Fake Birth Certificate: दिल्ली हाईकोर्ट ने मास्टर आरव गिरि के मामले में फैसला सुनाते हुए सेंट कोलंबस स्कूल (St. Columba’s School) और सीबीएसई (CBSE) को निर्देश दिया है कि वे 12वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्र के आधिकारिक रिकॉर्ड और 10वीं के सर्टिफिकेट में उसकी सही जन्मतिथि दर्ज करें।
छात्र के माता-पिता पर ₹2 लाख का भारी जुर्माना
हाईकोर्ट के जस्टिस विकास महाजन की एकल पीठ ने अनुचित साधनों (Unethical Means) का सहारा लेकर धोखाधड़ी से स्कूल में दाखिला कराने वाले छात्र के माता-पिता पर ₹2 लाख का भारी जुर्माना (Exemplary Costs) ठोका है। अदालत ने कहा, चार साल की उम्र में स्कूल में दाखिला लेते समय माता-पिता द्वारा दी गई गलत जन्मतिथि या अनैतिक आचरण के लिए नाबालिग बच्चे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और न ही उसे इसकी सजा दी जा सकती है। जब बच्चा लगभग एक दशक तक स्कूल में पढ़ चुका हो और कक्षा 10वीं व 11वीं पास कर चुका हो, तो केवल इस आधार पर उसके सालों के शैक्षणिक करियर को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, गलत और फर्जी जानकारी देने वाले माता-पिता को भी बिना किसी सजा के छूटने नहीं दिया जा सकता।
मामला क्या है?: दाखिले की पात्रता (Eligibility) के लिए 1 महीने का फर्जीवाड़ा
अप्रैल 2014 का दाखिला: सेंट कोलंबस स्कूल में किंडरगार्टन (KG) में दाखिले का नियम था कि बच्चे का जन्म 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2010 के बीच होना चाहिए।
असली बनाम फर्जी जन्मतिथि: छात्र की वास्तविक जन्मतिथि 23 अप्रैल 2010 थी, जिससे वह दाखिले के लिए केवल 23 दिन छोटा था और अयोग्य (Ineligible) हो जाता। दाखिला पाने के लिए उसके माता-पिता ने उसकी जन्मतिथि 23 मार्च 2010 घोषित की और एक जन्म प्रमाणपत्र भी जमा करा दिया।
मामले का खुलासा: 10 साल तक उसी स्कूल में पढ़ने के बाद जब छात्र 12वीं कक्षा में पहुंचा, तो उसने अपने 2011 के मूल जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर सीबीएसई और स्कूल में अपनी जन्मतिथि को सही (23 अप्रैल 2010) करने का आवेदन किया।
स्कूल और CBSE का विरोध: स्कूल का तर्क था कि यदि जन्मतिथि सुधारी जाती है, तो उसका 2014 का शुरुआती दाखिला ही अवैध (Void) हो जाएगा। वहीं सीबीएसई का कहना था कि उनके रिकॉर्ड वही हैं जो स्कूल ने भेजे थे।
हाई कोर्ट के 3 महत्वपूर्ण विधिक निष्कर्ष (Legal Principles)
बच्चे का कोई दोष नहीं (Child Cannot Suffer)
अदालत ने कहा कि जब 2014 में बच्चे का दाखिला हुआ था, तब वह महज 4 साल का था। उसे अपने माता-पिता के इस कृत्य का कोई ज्ञान नहीं था। आज वह 12वीं में है और लगभग 10 साल की पढ़ाई पूरी कर चुका है। इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद केवल 1 महीने के अंतर के कारण उसके पूरे करियर और दाखिले को शून्य घोषित करना बच्चे के साथ अन्याय होगा।
दस्तावेजों में विसंगति से भविष्य में खतरा
कोर्ट ने माना कि अगर 10वीं के सर्टिफिकेट (CBSE) और बाकी पासपोर्ट/आधिकारिक दस्तावेजों में जन्मतिथि अलग-अलग रहेगी, तो छात्र को भारत या विदेशों के कॉलेजों में दाखिला लेते समय गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा और उसकी पहचान पर सवाल उठेंगे। इसलिए सीबीएसई को 4 सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड सुधारने का आदेश दिया गया।
अनैतिक साधनों पर ₹2 लाख का जुर्माना
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि धोखाधड़ी और गलत हलफनामा/दस्तावेज देने वाले माता-पिता को बिना किसी दंड के जाने नहीं दिया जा सकता।
अदालत की टिप्पणी: हालांकि अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि याचिकाकर्ता (छात्र) की कोई गलती नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता को ‘स्कॉट-फ्री’ (बिना सजा) जाने नहीं दिया जा सकता। उन्होंने जानबूझकर गलत जानकारी दी और अनैतिक साधनों का सहारा लिया। इसलिए यह राहत माता-पिता द्वारा ₹2 लाख का अनुकरणीय जुर्माना जमा करने की शर्त पर दी जाती है।
जुर्माने की राशि का उपयोग कहां होगा?
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि माता-पिता को यह ₹2 लाख की राशि 2 सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) में जमा करानी होगी। इस फंड का उपयोग विशेष रूप से बार एसोसिएशन के कर्मचारियों/स्टाफ के बच्चों की प्राथमिक और उच्च शिक्षा की सहायता के लिए किया जाएगा।
केस मैट्रिक्स: दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
| कानूनी और प्रक्रियात्मक श्रेणी | अदालत द्वारा तय की गई स्थिति |
| मामले का नाम | मास्टर आरव गिरि (अभिभावक के माध्यम से) बनाम सेंट कोलंबस स्कूल व अन्य |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस विकास महाजन (Justice Vikas Mahajan) |
| संबंधित संस्थान | सेंट कोलंबस स्कूल और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) |
| मुख्य विवाद | KG दाखिले के लिए जन्मतिथि 23 अप्रैल 2010 की जगह 23 मार्च 2010 दिखाई गई थी। |
| छात्र के पक्ष में आदेश | सीबीएसई व स्कूल 4 सप्ताह में 10वीं के सर्टिफिकेट और 12वीं के रजिस्ट्रेशन में सही जन्मतिथि (23 अप्रैल 2010) दर्ज करें। |
| माता-पिता पर पेनल्टी | धोखाधड़ी और गलत दस्तावेज देने के लिए ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) का जुर्माना। |
| जुर्माने का जमा कोष | दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा हेतु)। |

