Sunday, August 30, 2026
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Safety Analysis Report: RTI से बाहर रहेगी कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा रिपोर्ट..कहा- रूस के साथ रिश्तों और देश की सिक्योरिटी का मामला

Safety Analysis Report: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की सुरक्षा से जुड़ी ‘सेफ्टी एनालिसिस रिपोर्ट’ (SAR) अब आम जनता को RTI के तहत नहीं मिलेगी।

मामला क्या है?

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमिशन (CIC) के उस पुराने आदेश को पलट दिया है, जिसमें न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) को कुडनकुलम प्लांट के यूनिट 1 और 2 की सेफ्टी एनालिसिस रिपोर्ट RTI आवेदक को सौंपने को कहा गया था। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने साफ किया कि यह रिपोर्ट ‘Fiduciary Capacity’ (विश्वास के रिश्ते) के तहत रूस के साथ शेयर की गई है, इसलिए इसे पब्लिक नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे देश के रणनीतिक हितों और विदेशी रिश्तों के लिए संवेदनशील माना है। यह पूरा विवाद करीब 16 साल पुराना है।

कोर्ट ने फैसले में क्या दलीलें दीं? (Key Takeaways)

मंजूरी: कोर्ट ने RTI एक्ट की दो मुख्य धाराओं (Sections) का हवाला देते हुए इस रिपोर्ट को सीक्रेट रखने की मंजूरी दी।

Section 8(1)(e)- भरोसे का रिश्ता: NPCIL के पास यह रिपोर्ट रशियन फेडरेशन (रूस) के साथ एक एग्रीमेंट के तहत है। कानूनन, ऐसी जानकारी को सार्वजनिक करने से छूट मिली हुई है।

Section 8(1)(a)- देश की सुरक्षा और विदेशी संबंध: कोर्ट ने कहा कि इस रिपोर्ट को डिस्क्लोज़ करने से भारत के साइंटिफिक, स्ट्रैटेजिक (रणनीतिक) और इकोनॉमिक हितों पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही रूस के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।

पब्लिक इंटरेस्ट का एंगल: कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ‘जी सुंदरराजन’ केस का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत पहले ही कुडनकुलम प्लांट की सुरक्षा चिंताओं को परख कर खारिज कर चुकी है, तो अब इस रिपोर्ट को सामने लाने में कोई बड़ा जनहित (Larger Public Interest) नजर नहीं आता।

टाइमलाइन: 2010 से अब तक क्या हुआ?

2010: जब कुडनकुलम प्लांट बन रहा था, तब RTI एक्टिविस्ट एस. पी. उदयकुमार ने इसकी साइट इवैल्यूएशन और सेफ्टी एनालिसिस रिपोर्ट मांगी थी।

2012: CIC (केंद्रीय सूचना आयोग) ने NPCIL को आदेश दिया कि डिजाइन की बेहद सीक्रेट डिटेल्स को हटाकर (Severing) बाकी रिपोर्ट आवेदक को दी जाए और वेबसाइट पर भी अपलोड की जाए।

NPCIL की आपत्ति: भारत-रूस समझौते के तहत प्लांट का डिजाइन रूस ने तैयार किया था। जब रूस की कंपनी ‘Atomstroyexport’ से पूछा गया, तो उन्होंने सुरक्षा कारणों से इस रिपोर्ट को पब्लिश करने पर सख्त ऐतराज जताया। इसके बाद NPCIL ने CIC के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

Quick Overview: कौन सी रिपोर्ट मिली, कौन सी रुकी?

रिपोर्ट का नाममौजूदा स्टेटस (Status)वजह
EIA (Environmental Impact Assessment)पब्लिक कर दी गईपर्यावरण पर असर की रिपोर्ट पहले ही शेयर की जा चुकी है।
Site Evaluation Reportवेबसाइट पर उपलब्धकेस पेंडिंग रहने के दौरान ही NPCIL ने इसे अपलोड कर दिया था।
Safety Analysis Report (SAR)RTI से बाहर (Exempted)इसमें रिएक्टर डिजाइन और सुरक्षा की वो गोपनीय जानकारियां हैं जो देश की सुरक्षा से जुड़ी हैं।

बॉटम लाइन (The Bottom Line)

इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सूचना का अधिकार (RTI) बेहद मजबूत कानून होने के बावजूद, जब बात देश की न्यूक्लियर सिक्योरिटी, परमाणु रिएक्टरों के सीक्रेट डिजाइन और रूस जैसे पुराने दोस्त के साथ इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स की आएगी, तो वहां नेशनल सिक्योरिटी को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

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