Sunday, October 4, 2026
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Price Paid: उपभोक्ता फोरम का क्षेत्राधिकार भुगतान की गई राशि पर हो या मांगी गई क्षतिपूर्ति पर? आर्थिक क्षेत्राधिकार पर केंद्र से मांगा जवाब, जानिए केस

Price Paid: मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन एवं न्यायमूर्ति अरुण पल्ली
संबंधित मामलाAvon Elastomers v. Bajaj Allianz General Insurance
मूल प्रश्नउपभोक्ता फोरम का क्षेत्राधिकार भुगतान की गई कीमत (Price Paid) से तय हो या मांगी गई क्षतिपूर्ति (Compensation) से?
अगली सुनवाई8 अक्टूबर 2026

Price Paid: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उपभोक्ता अदालतों (Consumer Courts) का आर्थिक क्षेत्राधिकार (Pecuniary Jurisdiction) कैसे तय किया जाना चाहिए- क्या यह खरीदे गए सामान या सेवाओं के लिए भुगतान किए गए मूल्य (Price Paid) के आधार पर हो या फिर मांगी गई क्षतिपूर्ति (Compensation Claimed) के आधार पर।

न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन (Justice KV Viswanathan) और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (Justice Arun Palli) की पीठ ने यह आदेश एवॉन इलास्टोमर्स बनाम बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस (Avon Elastomers v. Bajaj Allianz General Insurance) मामले की सुनवाई करते हुए दिया।

Price Paid: मामले के मुख्य बिंदु और उठाई गई विसंगतियां (Anomalies)

  • 2021 की अधिसूचना पर स्पष्टीकरण
    • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उस 2021 की अधिसूचना का तर्क और कारण भी स्पष्ट करने को कहा है, जिसके द्वारा राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) के आर्थिक क्षेत्राधिकार को 10 करोड़ रुपये से घटाकर केवल 2 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
  • याचिकाकर्ता की ओर से दी गई व्यावहारिक विसंगतियां
    • उदाहरण 1 (गाड़ी का शीशा): यदि कोई व्यक्ति 2.5 करोड़ रुपये की कार खरीदता है और केवल विंडशील्ड (शीशे) में खराबी की शिकायत करता है, तो ‘भुगतान किए गए मूल्य’ के नियम के तहत उसे सीधे राष्ट्रीय आयोग (NCDRC) जाना पड़ेगा। वहीं 40 लाख रुपये एडवांस देकर कार की डिलीवरी में देरी का सामना करने वाले व्यक्ति को जिला आयोग जाना होगा।
    • उदाहरण 2 (बैंक खाते और एफडी): फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बचत खाता धारक बैंक सेवाओं के लिए तकनीकी रूप से कोई “प्रतिफल” (Consideration/Price) नहीं देते। ऐसे में सेवा में कमी की शिकायत का क्षेत्राधिकार कैसे तय होगा?
    • उदाहरण 3 (अस्पताल का इलाज): रियायती या मुफ्त इलाज पाने वाले मरीजों की शिकायतों का मूल्यांकन भुगतान की गई राशि के आधार पर कैसे किया जा सकता है?
  • प्रतिवादी और केंद्र सरकार का तर्क
    • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी ने तर्क दिया कि बीमा अनुबंधों के मामले में भुगतान किया गया प्रीमियम ही ‘प्रतिफल’ माना जा सकता है।
    • हालांकि, वकीलों ने ध्यान दिलाया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन और सरकार भी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं, जहां भुगतान किए गए मूल्य का प्रश्न ही नहीं उठता।

Price Paid: सुप्रीम कोर्ट का रुख

पीठ ने स्पष्ट किया कि ऋतु मिहिर पांचाल बनाम भारत संघ (2025) मामले में कोर्ट ने केवल प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जबकि मौजूदा मामला उन प्रावधानों के व्यावहारिक अर्थ और व्याख्या (Interpretation) से जुड़ा है।

अदालत ने केंद्र सरकार को इन सभी विसंगतियों पर विचार करने और एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी।

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