Sunday, November 1, 2026
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Winding Up District Consumer Forums: 1,000 से कम पेंडिंग केस वाले राज्य कर सकेंगे जिला उपभोक्ता आयोगों का विलय…मिली सुप्रीम अनुमति

केस मैट्रिक्स: Supreme Court Ruling on Winding Up District Consumer Forums

पहलूविवरण
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना
मुख्य निर्णय1,000 से कम पेंडिंग केस वाले राज्य हाई कोर्ट की मंजूरी से जिला उपभोक्ता मंचों को बंद कर न्यायिक अधिकारियों को मामले सौंप सकते हैं।
अन्य निर्देशवेतन सुरक्षा नियमों में संशोधन न करने वाले राज्यों को सख्त चेतावनी; अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश।
अगली सुनवाई13 अगस्त 2026

Winding Up District Consumer Forums: देश भर में उपभोक्ता आयोगों (Consumer Commissions) के कामकाज को सुव्यवस्थित करने की अपनी चल रही कवायद के तहत सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा निर्देश जारी किया है।

यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 22 जुलाई को पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों में उपभोक्ता विवादों के कुल लंबित मामलों की संख्या 1,000 से कम है, वे संबंधित उच्च न्यायालय की मंजूरी से कुछ जिला उपभोक्ता मंचों (District Forums) को समाप्त कर सकते हैं और उन मामलों को सेवारत न्यायिक अधिकारियों को सौंप सकते हैं।

मामला क्या था?: छोटे राज्यों में कम पेंडेंसी और वित्तीय व्यवहार्यता

  • फरवरी का आदेश: इससे पहले 11 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया था कि अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा, मिजोरम,मणिपुर, गोवा और लक्षद्वीप व अंडमान-निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में उपभोक्ता मामलों की पेंडेंसी बेहद कम (महज कुछ दर्जन) है, जिससे वहां अलग से उपभोक्ता आयोग चलाना वित्तीय रूप से व्यावहारिक (Financially Viable) नहीं है।
  • वैकल्पिक व्यवस्था: अदालत ने तब निर्देश दिया था कि कम मामलों वाले राज्यों में पेंडिंग मामलों को संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास ट्रांसफर किया जाए, जहां हाई कोर्ट का एक सिंगल जज और तकनीकी सदस्य मिलकर ‘डीम्ड स्टेट कमीशन’ के रूप में मामलों की सुनवाई करें।
  • 22 जुलाई का स्पष्टीकरण: अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन राज्यों में कुल पेंडेंसी 1,000 मामलों से कम है, वे चाहें तो कुछ जिला मंचों को समाप्त कर सकते हैं और उनके मुकदमों की सुनवाई स्थानीय न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से करा सकते हैं, बशर्ते इसके लिए संबंधित उच्च न्यायालय की पूर्व सहमति (Prior Concurrence) ली गई हो।

सर्वोच्च न्यायालय की अन्य मुख्य निर्देश और टिप्पणियां

वेतन सुरक्षा और नियमों में संशोधन पर नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों को कड़ी फटकार लगाई जिन्होंने उसके पिछले आदेशों का पालन नहीं किया है। अदालत ने निर्देश दिया था कि उपभोक्ता आयोगों में नियुक्त अधिकारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए।

  • अदालत ने पाया कि केवल आंध्र प्रदेश और गुजरात ने ही अपने नियमों में संशोधन किया है।
  • अन्य राज्यों द्वारा नियमों में संशोधन न करने या आदेश में संशोधन की मांग वाली अर्जियों पर कोर्ट ने दो हफ्ते का समय दिया है।

एमिकस क्यूरी को जानकारी देने का निर्देश

अदालत ने पाया कि कुछ राज्यों ने अभी तक अदालत द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) को उपभोक्ता आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तों से जुड़ी जानकारी नहीं सौंपी है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि तय समयसीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट न देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई

  • अगली तिथि: इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 को होगी।
  • इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता किरण सूरी (उत्तर प्रदेश जिला उपभोक्ता फोरम के चार सेवानिवृत्त सदस्यों की ओर से) और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन (एमिकस क्यूरी के रूप में) ने पैरवी की।

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