Thursday, June 18, 2026
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Mariyamman Temple: मंदिर के पास चर्च निर्माण का बहुसंख्यक हिंदू विरोध करें, तो प्रशासन को सुनना होगा…ऐसा क्यों कहा गया, जानिए यहां

Mariyamman Temple: मद्रास हाईकोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता, जनसांख्यिकी और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ (Public Order) के मध्य संतुलन स्थापित करते हुए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश (Interim Order) पारित किया है।

विशाल चर्च के निर्माण पर रोक लगा दी

हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने कलपट्टी (कोयंबटूर) निवासी एन. बालासुब्रमण्यम द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में 100 साल पुराने मारियम्मन मंदिर (Mariyamman Temple) के ठीक पास एक विशाल चर्च के निर्माण पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब किसी क्षेत्र में बहुसंख्यक हिंदू आबादी मंदिर के निकट चर्च बनाए जाने का पुरजोर विरोध कर रही हो, तो सरकारी अधिकारियों को उनके विरोध को हल्के में या लापरवाही से दरकिनार नहीं करना चाहिए।

कोयंबटूर के सांप्रदायिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए टिप्पणी

न्यायालय ने कोयंबटूर के सांप्रदायिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए अपनी विधिक टिप्पणी में कहा, कोयंबटूर एक सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील शहर है; इसने अतीत में बम विस्फोट और खूनी धार्मिक दंगे देखे हैं। प्रस्तावित चर्च मौजूदा मारियम्मन मंदिर से कुछ ही दूरी पर बनाया जाना है। जब इलाके में केवल मुट्ठी भर ईसाई परिवार रहते हैं, तो मंदिर के ठीक बगल में एक विशाल चर्च के निर्माण के पीछे दुर्भावना (Mala Fide Intentions) की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।

मामला क्या है? (सार्वजनिक सड़क, जनसांख्यिकी और विधिक विवाद)

राजस्व रिकॉर्ड में ‘सार्वजनिक सड़क’: यह विवाद मुख्य रूप से भूमि के विधिक स्वरूप और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि जिस जमीन (सर्वे नंबर 155/2) पर चर्च बनाया जा रहा है, वह असल में सरकारी बंजर भूमि (Poramboke Land) और एक डामर वाली सार्वजनिक सड़क है। कोर्ट ने भी राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर पाया कि यह एक सड़क है और स्पष्ट किया कि “जब रिकॉर्ड में यह सार्वजनिक सड़क है, तो किसी निजी संस्था का इस पर मालिकाना हक (Title) नहीं हो सकता।”

जनसांख्यिकीय आंकड़े: याचिकाकर्ता के अनुसार, गांव में वर्तमान में लगभग 1,000 परिवार हैं। इनमें से लगभग 950 परिवार हिंदू धर्म मानते हैं, 15 मुस्लिम हैं और केवल कुछ (Handful) परिवार ही ईसाई हैं।

अदालती आदेश की अवहेलना: वर्ष 2010 में स्थानीय हिंदुओं के विरोध के बावजूद इस चर्च के निर्माण की अनुमति दी गई थी, जिसे सिविल कोर्ट (District Munsif Court) में चुनौती दी गई है और मामला अभी लंबित है। इसके बावजूद निर्माण कार्य की कोशिश की जा रही थी।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: संविधान, अधिकार और राजनीतिक सत्ता

खंडपीठ ने इस मामले में अनुच्छेद 25 और वर्तमान राजनीतिक हालात पर बेहद स्पष्ट राय रखी।

अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ के अधीन है

अदालत ने स्वीकार किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। लेकिन यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है, यह ‘पब्लिक ऑर्डर’ (सार्वजनिक व्यवस्था) के अधीन आता है। कोर्ट ने कहा कि यदि अंतरिम रोक नहीं लगाई गई, तो सामाजिक सौहार्द को अपूरणीय क्षति (Irreparable hardship) हो सकती है।

राज्य केवल ‘बहुसंख्यक’ के दबाव में न झुके, लेकिन न्याय करे

कोर्ट ने एक संतुलन बनाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्य केवल इसलिए झुक जाए क्योंकि बहुसंख्यक विरोध कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा: “यदि किसी का अधिकार स्थापित होता है या विरोध अनुचित पाया जाता है, तो राज्य को अधिकार कायम रखने के लिए किसी भी हद तक जाना चाहिए।” लेकिन वर्तमान मामले में, प्रथम दृष्टया (Prima Facie) चर्च के पास वैध अधिकार नहीं पाया गया।

सत्ता परिवर्तन से कानून नहीं बदलता (सीएम विजय सरकार का संदर्भ)

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राज्य में सत्ता परिवर्तन (अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय के नए मुख्यमंत्री बनने) और विधानसभा में स्पीकर द्वारा बाइबिल की आयतें पढ़ने तथा उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म’ विरोधी टिप्पणियों के बाद से कुछ कट्टरपंथी समूह अति-उत्साहित हो गए हैं। इस राजनीतिक दलील पर कोर्ट ने स्पष्ट और सख्त विधिक रुख अपनाते हुए कहा, राजनीतिक परिदृश्य बदल सकता है। लेकिन जब तक कानून की स्थिति जो है, उसे उसी रूप में लागू करना हमारा विधिक कर्तव्य है।

विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)

विधिक बिंदुमद्रास उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश (29 मई)
याचिकाकर्ताएन. बालासुब्रमण्यम (कलपट्टी, कोयंबटूर)।
विवादित स्थलकोयंबटूर स्थित 100 साल पुराना मारियम्मन मंदिर और उसके पास की जमीन (सर्वे नंबर 155/2)।
पीठ (Coram)जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन।
मुख्य कानूनी आधारविवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘सार्वजनिक सड़क’ (Public Road) है और जनसांख्यिकी के विपरीत निर्माण से ‘पब्लिक ऑर्डर’ बिगड़ सकता है।
अदालत का फैसलामंदिर के पास चर्च के निर्माण पर तत्काल अंतरिम रोक (Interim Injunction)।
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