Tuesday, August 4, 2026
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Third-Party Victims:क्या लाइसेंस न होने पर पारिवारिक दुर्घटना मामलों में ‘Pay and Recover’ नियम लागू होगा?…Pay & Recover का यह नियम

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुकर्नाटक उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026)
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस शिवशंकर अमरन्नवर
दुर्घटना का समय/स्थानसितंबर 2019, हसन (कर्नाटक)
मुख्य विधिक प्रश्नक्या लाइसेंस न होने पर पारिवारिक दुर्घटना मामलों में ‘Pay and Recover’ नियम लागू होगा?
अदालत का फैसलानहीं। तीसरे पक्ष के विपरीत, पारिवारिक सदस्यों के दावों में जहां मालिक/चालक दोषी है, कंपनी को भुगतान का आदेश नहीं दिया जा सकता।
मुआवजा राशि व देनदारी₹25.5 लाख (6% ब्याज सहित) – भुगतान की पूरी जिम्मेदारी पिता/वाहन मालिक की होगी।

Third-Party Victims: मोटर वाहन दुर्घटना दावों से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्टीकरण जारी किया है।

जस्टिस शिवशंकर अमरन्नवर की एकल पीठ ने हसन (Hassan) जिले के एक मामले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के फैसले को बरकरार रखते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।अदालत ने कहा कि यह नियम तीसरे पक्ष (Third-Party Victims) के दावों पर लागू होता है, लेकिन जब दुर्घटना परिवार के भीतर ही हुई हो और वाहन चालक/मालिक खुद परिवार का सदस्य हो, तब ‘पे एंड रिकवर’ का सिद्धांत लागू नहीं होगा। अदालत ने फैसला सुनाया है कि पॉलिसी का उल्लंघन (Policy Violation) होने पर हर मामले में बीमा कंपनी को ‘पे एंड रिकवर’ (Pay and Recover – पहले कंपनी भुगतान करे, फिर मालिक से वसूले) के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

मामला क्या था? (Case Background)

  • यह मामला वर्ष 2019 की एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना से संबंधित है।
  • दुर्घटना: 28 सितंबर 2019 को हलेबिड (बेलूर तालुका) की रहने वाली मंजुला अपने पति मंजूनाथ के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे (Pillion Rider) बैठकर जा रही थी। मंजूनाथ की लापरवाही और तेज गति के कारण बाइक अनियंत्रित हो गई, जिससे मंजुला को सिर में गंभीर चोट आई और उसकी मृत्यु हो गई।
  • ट्रिब्यूनल का आदेश (अप्रैल 2023): दंपति के बच्चों (पवन और पवित्रा) ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजे के लिए क्लेम दायर किया। बेंगलुरु के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने ₹25.5 लाख (6% वार्षिक ब्याज के साथ) का मुआवजा तो मंजूर किया, लेकिन बीमा कंपनी को इसके भुगतान से पूरी तरह मुक्त कर दिया।
  • मुआवजे की देनदारी किस पर?: ट्रिब्यूनल ने पाया कि पति (मालिक व चालक) के पास दुर्घटना के समय वैध ड्राइविंग लाइसेंस (Valid DL) नहीं था, जो कि इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का सीधा उल्लंघन है। इसलिए अदालत ने बीमा कंपनी के बजाय पिता को ही अपने बच्चों को मुआवजा देने का निर्देश दिया।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: “पारिवारिक दावों में बीमा कंपनी पर बोझ नहीं”

बच्चों ने ट्रिब्यूनल के फैसले को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने मांग की थी कि मुआवजा बढ़ाया जाए और बीमा कंपनी को पहले राशि का भुगतान करने (Pay) और बाद में उनके पिता से वसूलने (Recover) का निर्देश दिया जाए।

उच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया।

Pay and Recover का दायरा सीमित है

न्यायालय ने माना कि ‘पे एंड रिकवर’ का सिद्धांत विशेष रूप से किसी अज्ञात या बाहरी तीसरे पक्ष (Third-party victim) के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है।

चालक/मालिक खुद पारिवारिक सदस्य

पीठ ने टिप्पणी की, दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति याचिकाकर्ताओं का पिता है, जो बीमित वाहन का मालिक भी है। चूंकि उसने बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाकर पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया है, इसलिए बीमा कंपनी को पहले मुआवजे का भुगतान करने और बाद में उससे वसूलने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश (Court Verdict)

  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
  • बीमा कंपनी (Reliance General Insurance) को किसी भी तरह के भुगतान दायित्व से मुक्त रखा गया।
  • बच्चों को क्षतिपूर्ति राशि की वसूली अपने पिता (वाहन मालिक व चालक) से ही करनी होगी।
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