Bench Partners: न्यायपालिका के गंभीर गलियारों से परे जजों के बीच के आपसी सौहार्द और मानवीय पक्ष को उजागर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने एक बेहद अनूठा और मजेदार संस्मरण साझा किया है।
मशहूर फिल्म ‘अंदाज़ अपना अपना’ के किरदारों पर ‘अमर-प्रेम’ रख दिया था
मौका था पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई के भाषणों और विचारों पर आधारित पुस्तक ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ (The Voice of Justice: Justice Gavai Speaks) के विमोचन का, जहां जस्टिस नाथ ने दोनों जजों की बेंच को वकीलों द्वारा दिए गए इस दिलचस्प निकनेम का खुलासा किया। अदालत का कमरा (Courtroom) अक्सर वकीलों, खासकर युवा वकीलों के लिए एक डरावनी और तनावपूर्ण जगह हो सकता है। लेकिन न्यायपीठ (Bench) पर बैठे जजों का स्वभाव यदि सहज और विनोदी हो, तो गरिमा और अनुशासन से समझौता किए बिना भी माहौल को हल्का रखा जा सकता है। जब मैं और पूर्व सीजेआई बी.आर. गवई एक साथ बेंच पर बैठते थे, तो बार (Bar) के सदस्यों ने हमारी अटूट जुगलबंदी और भाईचारे को देखकर प्यार से हमारा नाम बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘अंदाज़ अपना अपना’ के किरदारों पर ‘अमर-प्रेम’ रख दिया था।”
कोर्ट रूम के ‘अमर-प्रेम’: जब जजों ने भी लिया पब्लिसिटी का मजा
जस्टिस विक्रम नाथ ने उस दौर को याद किया जब वे और पूर्व सीजेआई जस्टिस गवई नियमित रूप से एक साथ पीठ (Bench Partners) के रूप में मुकदमों की सुनवाई करते थे।
वकीलों का मिला प्यार: जस्टिस नाथ ने कहा, “आप में से कई लोगों को वह समय याद होगा जब हम दोनों एक साथ बैठते थे। वे वास्तव में बेहद यादगार दिन थे। आज भी जब मैं बार के सदस्यों से मिलता हूँ, तो वे बड़े चाव और स्नेह के साथ उन दिनों को याद करते हैं।”
‘अंदाज अपना अपना’ कनेक्शन: उन्होंने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया कि वकीलों ने उनकी आपसी केमिस्ट्री को देखते हुए उन्हें ‘अमर-प्रेम’ (फिल्म में आमिर खान और सलमान खान के निभाए गए प्रसिद्ध किरदार) का खिताब दिया था। जस्टिस नाथ ने कहा, “यह सब विशुद्ध रूप से अच्छे हास्य (Good Humour) में कहा गया था और मुझे यह स्वीकार करना चाहिए कि हम दोनों ने भी इस टाइटल का काफी आनंद लिया।”
गरिमा के साथ सहजता: जस्टिस गवई के व्यक्तित्व की खासियत
जस्टिस विक्रम नाथ ने पूर्व सीजेआई गवई के व्यक्तित्व की तारीफ करते हुए कहा कि यह निकनेम सिर्फ मजाक नहीं था, बल्कि यह जस्टिस गवई की उस अद्भुत क्षमता को दर्शाता था जिसके जरिए वे किसी भी गंभीर स्थिति को असहज किए बिना तनावमुक्त कर देते थे।
करुणा और दृढ़ता का संतुलन: उन्होंने कहा कि अदालत कक्ष में जस्टिस गवई की हाजिरजवाबी (Wit) और सहज स्वभाव ने हमेशा सभी को चाहे वह अपना पहला केस लड़ रहा कोई युवा वकील हो या बार का कोई बेहद वरिष्ठ सदस्य—यह महसूस कराया कि उन्हें सुना जा रहा है। उन्होंने साबित किया कि शिष्टाचार और करुणा (Courtesy and Compassion) कभी भी विधिक दृढ़ता या अनुशासन के आड़े नहीं आते।
पुस्तक की महत्ता: फैसले कानून बोलते हैं, भाषण जज का दिल
जस्टिस बी.आर. गवई की नई किताब पर बात करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह पुस्तक “सामयिक भी है और लंबे समय से प्रतीक्षित भी”। उन्होंने जजों के सार्वजनिक जीवन पर एक बेहद बारीक टिप्पणी की, अदालती फैसले (Judgments) अनिवार्य रूप से कानून की एक अनुशासित और नपी-तुली भाषा में बोलते हैं। वे कानूनी सीमाओं से बंधे होते हैं। इसके विपरीत, एक न्यायाधीश द्वारा सार्वजनिक मंचों पर दिए गए भाषण (Speeches) अक्सर उस जज के व्यक्तिगत मूल्यों, उसकी संस्थागत आस्था और समाज के प्रति उसके दृष्टिकोण (Vision) के बारे में कहीं अधिक गहरी बातें उजागर करते हैं। वे हमें बताते हैं कि एक जज वास्तव में किस तरह के समाज का निर्माण करने की उम्मीद रखता है।
केस शीट: सुप्रीम कोर्ट ‘अमर-प्रेम’ विधिक सौहार्द समीक्षा (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्चतम न्यायालय का विधिक और अनौपचारिक संदर्भ |
| वक्ता (न्यायाधीश) | जस्टिस विक्रम नाथ (माननीय न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट) |
| मुख्य संदर्भ (पूर्व CJI) | पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई (Justice B.R. Gavai) |
| पुस्तक का नाम | ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ |
| मशहूर निकनेम | “अमर-प्रेम” (पॉपुलर कल्ट फिल्म अंदाज़ अपना अपना से प्रेरित) |
| संबोधन का विषय | अदालती प्रक्रियाओं में संवेदनशीलता, हास्यबोध और जजों के संवैधानिक मूल्य। |

