Tuesday, September 1, 2026
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CBI vs AAP: केजरीवाल और सिसोदिया की मुक्ति के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची CBI; 974 पन्नों की याचिका दायर…9 मार्च को होगी जिरह

CBI vs AAP: दिल्ली आबकारी नीति मामले में सभी 23 आरोपियों (जिनमें अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया शामिल हैं) को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

CBI ने इस फैसले को “पूरी तरह से अवैध और त्रुटिपूर्ण” बताया है। सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका अधिवक्ता मनु मिश्रा और गरिमा सक्सेना के माध्यम से दायर की गई है।

CBI की याचिका की 5 बड़ी बातें:

  • मिनी-ट्रायल’ का आरोप: CBI का कहना है कि स्पेशल जज ने आरोप तय करने (Charge Framing) के चरण पर ही ‘मिनी-ट्रायल’ शुरू कर दिया और सबूतों की गहराई से ऐसी जांच की जो इस स्तर पर कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
  • टुकड़ों में देखा मामला: जांच एजेंसी के अनुसार, कोर्ट ने साजिश के अलग-अलग हिस्सों को अलग-थलग करके देखा, जबकि पूरी साजिश को एक साथ (Conjoint reading) जोड़कर देखा जाना चाहिए था।
  • CBI अफसर पर कार्रवाई पर रोक: ट्रायल कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के जो आदेश दिए थे, CBI ने उन्हें “चौंकाने वाला” बताया है और उन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
  • जज की मौखिक टिप्पणी: याचिका में कहा गया है कि जज ने खुद मौखिक रूप से कहा कि उन्होंने पिछले 4 महीने केवल इसी फाइल को पढ़ने में बिताए हैं, जो दिखाता है कि उन्होंने सबूतों का विश्लेषण बहुत ज्यादा विस्तार से किया है।
  • पक्षपाती रीडिंग: CBI का तर्क है कि जज ने अभियोजन पक्ष के मामले को ‘सिलेक्टिव’ तरीके से पढ़ा और आरोपियों की संलिप्तता दिखाने वाली सामग्री को नजरअंदाज कर दिया।

ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा था? (27 फरवरी का फैसला)

  • स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सभी आरोपियों को डिस्चार्ज (बरी) करते हुए CBI की कड़ी आलोचना की थी।
  • सिर्फ कल्पना (Conjecture): कोर्ट ने कहा था कि CBI का पूरा मामला केवल कल्पनाओं पर आधारित है और न्यायिक जांच में टिकने लायक नहीं है।
  • सरकारी गवाहों का खेल: कोर्ट ने सरकारी गवाहों (Approvers) के जरिए केस बनाने की प्रक्रिया को ‘संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन’ बताया था।
  • विभागीय जांच: कोर्ट ने CBI के उन अधिकारियों के खिलाफ जांच की सिफारिश की थी जिन्होंने एक सरकारी सेवक (कुलदीप सिंह) को आरोपी नंबर 1 बनाया था।

पृष्ठभूमि: क्या है यह मामला?

  • शुरुआत: जुलाई 2022 में LG वी.के. सक्सेना की शिकायत पर FIR दर्ज हुई।
  • आरोप: आबकारी नीति 2021-22 में शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बदलाव किए गए और इसके बदले ‘किकबैक’ (रिश्वत) ली गई।
  • गिरफ्तारी: इस मामले में केजरीवाल और सिसोदिया समेत कई नेताओं को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।

अब आगे क्या?

यह मामला 9 मार्च, 2026 को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (Listed) है, जब हाई कोर्ट होली की छुट्टियों के बाद खुलेगा।

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