Wednesday, October 28, 2026
HomeHigh CourtProfessional Judgment: मरीज यह दबाव नहीं बना सकता कि डॉक्टर कौन सा...

Professional Judgment: मरीज यह दबाव नहीं बना सकता कि डॉक्टर कौन सा डायग्नोस्टिक टेस्ट लिखे…डॉक्टरों के न्यायिक विवेक पर यह केस अहम

Professional Judgment: केरल उच्च न्यायालय के जस्टिस बीचू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने एक पूर्व वायुसेना कर्मी की याचिका को खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा, मरीज डॉक्टर की सलाह से इलाज कराने के लिए बाध्य है, न कि डॉक्टर मरीज के ‘निर्देशों’ या इच्छा के अनुसार काम करने के लिए। सीटी स्कैन (CT Scan) या एमआरआई (MRI) जैसे महत्वपूर्ण डायग्नोस्टिक टेस्ट कराने का फैसला केवल और केवल डॉक्टर के पेशेवर न्यायिक विवेक (Professional Judgment) पर निर्भर करता है।

मामला क्या था?: जनरल अस्पताल, एर्नाकुलम से जुड़ा विवाद

याचिकाकर्ता का पक्ष: भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी (अरुण पी.के.) ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि एर्नाकुलम के सरकारी जनरल अस्पताल को उनका उचित इलाज करने और सीटी/एमआरआई स्कैन जैसे टेस्ट लिखने का निर्देश दिया जाए।

आरोप: याचिकाकर्ता का कहना था कि वह सिर दर्द और असामान्य संवेदनाओं से पीड़ित थे। 4 जून को अस्पताल जाने पर डॉक्टरों ने बिना कोई कारण बताए सही जांच करने या स्कैन टेस्ट लिखने से मना कर दिया।

हाई कोर्ट के प्रमुख अवलोकन और कानूनी सिद्धांत

जांच लिखना डॉक्टर का विशेषाधिकार

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी मरीज के लक्षणों को देखकर किस टेस्ट की जरूरत है, यह तय करना पूरी तरह डॉक्टर का अधिकार है।

अदालत की तल्ख टिप्पणी: मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार चलना होता है, न कि डॉक्टर को मरीज के निर्देशों का पालन करना होता है। किसी विशेष प्रकार के स्कैन की आवश्यकता है या नहीं, यह पूरी तरह से डॉक्टर का डायग्नोस्टिक विशेषाधिकार (Diagnostic Prerogative) है। कोई मरीज डॉक्टर पर यह दबाव नहीं बना सकता कि उसे अमुक स्कैन ही लिखा जाए।

साक्ष्यों का अभाव और अस्पष्ट आरोप

राज्य सरकार (State) की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के पास केवल एक ओपीडी (Outpatient) पर्ची थी, लेकिन ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने किसी डॉक्टर से परामर्श लिया था। अदालत ने नोट किया कि याचिकाकर्ता ने उस डॉक्टर के नाम या पहचान का खुलासा नहीं किया जिससे उन्होंने मुलाकात की थी। बिना किसी पुख्ता दस्तावेज के अस्पताल या डॉक्टरों पर लापरवाही/इलाज से इनकार का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

केस मैट्रिक्स: Arun PK v. State of Kerala

प्रक्रियात्मक पहलूविवरण / अदालत की स्थिति
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस बीचू कुरियन थॉमस
मुख्य कानूनी मुद्दाक्या मरीज डॉक्टर पर विशिष्ट मेडिकल टेस्ट (CT/MRI) लिखने का दबाव बना सकता है?
याचिकाकर्ता के वकीलअधिवक्ता श्वेता पी. दिलीप एवं जॉनसन एम.एम.
राज्य का पक्षसरकारी वकील अनिरुद्ध कडाविल
अदालत का निर्णययाचिका खारिज; डायग्नोस्टिक टेस्ट का निर्णय डॉक्टर का एकाधिकार माना गया।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
overcast clouds
27.7 ° C
27.7 °
27.7 °
51 %
0.8kmh
100 %
Wed
29 °
Thu
22 °
Fri
21 °
Sat
28 °
Sun
29 °

Recent Comments