केस मैट्रिक्स: Delhi HC Ruling on Street Vendor Misleading Photos & Encroachment
Street Vendor Misleading Photos: अदालत में गलत तथ्य और भ्रामक साक्ष्य पेश करने वाले याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास दुकान लगाने वाले एक स्ट्रीट वेंडर पर ₹25,000 का जुर्माना (Costs) लगाया है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने स्पष्ट किया कि हालांकि न्यायालय वेंडरों की आजीविका की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन झूठी या तोड़-मरोड़ कर पेश की गई जानकारियों के आधार पर राहत की मांग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने वेंडिंग स्थल पर किए गए व्यापक अतिक्रमण को छुपाने के लिए जानबूझकर भ्रामक तस्वीरें दाखिल की थीं।
मामला क्या था?: उत्पीड़न का आरोप बनाम वास्तविक अतिक्रमण
- याचिकाकर्ता की दलील: हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास खाद्य पदार्थ बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया कि पुलिस और दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारी उसे शांतिपूर्वक व्यवसाय नहीं करने दे रहे हैं और उसका उत्पीड़न कर रहे हैं।
- MCD का खुलासा: एमसीडी ने अदालत के समक्ष वास्तविक स्थिति को दर्शाती तस्वीरें पेश कीं। इन तस्वीरों से साफ हुआ कि वेंडर केवल एक छोटी रेहड़ी नहीं चला रहा था, बल्कि उसने पूरे फुटपाथ पर टेबल-कुर्सियां डालकर एक बड़ा फूड आउटलेट खोल रखा था, जिससे पैदल चलने वालों का रास्ता पूरी तरह बाधित हो रहा था।
- अदालत का अवलोकन: एमसीडी के साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने खुद जो तस्वीरें कोर्ट में जमा की थीं, वे जानबूझकर इस तरह ली गई थीं ताकि टेबल-कुर्सियों और अतिक्रमण को छुपाया जा सके।
दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
प्राधिकरणों की कार्रवाई को उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता
अदालत ने कहा कि जब वेंडर खुद अपने वेंडिंग प्रमाणपत्र (CoV) की शर्तों का उल्लंघन कर रहा था, तो एमसीडी की कार्रवाई को किसी भी तरह से ‘उत्पीड़न’ नहीं ठहराया जा सकता।दिल्ली हाई कोर्ट का वक्तव्य: “याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से अदालत से वास्तविक तथ्यात्मक स्थिति को छुपाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड पर भ्रामक तस्वीरें प्रस्तुत की हैं। उपरोक्त तस्वीरें इस बात में कोई संदेह नहीं छोड़ती हैं कि याचिकाकर्ता CoV (Certificate of Vending) के नियमों और शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन कर रहा है। इसलिए, अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई को किसी भी सूरत में उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता।”
आजीविका और ईमानदारी में संतुलन
पीठ ने नोट किया कि हर याचिकाकर्ता का कर्तव्य है कि वह अदालत के सामने सही तथ्य रखे। हालांकि, वेंडर के कमजोर आर्थिक वर्ग से होने और उसके पास प्रोविज़नल वेंडिंग सर्टिफिकेट होने के कारण कोर्ट ने उसकी आजीविका पूरी तरह छीनने के बजाय उसे कड़ी शर्तों के साथ काम करने की इजाजत दी।
हाई कोर्ट द्वारा दिए गए मुख्य निर्देश
- ₹25,000 का जुर्माना: गलत साक्ष्य देने के लिए याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में ₹25,000 की राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया।
- अतिक्रमण तुरंत हटाने का आदेश: वेंडर को निर्देश दिया गया कि वह फुटपाथ से सभी अनधिकृत टेबल, कुर्सियां और निर्माण तुरंत हटाए और केवल अपने आबंटित दायरे के भीतर रहकर ही वेंडिंग करे।
- सफाई और गैस सिलेंडर संबंधी नियम: वेंडर को अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, कूड़ेदान का इस्तेमाल करने और केवल छोटे/मध्यम आकार के गैस सिलेंडर का उपयोग करने का आदेश दिया गया।
- MCD निरीक्षण: एमसीडी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे 26 जुलाई 2026 को मौके का निरीक्षण करें। यदि वेंडर CoV की शर्तों का पूरी तरह पालन करता पाया जाता है, तो ही उसे शांतिपूर्वक दुकान चलाने की अनुमति दी जाएगी।

