केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक श्रेणियां | सर्वोच्च न्यायालय का आदेश (4 अगस्त 2026) |
| संबंधित अदालत | भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची, जस्टिस वी. मोहना |
| मुख्य विषय | ‘डिजिटल अरेस्ट’ एवं साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने हेतु दिशानिर्देश |
| RBI के लिए समय-सीमा | म्यूल खातों हेतु SOP जारी करने के लिए 4 सप्ताह का समय |
| मुख्य पोर्टल/सिस्टम | Grievance Redressal Module, Money Restoration Module, e-Zero FIR |
| अगली सुनवाई | 16 सितंबर 2026 (समेकित नई स्थिति रिपोर्ट पेश की जाएगी) |
डिजिटल अरेस्ट: देश भर में तेज़ी से पैर पसार रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट पर विचार करने के बाद 10 प्रमुख अंतरिम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पाया कि प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतें वर्ष 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 हुईं और 30 जून 2026 तक घटकर 16,377 रह गईं। इसके बावजूद, पीड़ितों के पैसे की त्वरित वापसी और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कोर्ट ने निरंतर निगरानी को आवश्यक माना है।
सीबीआई की जांच में बड़ा पर्दाफाश
अदालत ने नोट किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 10 मुख्य और कई संबंधित मामले दर्ज किए हैं। केवल एक जांच में सीबीआई ने-
- 238 पीड़ितों की पहचान की।
- धोखाधड़ी में प्रयुक्त 67 फर्स्ट-लेयर (mule) बैंक खातों को ट्रैक किया।
- लगभग ₹80 करोड़ रुपये का संदेहास्पद लेनदेन पकड़ा।
- 16 राज्यों में 93 स्थानों पर छापेमारी की।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी 10 मुख्य निर्देश (10 Nationwide Directives)
- म्यूल खातों पर SOP (RBI हेतु निर्देश): भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को 4 सप्ताह के भीतर साइबर फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts) से निपटने के लिए एक मानकीकृत कार्यप्रणाली (SOP) तैयार करने और सभी राज्यों व हाई कोर्ट्स के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का आदेश दिया गया।
- शिकायत और धन वापसी मॉडल का संचालन: सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को MHA की 2 जनवरी 2026 की SOP के तहत ‘ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल’ (Grievance Redressal Module) और ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ (Money Restoration Module) को तुरंत पूरी तरह चालू करने के निर्देश दिए गए।
- हाई कोर्ट्स के लिए निर्देश: सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया कि वे बैंक खाते फ्रीज होने के मामलों से निपटने वाली निचली अदालतों और अधिकारियों को इन शिकायत निवारण तंत्रों के बारे में सूचित करें ताकि पीड़ित इनका लाभ उठा सकें।
- ‘e-Zero FIR’ व्यवस्था: जिन राज्यों ने अभी तक राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र अधिसूचित नहीं किए हैं, वे 4 सप्ताह में ऐसा करें और I4C के परामर्श से ‘e-Zero FIR’ प्रणाली लागू करें।
- खाता फ्रीजिंग मामलों का त्वरित निपटारा: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के कारण फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
- तकनीकी समाधान और बैंक समन्वय: अंतर-विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee) बैंकों और बिचौलियों (Intermediaries) के साथ मिलकर ऐसी तकनीकी व्यवस्था बनाए जो स्कैम को रोके, धोखाधड़ी की रकम की रिकवरी में मदद करे और जांच में तेजी लाए।
- विधिक सेवा प्राधिकरणों द्वारा जागरूकता: राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSAs) तुरंत डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों से बचने व पैसों की रिकवरी के तरीकों पर जन-जागरूकता अभियान चलाएं।
- साझा जवाबदेही एवं पीड़ित मुआवजा ढांचा: अंतर-विभागीय समिति को धोखाधड़ी मामलों में बैंकों/एजेंसियों की साझा जवाबदेही (Shared Liability) और पीड़ित मुआवजा ढांचे (Victim Compensation Framework) के प्रस्ताव की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
- CBI जांच का मौद्रिक दायरा (Threshold): सीबीआई द्वारा जांच के लिए तय ₹10 करोड़ की सीमा को घटाने तथा एक ही संगठित नेटवर्क के अलग-अलग छोटे मामलों को जोड़कर (Aggregation) जांच करने की संभावना पर विचार जारी रखने को कहा गया है।
- दूरसंचार सेवाओं पर समय-आधारित सीमा: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT) और I4C को निर्देश दिया गया है कि वे संदिग्ध/धोखाधड़ी में शामिल टेलीकॉम सेवाओं के ऑडियो और वीडियो कॉल पर समय-आधारित प्रतिबंध (Time-based Restrictions) लगाने के प्रस्ताव पर विचार करें।
अब तक की प्रगति और आंकड़े
- MoU पर हस्ताक्षर: RBI इनोवेशन हब और I4C के बीच 11 मई 2026 को डेटा-शेयरिंग समझौता हुआ है।
- बैंकों का जुड़ाव: साइबर अपराध शिकायत निवारण पोर्टल 69 बैंकों की 1,23,590 शाखाओं को कवर करता है।
- रकम की वापसी: मनी रेस्टोरेशन पोर्टल से 57 बैंक जुड़े हैं, और अब तक 36,290 मामलों में कुल ₹18.05 करोड़ की राशि पीड़ितों को वापस लौटाई जा चुकी है।
- नए टेलीकॉम नियम: फर्जी सिम कार्ड और अवैध रेडियो उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए दूरसंचार (रेडियो उपकरण स्वामित्व अधिकार) नियम, 2025 अधिसूचित हो चुके हैं और यूज़र आइडेंटिफिकेशन नियम अंतिम चरण में हैं।

