Tuesday, October 27, 2026
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Technical Glitches: अदालत का कीमती न्यायिक समय आईटी विंग की अकर्मण्यता से बर्बाद हो रहा है; नई वेबसाइट काम नहीं कर रही, होगा ऑडिट

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश

  • मुख्य न्यायाधीश से कार्रवाई का अनुरोध: पीठ ने कहा:“हाईकोर्ट की वेबसाइट e-hearing का समर्थन नहीं कर रही है। IT कर्मचारियों की अक्षमता के कारण हमारा न्यायिक समय बर्बाद हुआ है। माननीय मुख्य न्यायाधीश संबंधित IT कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।”
  • 7 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट: रजिस्ट्रार (ITCS/A) के.एस. कुशवाहा को निर्देश दिया गया कि वे इस बात की विस्तृत जांच करें कि हाईकोर्ट के काम में बाधा क्यों आ रही है और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर पीठ को सौंपें।
  • 30 दिनों में स्वतंत्र थर्ड-पार्टी IT ऑडिट: अदालत ने निर्देश दिया कि TCS, Infosys या L&T Technology Services जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम से हाईकोर्ट के IT सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। इस टीम में भारत सरकार के C-DOT और NASSCOM के अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है। यह ऑडिट रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर कोर्ट को सौंपी जाएगी।

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी नई वेबसाइट में लगातार आ रही तकनीकी गड़बड़ियों (Glitches) और इसके कारण ई-हियरिंग (वर्चुअल सुनवाई) बाधित होने पर अपनी ही सूचना प्रौद्योगिकी (IT) शाखा को कड़ी फटकार लगाई है।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने 8 सितंबर 2026 को एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान यह कड़ा आदेश पारित किया। अदालत ने इसे आईटी कर्मियों की गंभीर अक्षमता (Incompetency) मानते हुए मुख्य न्यायाधीश को संबंधित आईटी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) या एलएंडटी (L&T) जैसी शीर्ष आईटी कंपनियों की विशेषज्ञ टीम से पूरे सिस्टम का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां और आदेश

1. न्यायिक समय की बर्बादी और कर्मचारियों पर कार्रवाई पीठ ने वेबसाइट की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आदेश में दर्ज किया: “हाईकोर्ट की वेबसाइट ई-हियरिंग (e-hearing) को सपोर्ट नहीं कर रही है और इसमें कई तकनीकी खामियां हैं। आईटी स्टाफ की अक्षमता के कारण न्यायालय का बहुमूल्य न्यायिक समय बर्बाद हुआ है, जिसे हम अत्यंत गंभीरता से लेते हैं। माननीय मुख्य न्यायाधीश संबंधित दोषी आईटी कर्मचारियों के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई करें।”

2. वकीलों की शिकायत और कोर्ट में लाइव टेस्टिंग

  • खुली अदालत में वकीलों की परेशानी: सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने खुली अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि नई वेबसाइट बिल्कुल काम नहीं कर रही है और इससे बेहतर पुरानी वेबसाइट ही थी।
  • रजिस्ट्रार (IT) के सामने हैंगिंग और बफरिंग: पीठ ने रजिस्ट्रार (ITCSA) के.एस. कुशवाहा को अदालत में तलब किया। उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति में जब वेबसाइट चलाकर जांची गई, तो सिस्टम लगातार बफरिंग और हैंग हो रहा था।
  • 15 दिन बाद भी स्थिति जस की तस: अदालत ने रेखांकित किया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा 25-26 अगस्त को जजों के ग्रुप में संदेश भेजा गया था कि वेबसाइट अपडेशन में 8 दिन लगेंगे, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति संतोषजनक नहीं हुई।

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हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मुख्य निर्देश

  1. 7 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट: रजिस्ट्रार (IT) के.एस. कुशवाहा को निर्देश दिया गया कि वे हाईकोर्ट के सुचारू कामकाज में आ रही बाधाओं की विस्तृत आंतरिक जांच करें और 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि दोषी कौन हैं।
  2. TCS / Infosys / L&T से 30 दिनों में स्वतंत्र आईटी ऑडिट: अदालत ने निर्देश दिया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूरे आईटी सिस्टम की स्वतंत्र जांच और ऑडिट के लिए Tata Consultancy Services (TCS), Infosys या L&T Technology Services जैसी प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम नियुक्त की जाए। यह थर्ड पार्टी ऑडिट 30 दिनों के भीतर पूरा कर रिपोर्ट पीठ के समक्ष पेश की जाएगी।
  3. C-DOT और NASSCOM के अधिकारी भी शामिल: अदालत ने स्पष्ट किया कि इस ऑडिट टीम में केंद्र सरकार के ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स’ (C-DOT) और नैसकॉम (NASSCOM) के तकनीकी अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।

विधिक विवरण

  • प्रासंगिक संदर्भ: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ई-कोर्ट और ई-हियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कार्यप्रणाली
  • पीठ: न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह
  • आदेश की तारीख: 8 सितंबर 2026

Technical Glitches: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court)
पीठासीन पीठन्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह
मुख्य मुद्दानई वेबसाइट और e-Hearing पोर्टल का सही ढंग से काम न करना, बफरिंग और हैंग होना।
मुख्य आदेशमुख्य न्यायाधीश से दोषी IT स्टाफ पर कार्रवाई की सिफारिश; 7 दिन में जांच रिपोर्ट और 30 दिन में थर्ड-पार्टी IT ऑडिट।
ऑडिट एजेंसियांTCS / Infosys / L&T Technology Services, C-DOT और NASSCOM
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