्वाइन करने का आदेश।
मानवीय आधार पर विशेष राहतअधिकारी की वृद्ध मां की सेहत को देखते हुए कोर्ट ने उसे नई जगह ज्वाइन करने के बाद विभाग के समक्ष सहानुभूति के आधार पर (Compassionate Grounds) ऐसे स्थान पर ट्रांसफर के लिए आवेदन करने की अनुमति दी, जहां से वह 4 घंटे के भीतर अपने घर पहुंच सके।
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