Wednesday, May 13, 2026
HomeDelhi High CourtRepeated Taunts: तुम्हारे बाप ने बड़ी गाड़ी देने की बात की थी...

Repeated Taunts: तुम्हारे बाप ने बड़ी गाड़ी देने की बात की थी लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए…देखिए दहेज के इस ताने पर क्या रहा फैसला

Repeated Taunts: दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक क्रूरता और दहेज उत्पीड़न के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का निष्कर्ष / निर्देश
मुख्य आरोप‘छोटी कार’ और ‘कम सोना’ लाने के लिए बार-बार ताने देना।
कोर्ट का आदेशपति के खिलाफ धारा 498A (क्रूरता) के तहत आरोप तय किए जाएं।
सत्र न्यायालय की गलतीतानों को “सामान्य” माना और पति के व्यवहार के बारे में व्यक्तिगत धारणा बनाई।
धारा 304B का रुख“मौत से ठीक पहले” प्रताड़ना का लिंक न होने के कारण इस आरोप से मुक्त रखा।

महिला की शादी के महज 10 महीने के भीतर हुई संदिग्ध मौत

हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने सत्र न्यायालय (Sessions Court) के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें पति को इन आरोपों से मुक्त (Discharge) कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृतका को “छोटी कार” और “कम सोना” लाने के लिए बार-बार ताने देना केवल “सामान्य टिप्पणी” नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 498A (दहेज उत्पीड़न) के तहत आरोप तय (Framing of Charge) करने के लिए ये ताने पर्याप्त आधार हैं। यह मामला एक महिला की शादी के महज 10 महीने के भीतर हुई संदिग्ध मौत से जुड़ा है। मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि शादी में 30-35 लाख रुपये खर्च करने और कार के लिए 6 लाख रुपये देने के बावजूद, उनके दामाद और ससुराल वाले उनकी बेटी को लगातार प्रताड़ित करते थे।

Also Read; Dowry Death Ruling: केवल शादी के 7 साल के भीतर दहेज उत्पीड़न से होनेवाली मौत…यह सजा का आधार नहीं बनेगा, पढ़ें पूरा मामला

सामान्य टिप्पणी नहीं, बल्कि ‘उत्पीड़न’ है

  • हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय के इस निष्कर्ष से असहमति जताई कि ये केवल मामूली ताने थे।
  • बार-बार प्रताड़ना: “तुम्हारे बाप ने बड़ी गाड़ी देने की बात की थी लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए”— इस तरह के बार-बार दिए जाने वाले ताने सीधे तौर पर दहेज की मांग से जुड़े उत्पीड़न को दर्शाते हैं।
  • ट्रायल का विषय: कोर्ट ने कहा कि ये आरोप सही हैं या गलत, यह मुकदमे (Trial) के दौरान तय होगा। लेकिन आरोप तय करने के चरण में, यदि इन बयानों को सही माना जाए, तो यह स्पष्ट रूप से 498A का मामला बनता है।

सत्र न्यायालय की “धारणा” पर सवाल

  • हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें पति को इसलिए “सज्जन” मान लिया गया था क्योंकि उसने अपने बच्चों की देखभाल के लिए दूसरी शादी की थी।
  • रिश्ते की हकीकत: कोर्ट ने कहा कि शादी करने का कारण (जैसे बच्चों की देखभाल) अपने आप में वैवाहिक जीवन के भीतर क्रूरता या उत्पीड़न की संभावना को खारिज नहीं करता है। जज को ऐसी धारणाओं के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए।

धारा 304B (दहेज हत्या) और धारा 498A में अंतर

  • अदालत ने कानून की सूक्ष्म व्याख्या करते हुए पति को आंशिक राहत भी दी।
  • धारा 498A (बहाल): चूंकि दहेज के लिए मानसिक क्रूरता और तानों के विशिष्ट आरोप थे, इसलिए पति पर इस धारा के तहत मुकदमा चलेगा।
  • धारा 304B (हटा दी गई): कोर्ट ने पाया कि मौत से “ठीक पहले” (Soon before death) दहेज के लिए उत्पीड़न का कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जो दहेज हत्या के आरोप के लिए अनिवार्य है। साथ ही, घटना के समय पति अपनी आधिकारिक ड्यूटी पर था।

महिलाओं की गरिमा का संरक्षण

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि दहेज से जुड़े मानसिक उत्पीड़न को हल्का न माना जाए। “ताने देना” केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक महिला के मानसिक स्वास्थ्य और गरिमा पर गहरा प्रहार है। अदालत ने साफ कर दिया है कि शुरुआती चरण में ऐसे गंभीर आरोपों को खारिज करना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
34 ° C
34 °
34 °
55 %
3.6kmh
20 %
Wed
40 °
Thu
43 °
Fri
42 °
Sat
41 °
Sun
43 °

Recent Comments