Wednesday, September 30, 2026
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Property Partition: मालिक की मृत्यु के बाद कैसे होगा संपत्ति का बंटवारा?…विधि परामर्शी की कलम से कानूनी वारिसों के लिए ए-टू-जेड गाइड, जानिए

Property Partition: जब किसी संपत्ति के मालिक की मृत्यु बिना वसीयत छोड़े हो जाती है, तो संपत्ति का कानूनी रूप से विभाजन (Partition) करना उत्तराधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया बन जाती है। यह प्रक्रिया आपसी सहमति से या अदालती हस्तक्षेप के माध्यम से पूरी की जा सकती है। सिविल कानून के विधि विशेषज्ञ व भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के एचओडी डॉ. राजेश कुमार तिवारी ने संपत्ति विभाजन की प्रक्रिया और कानूनी चरणों का विस्तृत विवरण दिया। विशेषज्ञ के अनुसार, संपत्ति बंटवारा को लेकर बढ़ते जा रहे केस को देखते हुए आम लोगों को प्रारंभिक जानकारी बेहद ही आवश्यक है।

संपत्ति विभाजन के दो मुख्य मार्ग

मार्गविवरणप्रक्रिया
आपसी विभाजन (Mutual Partition)जब सभी उत्तराधिकारी संपत्ति के बंटवारे पर सहमत हों।एक ‘विभाजन विलेख’ (Partition Deed) तैयार किया जाता है और उसे सब-रजिस्ट्रार के पास पंजीकृत (Register) कराया जाता है।
न्यायालय द्वारा विभाजन (Court-Mandated)जब उत्तराधिकारियों के बीच सहमति न बन पाए।कोई भी एक उत्तराधिकारी सिविल कोर्ट में ‘विभाजन का मुकदमा’ (Partition Suit) दायर कर सकता है। कोर्ट पहले प्रारंभिक डिक्री (Preliminary Decree) और फिर अंतिम डिक्री (Final Decree) जारी करता है।

विभाजन के बाद ‘दाखिल-खारिज’ (Mutation) की भूमिका

  • विभाजन डीड पंजीकृत होने या कोर्ट का आदेश आने के बाद, सबसे महत्वपूर्ण कदम स्थानीय राजस्व विभाग (जैसे तहसील) में म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराना है।
  • 7/12 उतारा/खतौनी: राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिकों के नाम दर्ज किए जाते हैं।
  • महत्व: म्यूटेशन मालिकाना हक (Title) का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह संपत्ति कर (Property Tax) भरने और बिजली/पानी जैसे कनेक्शन लेने के लिए अनिवार्य है।
  • प्रक्रिया: तहसीलदार या पटवारी के पास विभाजन डीड, मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र (Heirship Certificate) के साथ आवेदन करना होता है।

वसीयत (Will) का प्रभाव

  • यदि मालिक ने एक पंजीकृत वसीयत छोड़ी है, तो विभाजन प्रक्रिया बहुत आसान हो जाती है।
  • वसीयत की सर्वोच्चता: वसीयत सामान्य उत्तराधिकार कानूनों (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम) से ऊपर मानी जाती है। संपत्ति उसी तरह बंटेगी जैसा वसीयत में लिखा है।
  • प्रोबेट (Probate): कुछ शहरों (जैसे मुंबई, कोलकाता, चेन्नई) में वसीयत को कोर्ट से प्रमाणित (Probate) कराना जरूरी होता है, जो विभाजन को कानूनी रूप से पुख्ता बनाता है।

यदि मालिक बंटवारा नहीं चाहता?

  • यदि संपत्ति का मालिक चाहता है कि उसकी मृत्यु के बाद परिवार के बीच संपत्ति के टुकड़े न हों, तो वह निम्नलिखित कदम उठा सकता है।
  • एकल उत्तराधिकारी: वसीयत में पूरी संपत्ति किसी एक व्यक्ति या ट्रस्ट के नाम करना।
  • प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट: ‘इंडियन ट्रस्ट एक्ट, 1882’ के तहत एक ट्रस्ट बनाकर संपत्ति उसे सौंपना। इसमें उत्तराधिकारी ‘लाभार्थी’ (Beneficiaries) होते हैं, लेकिन वे संपत्ति का भौतिक बंटवारा या बिक्री नहीं कर सकते।
  • गिफ्ट डीड (Gift Deed): अपने जीवनकाल में ही संपत्ति किसी एक वारिस के नाम कर देना।

विवादों से बचने के लिए सुझाव

  • कानूनी वारिस प्रमाण पत्र: सबसे पहले आधिकारिक ‘Succession Certificate’ या ‘Legal Heir Certificate’ बनवाएं।
  • पारिवारिक समझौता (Family Settlement): कोर्ट जाने से पहले एक ‘फैमिली सेटलमेंट डीड’ बनाना बेहतर होता है, जिसमें कम स्टैंप ड्यूटी लगती है और यह कोर्ट के मुकदमे से बचाता है।
  • भार-मुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate): सुनिश्चित करें कि संपत्ति पर कोई बकाया कर्ज न हो।
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