विवाद की पृष्ठभूमि: JAO बनाम FAO (Faceless Assessment)
- फेसलेस असेसमेंट व्यवस्था: केंद्र सरकार ने 2021 में आयकर अधिनियम की धारा 148 और 148A के तहत कर पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय फेसलेस मूल्यांकन केंद्र (National Faceless Assessment Centre – NFAC) के माध्यम से नोटिस जारी करना अनिवार्य किया था।
- JAO द्वारा जारी नोटिस पर अदालती रोक: इसके बावजूद कई मामलों में स्थानीय क्षेत्राधिकार अधिकारियों (JAOs) ने खुद नोटिस (Section 148/148A) जारी कर दिए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (तेज प्रताप सिंह केस) सहित कई उच्च न्यायालयों ने ऐसे नोटिसों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इन्हें केवल फेसलेस तंत्र के जरिए ही जारी किया जा सकता था।
- संसद द्वारा धारा 147A को जोड़ना: हाईकोर्ट के फैसलों को पलटने और JAO द्वारा जारी सभी पुराने नोटिसों को कानूनी वैधता देने के उद्देश्य से संसद ने 1 अप्रैल 2021 से भूतलक्षी प्रभाव से धारा 147A शामिल की। इसमें स्पष्ट किया गया कि धारा 148 और 148A के प्रयोजनों के लिए “मूल्यांकन अधिकारी” में NFAC के अलावा अन्य अधिकारी (JAO) शामिल होंगे।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और हाईकोर्ट का अंतिम फैसला: जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो शीर्ष अदालत ने नई धारा 147A की संवैधानिक वैधता को परखने के लिए याचिकाएं वापस संबंधित उच्च न्यायालयों में भेज दीं। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संसद के इस भूतलक्षी संशोधन को असंवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है।
इस फैसले के क्या होंगे परिणाम?
- करदाताओं को राहत: जिन करदाताओं को Faceless प्रणाली के बजाय सीधे स्थानीय JAO द्वारा पुनर्मूल्यांकन नोटिस भेजे गए थे, वे अब इस फैसले के आधार पर उन नोटिसों को चुनौती दे सकते हैं।
- अदालती आदेशों को अध्यादेश/कानून से बदलने पर सीमा: हाईकोर्ट का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सरकार भूतलक्षी संशोधन के माध्यम से न्यायिक फैसलों के कानूनी आधार को मनमाने ढंग से नहीं बदल सकती।
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) में हाल ही में जोड़ी गई धारा 147A (Section 147A) की संवैधानिक वैधता को खारिज करते हुए इसे असंवैधानिक (Unconstitutional) घोषित कर दिया है।
न्यायमूर्ति दीपक सिबल और न्यायमूर्ति रूपिंदरजीत चहल की खंडपीठ ने आज इस बहुप्रतीक्षित मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। फैसले का विस्तृत आदेश शीघ्र ही जारी किया जाएगा। यह धारा 1 अप्रैल 2021 से भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य क्षेत्राधिकार मूल्यांकन अधिकारियों (JAO – Jurisdictional Assessing Officers) द्वारा जारी किए गए री-असेसमेंट नोटिसों को वैधानिक मान्यता देना और हाईकोर्ट के फैसलों को निष्प्रभावी करना था।
विवाद की जड़: JAO बनाम Faceless (FAO) क्षेत्राधिकार विवाद
- 2021 की फेसलेस मूल्यांकन व्यवस्था: वर्ष 2021 में वित्त अधिनियम के जरिए आयकर की पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) प्रक्रिया में बड़ा सुधार करते हुए धारा 144B के तहत ‘नेशनल फेसलेस असेसमेंट सेंटर’ (NaFAC) की स्थापना की गई थी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, मानव-हस्तक्षेप रहित और फेसलेस (Faceless) हो सके।
- JAO द्वारा नोटिस जारी करने पर अदालतों का रुख: इसके बावजूद कई मामलों में स्थानीय क्षेत्राधिकार अधिकारियों (JAOs) ने धारा 148A(d) के आदेश और धारा 148 के नोटिस सीधे जारी करना जारी रखा।
- तेज प्रताप सिंह फैसला: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आयकर अधिकारी, वार्ड 2(1), चंडीगढ़ एवं अन्य बनाम तेज प्रताप सिंह मामले में JAO द्वारा जारी किए गए सभी री-असेसमेंट नोटिसों को यह कहते हुए रद्द (Quash) कर दिया था कि वे अनिवार्य फेसलेस व्यवस्था का उल्लंघन करते हैं। बॉम्बे, तेलंगाना और अन्य हाईकोर्ट्स ने भी इसी तरह के आदेश पारित किए थे।
धारा 147A का सम्मिलन और विधायी हस्तक्षेप
- सुप्रीम कोर्ट में अपीलें और नया कानून: जब आयकर विभाग की अपीलें हाईकोर्ट के इन प्रतिकूल फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित थीं, तब संसद ने अधिनियम में धारा 147A को 1 अप्रैल 2021 से भूतलक्षी प्रभाव से जोड़ दिया।
- प्रावधान का उद्देश्य: धारा 147A में स्पष्ट किया गया कि धारा 148 और 148A के प्रयोजनों के लिए “मूल्यांकन अधिकारी” (Assessing Officer) का अर्थ नेशनल फेसलेस असेसमेंट सेंटर के अलावा अन्य मूल्यांकन अधिकारी (यानी JAO) भी होगा। इसका उद्देश्य हाईकोर्ट्स द्वारा रद्द किए गए हजारों नोटिसों को पूर्वव्यापी प्रभाव से वैध ठहराना था।
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिमांड: धारा 147A के लागू होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अपीलों को संबंधित उच्च न्यायालयों को वापस भेज (Remand) दिया था और करदाताओं को धारा 147A की संवैधानिक वैधता को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती देने की छूट दी थी।
हाईकोर्ट के फैसले का कानूनी प्रभाव
- भूतलक्षी वैधीकरण खारिज: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा धारा 147A को असंवैधानिक ठहराए जाने से संसद द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से न्यायिक फैसलों के प्रभाव को मिटाने की कवायद को बड़ा झटका लगा है।
- हजारों नोटिसों पर असर: इस फैसले के बाद पंजाब और हरियाणा क्षेत्र में 1 अप्रैल 2021 के बाद JAO द्वारा बिना फेसलेस प्रक्रिया का पालन किए जारी किए गए सभी री-असेसमेंट नोटिस और आदेश एक बार फिर अवैध और निरस्त होने की कगार पर आ गए हैं।
विधिक विवरण
- प्रासंगिक वैधानिक प्रावधान: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 147A, 148, 148A एवं 144B
- पीठ: न्यायमूर्ति दीपक सिबल और न्यायमूर्ति रूपिंदरजीत चहल
- फैसले की स्थिति: धारा 147A निरस्त/असंवैधानिक घोषित (विस्तृत आदेश प्रतीक्षारत)
Income Tax Act: मामले का विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय |
| पीठासीन पीठ | न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल और न्यायमूर्ति रुपिंदरजीत चहल |
| विवादित धारा | आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 147A (Section 147A) |
| लागू करने की तिथि | 1 अप्रैल 2021 से भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective) |
| मुख्य विवाद | क्या बिना चेहरा पहचान प्रणाली (Faceless Assessment Centre) के सीधे JAO द्वारा जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस वैध हैं? |
| कोर्ट का निर्णय | धारा 147A असंवैधानिक घोषित और रद्द। |

