Wilful Conduct: कोलकात्ता हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और आईपीसी की धारा 498ए (Section 498A IPC – घरेलू प्रताड़ना) के मामलों पर एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या की है।
पति के दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई
हाई कोर्ट की जस्टिस चैताली चटर्जी दास की एकल पीठ ने पति द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, पति के परिवार के सदस्यों को उसके अपने घर लाना, उनके बच्चों की शिक्षा की देखभाल करना, रिश्तेदारों का इलाज कराना या छोटे-मोटे झगड़े होना—इन बातों को आईपीसी की धारा 498ए में परिभाषित ‘क्रूरता’ या किसी ऐसे जानबूझकर किए गए आचरण (Wilful Conduct) के समकक्ष नहीं माना जा सकता, जो किसी महिला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दे।
पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इंकार
अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति का अपने रिश्तेदारों को घर पर लाना, उनके बच्चों की पढ़ाई या इलाज में मदद करना और पत्नी से उनके सहयोग की अपेक्षा करना या मामूली पारिवारिक झगड़े, कानूनन पत्नी के प्रति ‘क्रूरता’ के दायरे में नहीं आते। हालांकि, इस विधिक टिप्पणी के बावजूद, हाई कोर्ट ने पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द (Quash) करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा लगाए गए अन्य गंभीर प्रताड़ना के आरोपों की सच्चाई का फैसला ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) में ही होगा, हाई कोर्ट केस के इस चरण में गवाहों के बयानों का मिनी-ट्रायल (संक्षिप्त सुनवाई) नहीं कर सकता।
मामला क्या था? (2002 में हुई शादी और 2021 में अलग हुए पति-पत्नी)
वैवाहिक पृष्ठभूमि: यह कानूनी लड़ाई साल्ट लेक और न्यू टाउन (कोलकाता) में रहने वाले एक उच्च शिक्षित दंपत्ति के बीच चल रही है। याचिकाकर्ता (पति) और प्रतिवादी (पत्नी) का विवाह साल 2002 में एक अरेंज्ड मैरिज के जरिए हुआ था। उनका एक बेटा है जिसकी उम्र 12 वर्ष से अधिक है। शादी के बाद दोनों बेलघोरिया और साल्ट लेक में रहे, बाद में पति ने समवेता में एक फ्लैट खरीदा।
पति के आरोप (अनैतिक व्यवहार): पति का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों से उसकी पत्नी उसके साथ दुर्व्यवहार, शारीरिक मारपीट और मानसिक प्रताड़ना कर रही थी। बेटे के सामने इस व्यवहार को रोकने के अनुरोध के बाद भी जब स्थिति नहीं सुधरी, तो तंग आकर पति ने नवंबर 2021 में घर छोड़ दिया और न्यू टाउन में किराए पर रहने लगा। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी फोन पर झूठे केस की धमकी देकर पैसे मांगती थी और उसे बदनाम करने के लिए उसके ऑफिस (नियोक्ता) को पत्र लिखकर सैलरी की डिटेल मांगी थी।
पत्नी के आरोप (भरण-पोषण न देना और प्रताड़ना): दूसरी ओर, पेशे से स्कूल शिक्षिका पत्नी का आरोप है कि पति 2018 से ही उसे प्रताड़ित कर रहा था। 1 मार्च 2022 को पति ने बेटे के सामने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की, जिसके बाद 3 मार्च 2022 को उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद पति के खिलाफ धारा 498 ए के तहत चार्जशीट दाखिल की, जिस पर जून 2022 में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान (Cognizance) लिया।
कोर्ट रूम एनालिसिस: रिश्तेदारों को घर लाना बनाम ‘गंभीर मानसिक उत्पीड़न’
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं, जिससे केस की उलझी हुई कड़ियां सामने आईं।
पति का पक्ष (Adv. अनिर्बान दत्ता और द्युतिमान पॉल): वकीलों ने दलील दी कि यह केस केवल पति से बदला लेने और उसे परेशान करने के लिए दर्ज कराया गया है। दोनों पक्ष बेहद शिक्षित हैं और उनके बीच तलाक का मुकदमा पहले से लंबित है, इसलिए इस आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जाना चाहिए।
पत्नी का पक्ष (Adv. सत्यम मुखर्जी और पुरेंदु शेखर घोष): उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने गहन जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की है, जिससे प्रथम दृष्टया (Prima Facie) अपराध साबित होता है। पति अक्सर फ्लैट में घुसकर गाली-गलौज करता था और उसने पत्नी व बच्चे का भरण-पोषण (Maintenance) देना बंद कर दिया था, जिसके कारण उन्हें ऑफिस से इनकम डिटेल मांगनी पड़ी।
रिश्तेदारों से जुड़ी शिकायत: पत्नी की मुख्य शिकायतों में से एक यह भी थी कि पति लगातार अपने कई रिश्तेदारों को इलाज और बच्चों की पढ़ाई के लिए उनके फ्लैट पर लाता था, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पत्नी पर डाल दी जाती थी। यहां तक कि एक बार एक रिश्तेदार की त्वचा की बीमारी (Skin Disease) के बढ़ने के लिए भी पत्नी को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया था।
विश्लेषण: धारा 498A और हाई कोर्ट की अंतर्निहित शक्तियां (Section 482 CrPC)
अदालत ने रिश्तेदारों को घर लाने को तो क्रूरता नहीं माना, लेकिन पत्नी द्वारा लगाए गए अन्य प्रताड़ना के आरोपों और पुलिस चार्जशीट को देखते हुए केस को बंद करने से मना कर दिया।
| विधिक मानक / कानून की धारा | कलकत्ता हाई कोर्ट की विधिक व्याख्या |
| धारा 498A IPC (क्रूरता की परिभाषा) | कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रूरता केवल शारीरिक मारपीट नहीं होती; ‘मानसिक उत्पीड़न’ (Manual/Mental Harassment) भी इसके दायरे में आता है। लेकिन वह उत्पीड़न इस स्तर का होना चाहिए जो महिला को गंभीर कदम उठाने पर मजबूर करे। |
| धारा 482 CrPC (केस रद्द करने की शक्ति) | कोर्ट ने साफ किया कि धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हाई कोर्ट ‘मिनी-ट्रायल’ (Mini-Trial) नहीं चला सकता। गवाहों के बयान सही हैं या गलत, इसका फैसला केवल निचली अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा। |
| भरण-पोषण (Maintenance) का मुद्दा | कोर्ट ने माना कि पत्नी की एक मुख्य शिकायत यह है कि पति उसे और बच्चे को पैसे नहीं दे रहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पत्नी इस दावे को उचित कानूनी फोरम (फैमिली कोर्ट) के समक्ष उठाए। |
| अंतिम निर्णय | पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा; केस रद्द करने की याचिका खारिज। |

