Saturday, August 15, 2026
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Blackbuck Case: सलमान खान के काले हिरण केस में एक आरोपी की याचिका…हेबियस कॉर्पस की मांग पर यह है कानून का निर्देश, ध्यान से पढ़ें

Blackbuck Case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने काले हिरण (Blackbuck) और चिंकारा के शिकार मामले में आरोपी एक व्यक्ति की ‘हेबियस कॉर्पस’ (Habeas Corpus – बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को खारिज कर दिया है।

आरोपी सबाह अंतुले की याचिका पर सुनवाई

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की पीठ ने आरोपी सबाह अंतुले की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी आरोपी की जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी हो और वह न्यायिक आदेश के तहत जेल में हो, तो उसे “अवैध हिरासत” नहीं माना जा सकता। यह मामला 2024 में शुरू हुई वन्यजीव शिकार की एक बड़ी जांच से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सबाह अंतुले ने दावा किया था कि उसे अधिकारियों ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है, जबकि अभियोजन पक्ष के पास उसके खिलाफ पुख्ता डिजिटल सबूत थे।

वीडियो क्लिप बना मुख्य आधार

  • अदालत ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य का उल्लेख किया।
  • पुख्ता सबूत: 6 फरवरी, 2026 के एक पिछले आदेश का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक वीडियो क्लिप में दो मृत काले हिरणों के साथ दिखाई दे रहा था।
  • कानूनी प्रक्रिया: कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी के बाद सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है, इसलिए इसे हेबियस कॉर्पस (जो केवल अवैध रूप से गायब या बंद व्यक्ति के लिए होती है) का मामला नहीं माना जा सकता।

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मामले की पृष्ठभूमि: 64 किलो मांस बरामद

  • अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला काफी गंभीर है।
  • दिसंबर 2024: तीन अन्य आरोपियों (सलमान, इम्तियाज और जोहर हुसैन) को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से 64.70 किलोग्राम जंगली मांस (काले हिरण और चिंकारा), एक देसी पिस्तौल, कारतूस और एक वाहन बरामद हुआ था।
  • कड़ी से कड़ी जुड़ी: गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर वर्तमान याचिकाकर्ता (सबाह) को अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया गया।
  • जमानत खारिज: आरोपी ने पहले नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे हाई कोर्ट ने 26 फरवरी, 2026 को खारिज कर दिया था।

अवैध गिरफ्तारी के दावों को नकारा

  • याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल से कुछ भी बरामद नहीं हुआ है और उसे गिरफ्तारी के कारण (Grounds of Arrest) नहीं बताए गए। हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
  • न्यायिक आदेश का सम्मान: कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि आरोपी एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत कस्टडी में है, इसलिए इसे ‘अवैध’ नहीं कहा जा सकता।
  • निचली अदालत का विकल्प: हाई कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट के सामने अपने सभी पक्ष रख सकता है, लेकिन हेबियस कॉर्पस याचिका के जरिए राहत नहीं पा सकता।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
आरोपीसबाह अंतुले (शिकार का आरोपी)।
मुख्य साक्ष्यमृत काले हिरणों के साथ आरोपी का वीडियो क्लिप।
कोर्ट का फैसलाहेबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
कानूनी स्थितिन्यायिक हिरासत में होना अवैध हिरासत नहीं है।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीरता

यह फैसला दर्शाता है कि वन्यजीवों के शिकार जैसे गंभीर मामलों में तकनीकी आधार पर राहत पाना आसान नहीं है, खासकर तब जब आरोपी के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (वीडियो) मौजूद हों। ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ याचिका का उपयोग न्यायिक प्रक्रियाओं को चुनौती देने के लिए नहीं किया जा सकता यदि गिरफ्तारी कानून सम्मत आदेश के तहत हुई हो।

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